उत्तराखंड/रुद्रपुर। देवभूमि उत्तराखंड में सावन के तीसरे सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रदेश के प्राचीन और प्रसिद्ध शिवालयों में तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। हर-हर महादेव, बम-बम भोले और ओम नमः शिवाय के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठे। हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा, सरयू, गोमती, कोसी, गौला, किच्छा और अन्य पवित्र जलधाराओं का जल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया तथा परिवार की सुख-समृद्धि, प्रदेश की खुशहाली और विश्व कल्याण की कामना की।
बागेश्वर के विश्वविख्यात बागनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सरयू और गोमती नदी के संगम से पवित्र जल भरकर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का अभिषेक किया। मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, शिव चालीसा पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। पूरे दिन वातावरण भक्तिमय बना रहा।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
बागनाथ मंदिर के साथ-साथ काल भैरव मंदिर, बाणेश्वर मंदिर, बैजनाथ धाम तथा कपकोट क्षेत्र के शिवालयों में भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंची। कांवड़ियों ने भी पवित्र जल से भगवान शिव का अभिषेक कर आस्था व्यक्त की।
उधम सिंह नगर जिले में भी सावन के तीसरे सोमवार का विशेष उत्साह देखने को मिला। रुद्रपुर के प्रसिद्ध अटरिया मंदिर में हजारों श्रद्धालु सुबह से ही दर्शन के लिए पहुंचने लगे। मंदिर में बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूध, दही, शहद और गंगाजल से भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया गया। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और शिव आरती ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।
रुद्रपुर शहर के अन्य शिवालयों के साथ-साथ किच्छा, शांतिपुरी, गदरपुर, सितारगंज, खटीमा, काशीपुर और बाजपुर के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। कई स्थानों से कांवड़ यात्राएं भी निकाली गईं और शिवभक्तों ने भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। मंदिर समितियों ने प्रसाद वितरण और श्रद्धालुओं के लिए पेयजल व विश्राम की व्यवस्था की।
नैनीताल जिले के प्राचीन शिव मंदिरों में भी सुबह से भक्तों का आगमन जारी रहा। पर्वतीय क्षेत्र के मंदिरों में स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों ने भी भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। प्राकृतिक सौंदर्य के बीच गूंजते शिव मंत्रों ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।
अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर धाम, कटारमल क्षेत्र के शिवालयों, चितई तथा अन्य प्राचीन मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित जागेश्वर धाम में विशेष रुद्राभिषेक, वेद मंत्रों का उच्चारण और शिव महिमा का गुणगान हुआ। दूर-दराज़ से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
पिथौरागढ़ जिले के पाताल भुवनेश्वर, थल क्षेत्र के शिव मंदिरों, गंगोलीहाट तथा अन्य प्राचीन शिवालयों में भी भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। पहाड़ों की शांत वादियों में गूंजते हर-हर महादेव के जयघोष ने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया।
देहरादून में टपकेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। तड़के से ही लंबी कतारों में खड़े भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। प्राकृतिक गुफा में स्थित शिवलिंग पर निरंतर जलधारा गिरने का अद्भुत दृश्य श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहा। इसके अलावा लाखामंडल, प्रकाशेश्वर महादेव, संतला देवी क्षेत्र के शिवालयों तथा अन्य प्रमुख मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना आयोजित की गई।
हरिद्वार के दक्ष महादेव मंदिर, ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव मंदिर, चमोली के गोपेश्वर महादेव, उत्तरकाशी के विश्वनाथ मंदिर, रुद्रप्रयाग के कोटेश्वर महादेव, चंपावत के बालेश्वर महादेव, पौड़ी के ताड़केश्वर महादेव तथा टिहरी और चमोली के अनेक प्राचीन शिवालयों में भी श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। कांवड़ियों और शिवभक्तों ने पूरे उत्साह के साथ भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
प्रदेशभर के मंदिरों में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, शिव पुराण कथा, भजन संध्या, भंडारे और धार्मिक आयोजनों का क्रम दिनभर चलता रहा। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया। अनेक श्रद्धालुओं ने सावन सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना की।
श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए विभिन्न जिलों में पुलिस प्रशासन, मंदिर समितियों और स्वयंसेवकों ने सुरक्षा तथा यातायात की विशेष व्यवस्था की। मंदिर परिसरों में चिकित्सा सहायता, पेयजल, स्वच्छता और कतार प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की गई, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित होती रही।
सावन का तीसरा सोमवार केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत स्वरूप भी बनकर सामने आया। हिमालय की गोद में बसे प्राचीन शिवालयों में उमड़ी श्रद्धा ने यह संदेश दिया कि देवभूमि की आध्यात्मिक चेतना आज भी उतनी ही प्रखर है जितनी सदियों पहले थी। हर-हर महादेव के जयघोष के साथ पूरा उत्तराखंड शिवभक्ति में सराबोर दिखाई दिया और श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से सुख, शांति, समृद्धि तथा विश्व कल्याण का आशीर्वाद मांगा।
