मोदी मैदान का किसान मेला बना महिला हुनर और रोजगार का बड़ा मंचदीपा मटेला और रेनू शर्मा की मौजूदगी ने खींचा लोगों का ध्यान, स्थानीय उत्पादों की खरीदारी को लेकर उमड़ी भीड़

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दीपा मटेला


रुद्रपुर। शहर के मोदी मैदान में आयोजित पांच दिवसीय ‘उत्तराखंड उदय एक्सपोर्ट 2026 एवं किसान मेला’ इन दिनों उत्तराखंड के स्थानीय उत्पाद, कृषि, हस्तशिल्प और महिला उद्यमिता का बड़ा केंद्र बना हुआ है। 17 से 21 सितंबर तक चल रहे इस मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर पहाड़ और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए उत्पादों की जानकारी ले रहे हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


मेले की सबसे खास तस्वीर महिलाओं की भागीदारी और उनके हुनर की है। आयोजकों के अनुसार यहां कुल 80 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें 60 स्टॉल स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। महिलाओं द्वारा तैयार स्थानीय और कृषि आधारित उत्पादों को सीधे बाजार उपलब्ध कराने का यह प्रयास स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और आय के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मेले में रुद्रपुर की दीपा मटेला भी अपने हुनर और उत्तराखंडी ऐपण कला के साथ लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। दीपा मटेला लंबे समय से ऐपण और स्थानीय कला को आगे बढ़ाने के लिए काम करती रही हैं। उनकी ऐपण कला को लेकर पूर्व में भी उन्हें सम्मान मिल चुका है और उनके बनाए उत्पाद सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचे हैं।
वहीं रेनू शर्मा भी महिला समूहों और स्थानीय उत्पादों से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। उन्हें पूर्व में नारी शक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। ऐसे आयोजनों में महिलाओं की भागीदारी यह दिखाती है कि स्थानीय हुनर को बाजार से जोड़कर स्वरोजगार के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।
मेले में उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों से आए किसानों, स्वयं सहायता समूहों, उद्यमियों और उत्पादकों ने अपने उत्पाद लगाए हैं। यहां कृषि उत्पादों के साथ हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य सामग्री और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री हो रही है। आयोजकों का उद्देश्य उत्पादकों को उपभोक्ताओं से सीधे जोड़ना और उन्हें नए बाजार उपलब्ध कराना है।
मोदी मैदान में उमड़ रही भीड़ के बीच महिला स्टॉल विशेष आकर्षण बने हुए हैं। दीपा मटेला और रेनू शर्मा जैसी महिलाओं की सक्रियता मेले को केवल खरीद-बिक्री का आयोजन नहीं, बल्कि महिला हुनर, स्थानीय उत्पाद और रोजगार के अवसरों को एक मंच देने वाला आयोजन बना रही है।
मेले का संदेश साफ है—उत्तराखंड के गांवों और घरों में तैयार हो रहा हुनर यदि बाजार तक पहुंचे, तो स्थानीय उत्पादों के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को भी नई दिशा मिल सकती है।


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