देहरादून से हल्द्वानी तक तीन बड़ी खबरें: उपराष्ट्रपति की संवेदनशीलता, भारी बारिश का अलर्ट और खरगे के शुद्धिकरण विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल

Spread the love


देहरादून। उत्तराखंड में बुधवार का दिन प्रशासनिक गतिविधियों, मौसम की चुनौती और राजनीतिक विवादों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। एक ओर देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने प्रोटोकाल से आगे बढ़कर मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया। इसी बीच हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। तीनों घटनाओं ने अलग-अलग कारणों से प्रदेश में व्यापक चर्चा पैदा की है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


उपराष्ट्रपति ने प्रोटोकाल से ऊपर रखा मानवीय सम्मान
देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों को संबोधित करने के बाद उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के सामने ग्रुप फोटो का कार्यक्रम था। शाम करीब पांच बजे होने वाली इस तस्वीर के दौरान अचानक बारिश शुरू हो गई। उपराष्ट्रपति का कार्यक्रम पहले से व्यस्त था, इसलिए फोटो कार्यक्रम स्थगित करने पर विचार किया गया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ग्रुप फोटो महज एक तस्वीर नहीं, बल्कि प्रशिक्षण के दौर की जीवनभर याद रहने वाली स्मृति होती है। इसके बाद खुले मैदान के स्थान पर अकादमी के ऑडिटोरियम में फोटो सेशन आयोजित किया गया।
करीब 200 प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों, अन्य प्रशिक्षणार्थियों और फैकल्टी सदस्यों के साथ अलग-अलग बैच में तस्वीरें ली गईं। उपराष्ट्रपति ने लगभग आधे घंटे तक धैर्यपूर्वक सभी के साथ फोटो खिंचवाई।
इसी दौरान उनकी नजर मंच के नीचे व्हीलचेयर पर बैठे आईजीएनएफए के अपर प्रोफेसर प्रशांत ढांडा पर पड़ी। जानकारी मिली कि कुछ वर्ष पहले दुर्घटना के बाद से वह खड़े होने में असमर्थ हैं और इसी कारण मंच पर नहीं आ सके।
उपराष्ट्रपति ने तत्काल मंच से नीचे उतरकर प्रशांत ढांडा के पास जाने का निर्णय लिया और उनके साथ अलग से फोटो खिंचवाई। यह क्षण पूरे कार्यक्रम का सबसे भावुक दृश्य बन गया। करीब 200 लोगों के साथ खिंचवाई गई तस्वीरों के बीच यह तस्वीर इसलिए खास बन गई, क्योंकि इसमें पद, प्रोटोकाल और औपचारिकता से अधिक मानवीय संवेदना और सम्मान दिखाई दिया।
भारी बारिश से पहाड़ से मैदान तक अलर्ट
दूसरी ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तर भारत में अपना असर तेज कर दिया है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश दर्ज की गई। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के साथ भूस्खलन की घटनाओं ने आवागमन की चुनौती बढ़ा दी।
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में भारी बारिश के बीच बादल फटने की घटना सामने आई, जबकि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में बेली ब्रिज टूटने से सीमावर्ती क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हुआ। पहाड़ी मार्गों पर मलबा आने और सड़कें बाधित होने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ सहित मैदानी क्षेत्रों में भी बारिश हुई। मौसम विभाग ने कई इलाकों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में लगातार बारिश के चलते प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क अवरोध का खतरा बना हुआ है।
हल्द्वानी में खरगे के मंच के कथित शुद्धिकरण पर सियासी संग्राम
तीसरी बड़ी खबर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी सभा के बाद सामने आए कथित शुद्धिकरण विवाद से जुड़ी है। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में इस मामले को लेकर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार, खरगे ने पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा इस मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं देने पर दुख व्यक्त किया।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने घटना को अस्वीकार्य बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। कांग्रेस का आरोप है कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे की सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण कराया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि इस आयोजन के पीछे श्री राम सेना नामक संगठन था और उसे भाजपा से जोड़ने की कोशिश की। भाजपा ने इन आरोपों का खंडन करते हुए संगठन से किसी भी संबंध से इनकार किया है।
खरगे ने भी राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए घटना पर दुख जताया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि वह एक दलित नेता हैं और संवैधानिक पद पर रहते हुए विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि यदि इसमें भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका का आरोप है तो इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा इस प्रकार की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।
इस पूरे विवाद ने जातीय सम्मान, राजनीतिक मर्यादा और धार्मिक-सामाजिक संवेदनशीलता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस इसे सामाजिक भेदभाव से जोड़कर देख रही है, जबकि भाजपा इसे कांग्रेस द्वारा राजनीतिक रंग दिए जाने का मामला बता रही है।
तीन घटनाएं, तीन अलग संदेश
देहरादून में उपराष्ट्रपति का व्हीलचेयर पर बैठे अधिकारी के पास जाकर तस्वीर खिंचवाना जहां संवेदनशील नेतृत्व और मानवीय सम्मान का संदेश देता है, वहीं प्रदेश में भारी बारिश प्राकृतिक चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत बताती है। हल्द्वानी का शुद्धिकरण विवाद राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी और सामाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा बन गया है।
एक ही दिन सामने आई इन तीन घटनाओं ने उत्तराखंड की तस्वीर के तीन अलग-अलग पहलू सामने रखे हैं—मानवीय संवेदना, प्राकृतिक चुनौती और राजनीतिक टकराव। अब निगाहें इस बात पर हैं कि मौसम की चुनौती के बीच प्रशासन राहत और सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह मजबूत करता है तथा हल्द्वानी के शुद्धिकरण विवाद की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है।


Spread the love