यह साझेदारी भारत के सबसे उन्नत स्टील्थ फाइटर जेट विकसित करने की योजना का हिस्सा है.
एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप के 2028 में तैयार होने की उम्मीद है. यह विमान भविष्य में भारत की हवाई युद्ध क्षमता में अहम भूमिका निभाएगा.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, पिछले साल भारत ने अपना सबसे उन्नत स्टील्थ फ़ाइटर जेट बनाने के लिए एक ढांचे को मंज़ूरी दी थी और डिफ़ेंस कंपनियों से इसमें रुचि जताने को कहा था.
यह क़दम पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के कुछ हफ़्ते बाद उठाया गया था.
अमेरिका से निर्भरता कम करने की रणनीति
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने पिछले साल 25 मई को अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत कम से कम तीन अन्य देशों के निर्माताओं के साथ लड़ाकू विमानों के इंजन संयुक्त रूप से बनाने को लेकर बातचीत कर रहा है.
ब्लूमबर्ग ने लिखा था, ”क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अपनी क्षमताओं की कमियों को दूर करने के लिए भारत अमेरिका से आगे भी अपने रक्षा साझेदारियों का विस्तार कर रहा है. ब्रिटेन, फ्रांस और जापान के इंजनों पर विचार किया जा रहा है और भारत इस परियोजना को जल्द शुरू करना चाहता है. इन प्रस्तावों का मूल्यांकन डीआरडीओ करेगा.”
”अमेरिका के साथ जेट इंजन का संयुक्त निर्माण दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को गहरा करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है. हालांकि, महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए अमेरिका से आगे दूसरे देशों की ओर भारत का रुख़ अमेरिका के साथ संबंधों में तनाव का संकेत नहीं माना जाना चाहिए. बल्कि यह भरोसेमंद सप्लाई चेन सुनिश्चित करने पर भारत के जोर को दर्शाता है.”
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक है. ऐसे में भारत ने हाल के वर्षों में अमेरिका और फ्रांस के रक्षा निर्माताओं से हथियार ख़रीदने पर भी ज़्यादा ज़ोर दिया है.
आयातित रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने घरेलू कंपनियों के लिए दो इंजन वाले स्टील्थ फ़ाइटर के विकास में शामिल होने का रास्ता भी खोला है. इसके तहत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के लिए मॉडल को मंज़ूरी दी गई.
कंपनियों ने एक साझे बयान में कहा, “यह साझेदारी भारत में एएमसीए इंजन के संयुक्त विकास के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करेगी. इसमें विश्वस्तरीय तकनीक और औद्योगिक स्तर पर परियोजनाओं को पूरा करने की क्षमताएं एक साथ आएंगी.”
रिलायंस के बयान में क्या कहा गया है?
शुक्रवार को घोषित प्रस्तावित साझेदारी में यह भी कहा गया है कि रिलायंस और रोल्स-रॉयस भारत में एक डेडिकेटेड एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स बनाने की संभावनाएं तलाशेंगी. दोनों कंपनियां मिलकर इंजन विकसित करेंगी.
