✍️ आध्यात्मिक देवभूमि में सावन की पहली फुहार और अटारिया धाम में महासंगम
उत्तराखंड के पावन कुमाऊं अंचल में स्थित ऐतिहासिक अटारिया देवी मंदिर में आज सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धा, भक्ति और पारिवारिक समरसता का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। रिमझिम बरसती सावन की बूंदों के बीच जब पूरा परिवार एक साथ देवालय की चौखट पर पहुंचा, तो मानो साक्षात् देवगणों ने अपनी कृपा की वर्षा कर दी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
1. शिवालय में जलाभिषेक: भक्ति की अविरल धारा
भक्ति यात्रा की शुरुआत महादेव के जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक से हुई। सावन के पहले सोमवार पर शिवलिंग पर जल अर्पित करना आत्मा को शुद्ध करने जैसा है। “ॐ नमः शिवाय” के सस्वर मंत्रोच्चार के बीच जब तांबे के पात्र से जल की धारा महादेव पर गिरी, तो समूचा वातावरण अलौकिक शांति से भर गया।
2. शक्ति और संहार का वंदन: मां अटारिया और महाकाली की उपासना
तत्पश्चात्, परिवार ने कल्याणी नदी के तट पर विराजमान आदि शक्ति मां अटारिया के चरणों में शीश नवाया। मां के ममतामयी रूप की पूजा-अर्चना के बाद भक्तों ने महाकाली के उग्र किंतु कल्याणकारी रूप की उपासना की। यह पूजा जीवन से सभी नकारात्मक शक्तियों और भय का नाश कर आंतरिक शक्ति का संचार करने वाली रही।
3. ज्ञान, आरोग्य और सुरक्षा की प्रार्थना
- सरस्वती माता की वंदना: बुद्धि, विवेक और अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए विद्या की देवी मां शारदा की स्तुति की गई।
- शीतला माता से आशीर्वाद: जीवन में शीतलता, आरोग्यता और महामारी से परिवार की रक्षा के लिए मां शीतला की विशेष वंदना की गई।
- भैरव देवता की स्तुति: तंत्र-मंत्र और बाधाओं के निवारक, भगवान शिव के अवतार भैरव वीर की स्तुति कर सुरक्षा का कवच मांगा गया।
4. मर्यादा और भक्ति का मिलन: प्रभु श्री राम और बजरंगबली
इस आध्यात्मिक यात्रा का सबसे सुंदर समापन चेतना के दो स्तंभों के मिलन से हुआ। सबसे पहले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान प्रभु श्री राम के पावन चरणों का स्पर्श कर जीवन में धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। इसके तुरंत बाद, राम जी के परम भक्त संकटमोचन बजरंगबली की स्तुति की गई, जिससे परिवार में अटूट बल, बुद्धि और भक्ति का वरदान प्राप्त हुआ।
एक ही पावन परिसर में शिव, शक्ति, विद्या, आरोग्य, मर्यादा और अनन्य भक्ति का यह महासंगम इस बात का प्रमाण है कि जब पूरा परिवार एकजुट होकर ईश्वर की शरण में जाता है, तो वह घर ही तीर्थ बन जाता है।
