आर्टिकल 370 और 35A हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर ने एक बड़े ऐतिहासिक और प्रशासनिक बदलाव का सामना किया है। 2019 से लेकर 2026 तक के 7 वर्षों में राज्य का ध्यान अलगाववाद से हटकर विकास, समावेश और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित हुआ है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
जम्मू और कश्मीर आर्थिक संघ की 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की नॉमिनल जीएसडीपी के 2.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,68,243 रुपये हो गई है, जो एक सकारात्मक वृद्धि है। इसके अलावा, नई औद्योगिक नीतियों के लागू होने के बाद से राज्य को 1.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। हालांकि, इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने और निजी क्षेत्र में नौकरियां पैदा करने के लिए संस्थागत क्षमता बढ़ाने पर काम चल रहा है।
आर्टिकल 370 हटने के बाद सबसे बड़ा सुधार पर्यटन के क्षेत्र में हुए है। 2019 के बाद सुरक्षा की स्थिति सुधरने से पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया। कुछ वर्षों में केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या 2 करोड़ को भी पार कर गई। केवल गुलमर्ग गोंडोला राइड ने 2024 में 7.68 लाख पर्यटकों को आकर्षित किया और 103 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया। इसके अलावा, खेलो इंडिया विंटर गेम्स और श्रीनगर में जी-20 की बैठकों ने इसे वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है।
रेल से जुड़ा भारत का मुकुट
जम्मू-कश्मीर को भारत का मुकुट कहा जाता है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) और दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज ‘चिनाब ब्रिज’ कश्मीर को शेष भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए मील का पत्थर साबित हुए हैं। बर्फ से ढकी घाटियों में भी अब हर मौसम में खुली रहने वाली सड़कें बनाई जा रही हैं।
2019 से पहले, राज्य से बाहर के निवासी से शादी करने वाली कश्मीरी महिलाओं को संपत्ति के अधिकार से वंचित कर दिया जाता था। अब यह लैंगिक भेदभाव पूरी तरह खत्म हो गया है और उन्हें समान कानूनी अधिकार मिल गए हैं। घाटी में अब पत्थरबाजी की घटनाएं और अलगाववादियों द्वारा बुलाई जाने वाली दैनिक हड़तालें पूरी तरह से इतिहास बन चुकी हैं, जिससे आम जनजीवन और स्कूल-कॉलेज सुचारू रूप से चल रहे हैं।
श्रीनगर में सियासी पारा चरम पर
हालांकि इन सबके बावजूद केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक गितिविधियां जोरों पर हैं। आर्टिकल 370 हटाए जाने के 7 साल पूरे होने के मौके पर श्रीनगर में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की चीफ और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार देर रात श्रीनगर में अपने समर्थकों के साथ जोरदार प्रदर्शन किया। महबूबा ने कैंडल मार्च निकाला और पार्टी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गईं। हालांकि, इस प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) कथित तौर पर उल्टा पकड़ने को लेकर वह एक नए विवाद में भी घिर गई हैं।
देर रात क्यों धरने पर बैठीं महबूबा?
महबूबा मुफ्ती ने अपने विधायकों और नेताओं (जिनमें वहीद पारा और आगा मुंतजिर मेहदी शामिल हैं) के साथ मंगलवार रात धरना दिया। उनका कहना था कि 4 अगस्त 2019 की रात से जो ‘अंधेरी रात’ शुरू हुई थी, वह आज भी जारी है। महबूबा ने कहा, “हम नई दिल्ली को यह संदेश देना चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर के लोग शांतिप्रिय हैं, लेकिन आर्टिकल 370 और 35A आज भी उनके दिलों में धड़कते हैं।” उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 सिर्फ एक कानूनी प्रावधान नहीं था, बल्कि यह कश्मीरियों की पहचान, सम्मान, गर्व और उनकी जमीन व नौकरियों की सुरक्षा का प्रतीक था।
केंद्र सरकार पर बोला तीखा हमला
प्रदर्शन के दौरान पीडीपी प्रमुख ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा। महबूबा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने संसद में पूर्ण बहुमत का इस्तेमाल कर साजिश के तहत जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ‘लूटा’ है। उन्होंने कहा, “जिस तरह बीजेपी ने राम मंदिर को लूटा, उसी तरह जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा भी लूटा गया। जैसे उन्हें वहां सजा मिली, इसके लिए भी उन्हें सजा मिलेगी।” मुफ्ती ने कहा कि अगर सरकार कहती है कि हालात सुधर गए हैं, तो वह नागरिक इलाकों से सेना को वापस कैंपों में भेजे और मुजफ्फराबाद-रावलकोट व्यापार मार्ग को फिर से शुरू करे।
तिरंगा उल्टा पकड़ने पर हुआ विवाद
इस धरने के दौरान एक बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी भी सामने आई। प्रदर्शन में महबूबा मुफ्ती के एक हाथ में जम्मू-कश्मीर का पुराना झंडा था और दूसरे हाथ में भारत का राष्ट्रीय ध्वज। अधिकारियों के अनुसार, महबूबा मुफ्ती ने तिरंगा कथित तौर पर उल्टा पकड़ा हुआ था। राष्ट्रीय ध्वज को उल्टा पकड़ना ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ का उल्लंघन है। बताया जा रहा है कि प्रशासन इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है।
आगे क्या है पीडीपी की रणनीति?
पीडीपी ने ऐलान किया है कि 5 अगस्त को पूरे जम्मू-कश्मीर के सभी जिला मुख्यालयों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए जाएंगे। महबूबा मुफ्ती का साफ कहना है कि जब तक कश्मीर मुद्दे का समाधान नहीं होता और आर्टिकल 370 व 35A को बहाल नहीं किया जाता, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा। इसके अलावा, उन्होंने देश की अलग-अलग जेलों में बंद कश्मीरियों की तुरंत रिहाई की भी मांग की है।
