विधायक के फार्म हाउस में सामूहिक दुष्कर्म का आरोप: चार पुलिसकर्मी गिरफ्तार, अब बुलडोजर कार्रवाई पर उठे सवाल

Spread the love


उत्तराखंड/अमरोहा/हसनपुर। उत्तराखंड के खानपुर विधायक उमेश शर्मा से जुड़े बताए जा रहे हसनपुर क्षेत्र के झुलपुरी स्थित फार्म हाउस में हरियाणा की युवती से सामूहिक दुष्कर्म के आरोप ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में यूपी पुलिस के दरोगा और सिपाही समेत सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर व हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपी दरोगा और सिपाही को निलंबित कर दिया है तथा दोनों के खिलाफ नियमानुसार बर्खास्तगी की कार्रवाई की बात कही है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


पुलिस के अनुसार, पीड़िता हरियाणा के फतेहाबाद जिले की रहने वाली है। उसकी शिकायत के आधार पर हसनपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों में सीआरपीएफ में तैनात हेड कांस्टेबल मोहित, इंस्पेक्टर लालाराम यादव, हसनपुर कोतवाली में तैनात दरोगा संजय तोमर और सिपाही प्रमोद कुमार शामिल हैं। चारों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।
पीड़िता के कथित बयान के अनुसार, वह सोनीपत में मोहित से मिली थी। इसके बाद वह उसके साथ कार में मेरठ और फिर हसनपुर पहुंची। हसनपुर कोतवाली के पास दरोगा संजय तोमर भी कार में सवार हुआ। बाद में सभी झुलपुरी स्थित फार्म हाउस पहुंचे। पुलिस के मुताबिक वहां दो कमरे लिए गए और बाद में सिपाही प्रमोद कुमार खाना लेकर पहुंचा। युवती ने आरोप लगाया कि रात में मोहित, लालाराम और संजय तोमर उसके कमरे में जबरन घुसे और उसके साथ दुष्कर्म किया। सिपाही प्रमोद के कमरे में आने पर युवती ने उसे धक्का देकर बाहर किया और अंदर से कमरा बंद कर पुलिस को फोन किया। इसके बाद पुलिस ने फार्म हाउस पर कार्रवाई कर चारों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस पर कार्रवाई, सीआरपीएफ को भी रिपोर्ट
मुरादाबाद रेंज के डीआईजी मुनिराज जी के अनुसार, पीड़िता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। यूपी पुलिस के आरोपी दरोगा और सिपाही के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की बात कही गई है, जबकि सीआरपीएफ के दोनों आरोपियों के संबंध में संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजी गई है।
अब बुलडोजर कार्रवाई पर उठे सवाल
इस घटना के बाद राजनीतिक सवाल भी खड़ा हो गया है—क्या सरकार इस फार्म हाउस पर भी बुलडोजर कार्रवाई करेगी, या बुलडोजर का इस्तेमाल केवल कमजोर और असहाय लोगों के खिलाफ ही होता है?
हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में फार्म हाउस के खिलाफ किसी अवैध निर्माण या अन्य कानूनी उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए बुलडोजर कार्रवाई का सवाल फिलहाल राजनीतिक मांग और सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए, किसी स्थापित कानूनी कार्रवाई के रूप में नहीं।
खुद विधायक उमेश शर्मा ने मीडिया से कहा कि घटना के दौरान फार्म हाउस में पहुंचे लोगों ने खुद को गृह मंत्रालय से आया अधिकारी बताया था और बाद में स्थानीय पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उपलब्ध रिपोर्टों में विधायक पर इस घटना में शामिल होने का कोई आरोप या गिरफ्तारी नहीं बताई गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन क्या कानून की कसौटी सभी के लिए समान होगी? अब निगाह पुलिस जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।


Spread the love