पर अब इनमें से कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है तो मैप्ड मतदाता आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड भी सत्यापन प्रक्रिया में सहायक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे लाखों ऐसे मतदाताओं को राहत मिलेगी, जो पुराने अभिलेख जुटाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
प्रदेशभर में बूथ स्तर पर लगाए गए एसआइआर शिविरों और निर्वाचन कार्यालयों में इन दिनों बड़ी संख्या में लोग दस्तावेजों के साथ पहुंच रहे हैं। कई लोगों को यह भ्रम है कि निर्धारित दस्तावेज नहीं होने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि एसआइआर का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का नाम काटना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डा. बीवीआरसी पुरुषोत्तम का कहना है कि यदि इनमें से कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है तो आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड के आधार पर भी पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। ऐसे में नोटिस पाने वाले मतदाताओं को घबराने के बजाय निर्धारित समय के भीतर अपने बीएलओ या संबंधित निर्वाचन कार्यालय में पहुंचकर आवश्यक दस्तावेज जमा करने चाहिए।
मैप्ड और अनमैप्ड को लेकर भी फैला भ्रम
एसआइआर के दौरान पहली बार बड़ी संख्या में लोगों के सामने ‘मैप्ड’ और ‘अनमैप्ड’ शब्द आए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार मैप्ड मतदाता वह है, जिसका रिकार्ड सत्यापित होकर संबंधित पते, परिवार या मतदान केंद्र से जोड़ दिया गया है।
वहीं, अनमैप्ड मतदाता वह है, जिसका रिकार्ड अभी पूरी तरह सत्यापित नहीं हो पाया है या जिसे तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से मैप नहीं किया जा सका है। निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अनमैप्ड होने का अर्थ यह नहीं है कि मतदाता का नाम स्वतः सूची से हट जाएगा। ऐसे मतदाताओं को केवल आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपना सत्यापन पूरा कराना होगा।
क्या करें मतदाता
- नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज न करें।
- उपलब्ध दस्तावेजों के साथ अपने बीएलओ या एसआइआर केंद्र पर पहुंचें।
- यदि 11 दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं तो आधार, राशन कार्ड या आयुष्मान कार्ड भी साथ ले जाएं।
- मैप्ड या अनमैप्ड स्थिति को लेकर भ्रमित न हों, सत्यापन कराना ही सबसे महत्वपूर्ण है।
