उत्तराखंड में आपदा से पुनर्वास तक ‘धामी मॉडल’, सुरक्षित हिमालयी ढांचे पर जोर; बागेश्वर में स्कूल बंद, चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट, कांवड़ यात्रा में हादसे और CM धामी की चुनावी सीट पर सियासी चर्चा

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रुद्रपुर,देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के बीच प्राकृतिक आपदाओं, भारी बारिश, भूस्खलन और नदी-नालों के उफान ने एक बार फिर पहाड़ी राज्य की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। सरकार की ओर से आपदा के दौरान राहत और बचाव के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास तथा बुनियादी ढांचे की बहाली पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी नीति को ‘धामी मॉडल’ के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें आपदा के बाद तत्काल राहत के साथ दीर्घकालिक पुनर्निर्माण और भविष्य की आपदाओं से बचाव को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है।
सुरक्षित हिमालयी ढांचे की दिशा में पहल
पुनर्निर्माण की रणनीति में पहाड़ी ढालों के स्थिरीकरण, भूस्खलन रोधी दीवारों, नदी तटबंधों के सुदृढ़ीकरण और आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों को शामिल किया जा रहा है। मौसम की निगरानी, सैटेलाइट मैपिंग और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से आपदा प्रबंधन को मजबूत करने पर भी जोर है।
धराली और थराली जैसी आपदाओं के बाद SDRF, NDRF, सेना और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से बचाव एवं राहत अभियान चलाए गए। प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं की बहाली को भी प्रमुखता दी गई।
मंडी में पार्किंग संकट से व्यापारी और ग्राहक परेशान
रुद्रपुर मंडी में पार्किंग की समस्या से व्यापारी, ग्राहक और बाहर से आने वाले मालवाहक वाहन परेशान हैं। उत्तर प्रदेश से सब्जी लेकर आने वाले ट्रकों के साथ टिहरी, देहरादून, पौड़ी और हरिद्वार से आने वाले व्यापारियों को भी जाम और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
फुटकर मंडी सब्जी विक्रेता संघ के अध्यक्ष राजू गुप्ता ने आरोप लगाया कि पहले मंडी परिसर में तीन-चार स्थानों पर पार्किंग की सुविधा थी, जिन्हें धीरे-धीरे दुकानों के लिए इस्तेमाल किया गया। उनका आरोप है कि पार्किंग की जमीन पर बनी दुकानों को लाखों रुपये में बेचा गया।
कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव राम कालाकोटी ने कहा कि पार्किंग के लिए दूसरी जगह उपलब्ध कराई गई है। गेस्ट हाउस की जगह दुकानें बनने से मंडी समिति को राजस्व प्राप्त होगा।
कांवड़ यात्रा में हादसे, पांच श्रद्धालुओं की मौत
हरिद्वार, रुड़की, मंगलौर, उत्तरकाशी और रायवाला में हुए अलग-अलग हादसों में पांच कांवड़ यात्रियों की मौत और तीन के गंगा में बहने की सूचना सामने आई है। मंगलौर में अज्ञात वाहन की टक्कर से एक कांवड़ यात्री की मौत हुई। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर दो बाइकों की टक्कर में शामली निवासी संदीप मलिक और विपिन की जान चली गई।
फरीदाबाद से कांवड़ यात्रा पर आया 21 वर्षीय आर्यन मिश्रा भी नदी के तेज बहाव में बह गया। हादसे के बाद सामने आए वीडियो में उसका बड़ा भाई घाट पर मदद के लिए गुहार लगाता दिखाई दिया। वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों को भावुक कर दिया।
बागेश्वर में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद
भारी बारिश को देखते हुए बागेश्वर जिले में 10 अगस्त को कक्षा एक से 12वीं तक के सरकारी, निजी और अशासकीय विद्यालयों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है।
मौसम विभाग ने देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश, गर्जन के साथ बिजली और भूस्खलन की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है।
2027 में धामी किस सीट से उतरेंगे, चर्चाएं तेज
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की संभावित चुनावी सीट को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा की ओर से चुनाव धामी के नेतृत्व में लड़ने के संकेत दिए जा चुके हैं, जबकि उनकी सीट को लेकर अंतिम तस्वीर सामने आना बाकी है।
चंपावत, खटीमा के साथ ऊधम सिंह नगर की काशीपुर और रुद्रपुर सीटों के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में हैं। धामी 2012 और 2017 में खटीमा से विधायक रहे। 2022 में खटीमा से चुनाव हारने के बाद उन्होंने चंपावत उपचुनाव जीता और तब से चंपावत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में चंपावत को उनकी मजबूत संभावित सीट माना जा रहा है, जबकि खटीमा वापसी की चर्चा भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
देहरादून की बेटी वैशाली भंडारी ने रचा समुद्री इतिहास
भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी ने देश का गौरव बढ़ाया है। वह तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारियों के उस दल का हिस्सा रहीं, जिसने पहली बार संयुक्त रूप से विश्व समुद्री परिक्रमा पूरी की।
स्वदेशी नौका आईएएसवी त्रिवेणी से 11 सितंबर 2025 को मुंबई से शुरू हुआ अभियान 22 जुलाई 2026 को मुंबई लौटकर पूरा हुआ। दल ने 25,500 नॉटिकल मील यानी लगभग 47 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और दक्षिण अटलांटिक की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच दल ने ऑस्ट्रेलिया के फ्रेमैंटल, न्यूजीलैंड के लिटलटन, अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में पड़ाव किए।
अभियान के दौरान भूमध्य रेखा को दो बार पार किया गया। केप लीविन, केप हॉर्न, ड्रेक पैसेज, केप अगुलहास और केप ऑफ गुड होप जैसे कठिन समुद्री क्षेत्रों को पार करते हुए दल ने तेज हवाओं और ऊंची लहरों का सामना किया।
वैली ऑफ फ्लावर्स में खिले प्रकृति के रंग
मानसून के मौसम में उत्तराखंड की वैली ऑफ फ्लावर्स पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। गढ़वाल हिमालय में स्थित यह घाटी रंग-बिरंगे फूलों, हरे-भरे पहाड़ों, झरनों और बादलों से घिरी वादियों के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। यहां फूलों की सैकड़ों प्रजातियां देखने को मिलती हैं और यह क्षेत्र UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
इस प्रकार उत्तराखंड में एक ओर मानसून और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती बनी हुई है, तो दूसरी ओर सरकार पुनर्वास, सुरक्षित बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने का दावा कर रही है। इसी बीच कांवड़ यात्रा की घटनाएं, मंडी की अव्यवस्था, मौसम अलर्ट, 2027 की सियासी हलचल, वैशाली भंडारी की ऐतिहासिक समुद्री उपलब्धि और वैली ऑफ फ्लावर्स का प्राकृतिक आकर्षण राज्य की मौजूदा तस्वीर के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं।


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