मास्टरमाइंड हेमंत शर्मा वर्तमान में सुद्धोवाला जेल में बंद है।
ईडी की जांच के अनुसार हेमंत ने साल 2014-15 में ठगी का यह खेल शुरू किया था। उसने आइसलैंड में पंजीकृत बीटीसी फंड डॉट आईएस नाम की एक फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों से निवेश कराया। निवेशकों को ऊंचे मुनाफे का लालच दिया गया। भारी मात्रा में बिटकॉइन एकत्र करने के बाद उसने वेबसाइट अचानक बंद कर दी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
बिटकॉइन से 200 करोड़ जुटाए
ब्लॉक चेन विश्लेषण में सामने आया है कि आरोपी ने अपराध के जरिए लगभग 856.23 बिटकॉइन (जिसकी वर्तमान कीमत करीब 200 करोड़ रुपये है) जुटाए। इन बिटकॉइन को विभिन्न क्रिप्टो एक्सचेंजों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग कर ठिकाने लगाया गया। हेमंत ने दो बीएमडब्ल्यू कारें, दून के पॉश इलाके में एक बंगला और आसपास के क्षेत्रों में करोड़ों की अचल संपत्तियां खरीदीं।
साइबर ठगी: दून में 42 खातों पर वार, ₹97 लाख पार
अंकित कुमार चौधरी/देहरादून: देहरादून में साइबर ठगी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ठग अब अधिक संगठित और आक्रामक तरीके से लोगों को निशाना बनाकर उनकी मेहनत की कमाई हड़प रहे हैं।
शहर में 42 लोगों से 97 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में लंबित शिकायतों के आधार पर अब संबंधित थानों में मुकदमे दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
सबसे बड़ी ठगी
सबसे बड़ी ठगी पाम सिटी निवासी सर्वेश भार्गव के साथ हुई, जिनसे 16.45 लाख रुपये हड़प लिए गए। वहीं शास्त्रीनगर, नेहरू कॉलोनी के अंकित सजवाण से 11.61 लाख रुपये धमकाने के जरिए ले लिए गए।
ई-जीरो एफआईआर सिस्टम
● यह सिस्टम साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए शुरू किया गया है। इसमें शिकायत होते ही तुरंत जीरो एफआईआर दर्ज हो जाती है, जिससे जांच में देरी नहीं होती।
● सात मार्च 2026 को गृह मंत्री अमित शाह ने हरिद्वार से की थी सिस्टम की औपचारिक शुरुआत, इस सिस्टम को अपनाने वाला देश का तीसरा राज्य बना उत्तराखंड।
● पुलिस मुख्यालय की समीक्षा में कई जिलों में लंबित केस मिले, लंबित जीरो एफआईआर को अब संबंधित थानों में ट्रांसफर किया जा रहा, पीड़ितों के थाने नहीं पहुंचने से पेंडिंग रही एफआईआर।
कैसे करें शिकायत
● ठगी होने पर पीड़ित हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। शिकायत मिलते ही ई-जीरो एफआईआर दर्ज हो जाती है।
● एफआईआर के बाद तीन दिन में पीड़ित को थाने में हस्ताक्षर करने होते हैं। इसके बाद इन्हें संबंधित थाने को ट्रांसफर कर दिया जाता है।
पुलिस मुख्यालय ने हाल में ई-जीरो एफआईआर सिस्टम की समीक्षा की। इस दौरान पाया कि कई जिलों में काफी मामले लंबित हैं। इसके बाद देहरादून में शनिवार-रविवार करीब 56 केस दर्ज किए गए। सोमवार को भी सिलसिला जारी रहा व करीब तीस केस दर्ज किए गए।
