उत्तराखंड में सरकारी डॉक्टरों को शाम की प्रैक्टिस की सशर्त छूट, मरीजों को मिलेगा सस्ता इलाज; धारचूला में बेली ब्रिज टूटा, चीन सीमा से संपर्क कटा

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रुद्रपुर,देहरादून/धारचूला। उत्तराखंड सरकार सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकारी डॉक्टरों को शाम के समय अस्पताल परिसर में ही निजी प्रैक्टिस की सशर्त अनुमति देने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत डॉक्टर दोपहर बाद सरकारी अस्पतालों में मरीज देख सकेंगे। इसके लिए मरीजों से न्यूनतम शुल्क लिया जाएगा और डॉक्टरों को अस्पताल परिसर के बाहर निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं होगी।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस व्यवस्था पर चर्चा की गई है। प्रस्ताव जल्द कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे मरीजों को शाम के समय भी कम खर्च में उपचार की सुविधा मिलेगी और सरकारी अस्पतालों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
प्रस्तावित व्यवस्था में तीन प्रमुख शर्तें रखी गई हैं। डॉक्टर मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। यदि किसी मरीज को ऑपरेशन या अन्य प्रक्रिया की जरूरत होगी तो उसका उपचार सरकारी अस्पताल में ही किया जाएगा। साथ ही मरीजों से ली जाने वाली फीस न्यूनतम रखी जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे पर्वतीय क्षेत्रों के उन सरकारी अस्पतालों को विशेष लाभ मिलेगा, जहां दोपहर बाद ओपीडी सेवाएं सीमित हो जाती हैं।
दूसरी ओर, पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा ने सामरिक और स्थानीय आवागमन की चुनौती बढ़ा दी है। धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुलागाड़ के पास पहाड़ी से गिरे मलबे और भारी बोल्डरों की चपेट में आने से बेली ब्रिज ध्वस्त हो गया। पुल टूटने से दारमा, व्यास और चौदास घाटियों का संपर्क प्रभावित हो गया है। साथ ही चीन सीमा की ओर जाने वाला संपर्क मार्ग भी बाधित हुआ है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार मंगलवार रात कुलागाड़ के समीप पहाड़ी में भूस्खलन हुआ। मलबे के साथ बड़े बोल्डर गिरने से बेली ब्रिज क्षतिग्रस्त होकर टूट गया। बुधवार सुबह करीब छह बजे गश्त पर निकले सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कर्मचारियों को घटना की जानकारी मिली। इसके बाद प्रशासन और बीआरओ ने यातायात बहाल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम शुरू कर दिया।
धारचूला के एसडीएम के अनुसार छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए अस्थायी मार्ग तैयार किया जा रहा है। बेली ब्रिज के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी जल्द शुरू किए जाने की तैयारी है।
कुलागाड़ क्षेत्र में पुल के क्षतिग्रस्त होने की यह पहली घटना नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2013 और 2024 में भी कुलागाड़ के उफान के कारण बेली ब्रिज को नुकसान पहुंच चुका है। लगातार भूस्खलन और तेज बहाव के चलते यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील माना जाता है।
पुल टूटने के बाद सबसे गंभीर स्थिति उन ग्रामीणों की है, जिन्हें आवागमन के लिए जोखिम उठाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई राहगीर, महिलाएं और बच्चे टूटे पुल के लोहे के गार्डर, सीढ़ियों और पत्थरों के सहारे तेज बहाव वाले नाले को पार करने का प्रयास कर रहे हैं। पानी का बहाव तेज होने के कारण जरा-सी चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तैयार कर क्षेत्र का संपर्क बहाल करना है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मार्ग पर जल्द यातायात बहाल करना स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ सीमा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी बेहद जरूरी है।


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