उत्तराखंड में एसआईआर अभियान के दौरान धड़ाधड़ नोटिसों ने आम लोगों की नींद उड़ा दी है। हम पिथौरागढ़ की बात कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत सबसे अधिक नोटिस विवाहिताओं को मिल रहे हैं।

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देश की Census 2027 प्रक्रिया का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होने जा रहा है और इस बार जनगणना कई मायनों में पहले से अलग होगी। पहली बार देशभर में जाति आधारित गणना की जाएगी।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

वहीं, रिकॉर्ड में एक ही व्यक्ति को 6 अलग-अलग मतदाताओं ने अपने पिता के रूप में दिखाया है। डेटा मिलान के नाम पर जिले भर में 89 हजार से अधिक लोगों को नोटिस जारी हुए हैं।

विवाहिताओं की सबसे अधिक मुश्किल है कि उनका विवाह के बाद उपनाम (सरनेम) बदल गया था। कागजी रिकॉर्ड की पड़ताल में एक ही व्यक्ति को छह अलग-अलग मतदाताओं का पिता दर्ज पाया गया। जिसके बाद अब आम नागरिकों को अपना मताधिकार बचाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

शादी पुरानी, सरनेम बदला…तो सिस्टम ने माना संदेहास्पद

पिथौरागढ़। जानकारी के अनुसार जिले में नोटिस पाने वालों में सबसे बड़ा आंकड़ा महिलाओं का है। 2003 की सूची में महिलाओं का नाम उनके पिता के उपनाम (मायके के सरनेम) के साथ दर्ज था। शादी के बाद ससुराल आने पर उन्होंने पति का सरनेम अपना लिया। एसआईआर के दौरान जब 2003 के डिजिटल रिकॉर्ड का आज के डेटा से मिलान किया गया, तो सरनेम मिसमैच होने पर सिस्टम ने इसे संदेह श्रेणी में डाल दिया। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नाम, जन्मतिथि पर विसंगति के कारण 70 हजार मतदाताओं को नोटिस जारी हुए हैं। जबकि 19 हजार मतदाताओं को नौ मैपिंग के कारण नोटिस जारी किए गए हैं।

नोटिस की अनदेखी पर छिन जाएगा वोट देने का अधिकार

पिथौरागढ़। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को निर्वाचन विभाग का एसआईआर नोटिस मिला है, तो इसे कतई हलके में न लें। निर्धारित समय सीमा के भीतर बीएलओ या तहसील कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष और दस्तावेज पेश नहीं किए, तो आपका नाम वोटर लिस्ट से स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा। नाम कटने का सीधा मतलब है कि आप आने वाले किसी भी चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे और आपका वोटर आईडी कार्ड निष्क्रिय हो जाएगा।

कागजों पर एक पिता के छह दावेदार

पिथौरागढ़। डेटा स्क्रूटनी के दौरान जिले में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला भी सामने आया है, जहां एक ही व्यक्ति को छह अलग-अलग मतदाताओं ने अपना पिता दर्ज करा रखा है। अब निर्वाचन विभाग ने सत्यापन के लिए संबंधित व्यक्ति के साथ-साथ उन सभी छह मतदाताओं को भी स्पष्टीकरण के लि

इसके अलावा उत्तरदाताओं से माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी ली जा सकती है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। वहीं लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना 1 से 30 सितंबर के बीच होगी।

17 अगस्त से शुरू होगी स्वगणना, बिना एन्यूमरेटर भी भर सकेंगे जानकारी

जनगणना के दूसरे चरण से पहले 17 से 30 अगस्त तक नागरिकों को Self-Enumeration (स्वगणना) की सुविधा मिलेगी। इस दौरान लोग SE पोर्टल पर ऑनलाइन अपनी और परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। यानी घर-घर आने वाले गणनाकर्मी का इंतजार किए बिना भी जनगणना पूरी की जा सकेगी।

बर्फीले क्षेत्रों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जनसंख्या गणना 1 से 30 सितंबर तक चलेगी। इससे पहले आम नागरिकों को डिजिटल सुविधा देने की तैयारी की गई है।

ए नोटिस जारी किया है।

  • सत्यापन का झंझट खत्म: जाति की जानकारी उत्तरदाता द्वारा बताई गई घोषणा के आधार पर ही दर्ज होगी। इसके लिए किसी जाति प्रमाण पत्र या कागजी दस्तावेज़ को दिखाना अनिवार्य नहीं होगा।
  • ड्रॉप-डाउन मेन्यू व्यवस्था: SC और ST श्रेणी के लिए राज्यवार ड्रॉप-डाउन लिस्ट होगी, जबकि गैर-SC/ST श्रेणी के लोग अपनी जाति खुद दर्ज करा सकेंगे।

जाति की जानकारी कैसे होगी दर्ज? जानिए नए नियम

सूत्रों के अनुसार, जाति की जानकारी उत्तरदाता द्वारा बताए गए विवरण के आधार पर दर्ज होगी। अधिकारियों का कहना है कि 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना में 45 हजार से अधिक जातियों के नाम सामने आए थे। इस बार AI और डिजिटल टूल्स की मदद से इन आंकड़ों को व्यवस्थित किया जाएगा।

  • वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) में स्व-घोषणा के कारण 45,000 से अधिक जातियों के नाम सामने आ गए थे, जिससे आंकड़ों को वर्गीकृत करना जटिल हो गया था।
  • डिजिटल टूल्स और AI की मदद: इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डेटा टूल्स के ज़रिए जातियों के अलग-अलग स्पेलिंग और आंकड़ों को सटीक श्रेणियों में छांटा जाएगा।
  • एनपीआर (NPR) को इस जनगणना से अलग रखा गया है, लेकिन नए नियमों के साथ शुरू हो रहा यह दूसरा चरण देश का सबसे बड़ा डिजिटल डेटा अभियान बनने जा रहा है।

माता-पिता की जन्म जानकारी क्यों होगी अहम?

पहली बार जनगणना में माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान की जानकारी भी जुटाई जाएगी। माना जा रहा है कि इससे नागरिकता संबंधी आंकड़ों का बेहतर विश्लेषण करने में मदद मिलेगी। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) की प्रक्रिया इस बार जनगणना से अलग रहेगी। नई व्यवस्था के साथ Census 2027 केवल आबादी की गिनती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक योजना निर्माण के लिए अधिक व्यापक डेटा जुटाने का माध्यम भी बनेगी।


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