युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे: CJP संसद मार्च के बाद पहली बार बोले पीएम मोदी
नई दिल्ली। नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ होने नहीं देगी और पेपर लीक के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि यह देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने बताया कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तत्काल निर्णय लेते हुए दोबारा परीक्षा आयोजित कराई, जिसे सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था की जाएगी।
पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक केवल केंद्र सरकार का विषय नहीं है, बल्कि इसमें राज्यों, जांच एजेंसियों और समाज सभी को मिलकर काम करना होगा ताकि दोषियों को सख्त सजा मिल सके और परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का विश्वास बना रहे।
प्रधानमंत्री का यह बयान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के बाद सामने आया है। इस मार्च में विपक्ष के कई सांसद भी शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान संसद मार्ग क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने हिंसा, तोड़फोड़ और सुरक्षाकर्मियों पर हमले के आरोपों में एफआईआर भी दर्ज की है।
इस बीच, CJP प्रतिनिधिमंडल के सौरव दास और आशुतोष राकां ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन सरकार की ओर से किसी मांग पर तत्काल आश्वासन नहीं दिया गया। हालांकि, जेपी नड्डा ने प्रदर्शन समाप्त कर प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि “युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे” और पेपर लीक के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। यह स्वागतयोग्य घोषणा है, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले लाखों युवाओं की मेहनत, उम्मीद और भविष्य इस व्यवस्था से जुड़ा है। लेकिन अब देश केवल आश्वासन नहीं, बल्कि परिणाम देखना चाहता है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
NEET पेपर लीक विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि परीक्षा प्रणाली अभेद्य है तो बार-बार अनियमितताओं के आरोप क्यों सामने आते हैं? यदि दोषी पकड़े जाते हैं, तो पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश क्यों नहीं होता? यदि कानून सख्त हैं, तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति कैसे होती है?
संसद मार्च के बाद प्रधानमंत्री का बयान यह संकेत देता है कि सरकार इस मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार कर रही है। मगर युवाओं की अपेक्षा इससे आगे की है। वे जानना चाहते हैं कि परीक्षा सुरक्षा प्रणाली में क्या बदलाव होंगे, जांच कब पूरी होगी, दोषियों को कब सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-सी स्थायी व्यवस्था बनाई जाएगी।
यह भी स्पष्ट है कि इस विषय को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित करना समाधान नहीं है। शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास बहाल करना केन्द्र और राज्य सरकारों, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं, जांच एजेंसियों तथा न्यायिक प्रक्रिया—सभी की साझा जिम्मेदारी है।
पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान उस छात्र को होता है, जिसने वर्षों तक ईमानदारी से तैयारी की होती है। परीक्षा रद्द होने पर उसे दोबारा तैयारी, आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि यह मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है।
अब समय आ गया है कि परीक्षा सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाए। सुरक्षित डिजिटल प्रणाली, प्रश्नपत्रों की बहु-स्तरीय सुरक्षा, समयबद्ध जांच, दोषियों के विरुद्ध त्वरित अभियोजन और संस्थागत जवाबदेही जैसे कदमों पर गंभीरता से अमल होना चाहिए।
यदि सरकार का संकल्प वास्तव में “युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे” है, तो उसकी सबसे बड़ी कसौटी यही होगी कि भविष्य में किसी मेहनती छात्र को पेपर लीक के कारण अपनी परीक्षा, अपना वर्ष और अपने सपनों की कीमत न चुकानी पड़े।
देश के युवा केवल बयान नहीं, बल्कि ऐसा बदलाव चाहते हैं जो उनकी मेहनत पर उनका विश्वास फिर से मजबूत करे। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई ही तय करेगी कि यह बयान एक राजनीतिक प्रतिक्रिया था या शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की शुरुआत।
