हिमालय की ‘हैप्पी-फेस’ मकड़ी से लेकर जहरीली मौतों तक: उत्तराखंड में सड़क ठेकेदारों पर 50 लाख तक जुर्माना, नशा मुक्ति केंद्र होंगे डिजिटल, दून में फोटो फेयर और सातूं-आठूं का भव्य समापन

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देहरादून/पौड़ी/बागेश्वर। उत्तराखंड की प्राकृतिक विविधता, सामाजिक घटनाओं, सड़क सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और लोक संस्कृति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण खबरें एक साथ सामने आई हैं। चमोली के मंडल क्षेत्र में वैज्ञानिकों को हिमालय की ऊंचाई पर ऐसी अनोखी मकड़ी मिली है, जिसकी पीठ पर बने निशान दूर से मुस्कुराते इंसानी चेहरे जैसे दिखाई देते हैं। इसी बीच पौड़ी में पैसों को लेकर पिता-पुत्र के विवाद ने दो जिंदगियां लील लीं। देहरादून में पारिवारिक तनाव के बीच एक युवक ने आत्महत्या कर ली, जबकि बागेश्वर में ततैयों और बंदरों के हमले में बच्चों के घायल होने की घटनाएं सामने आई हैं। राज्य सरकार सड़क दुर्घटनाओं में तकनीकी खामियों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है और ऐसे मामलों में ठेकेदारों पर 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान तैयार करने की तैयारी है। उधर नशा मुक्ति केंद्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। देहरादून में सितंबर में उत्तराखंड फोटो फेयर आयोजित होगा और कुमाऊं के पारंपरिक लोकपर्व सातूं-आठूं का धार्मिक-सांस्कृतिक उल्लास के बीच समापन हुआ।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


हिमालय में मिली ‘हैप्पी-फेस’ मकड़ी
मकड़ी का नाम सुनते ही आमतौर पर जाला, आठ पैर और डरावनी शक्ल का ख्याल आता है, मगर हिमालयी जंगलों में मिली एक अनोखी मकड़ी इस सामान्य धारणा से बिल्कुल अलग नजर आती है। करीब 2,000 मीटर की ऊंचाई पर चमोली के मंडल क्षेत्र में मिली इस मकड़ी की पीठ पर ऐसा पैटर्न दिखाई देता है, जो दूर से मुस्कुराते हुए इंसानी चेहरे जैसा प्रतीत होता है।
वन अनुसंधान संस्थान देहरादून के शोधकर्ता आशीर्वाद त्रिपाठी और क्षेत्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, भुवनेश्वर की वैज्ञानिक देवी प्रियदर्शिनी ने इस मकड़ी की पहचान की है। शोधकर्ताओं ने इसे ‘हिमालयन हैप्पी-फेस स्पाइडर’ नाम दिया है।
इस मकड़ी की खासियत केवल चेहरे जैसी आकृति तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों को एक ही प्रजाति में 32 अलग-अलग रंग और पैटर्न मिले हैं। लाल, हरे, काले, पीले समेत कई रंगों में इसकी पीठ पर बने निशान दिखाई देते हैं। वैज्ञानिक इन अलग-अलग रूपों को ‘मॉर्फ’ कहते हैं। यानी एक ही प्रजाति के सदस्य होने के बावजूद इनके शरीर पर बने पैटर्न में काफी विविधता है।
यह मकड़ी अक्सर अदरक प्रजाति के पौधों में पाई जाती है और आम मकड़ियों की तरह जाला बनाती है। वैज्ञानिकों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही प्रजाति में इतने अलग-अलग रंग और चेहरेनुमा पैटर्न विकसित होने के पीछे क्या कारण है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इसका संबंध पर्यावरणीय परिस्थितियों अथवा विकास की प्रक्रिया से हो सकता है। इसी तरह की मकड़ी की एक प्रजाति करीब 125 वर्ष पहले हवाई द्वीप में दर्ज की गई थी।
पिता को कीटनाशक पिलाने के बाद बेटे ने भी गटका जहर, दोनों की मौत
पौड़ी जिले के थलीसैंण ब्लॉक के मरोड़ा गांव में पारिवारिक विवाद ने दर्दनाक रूप ले लिया। यहां 53 वर्षीय बिगारी सिंह और उनके 85 वर्षीय पिता बख्तावर सिंह की कीटनाशक पीने से मौत हो गई। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में दोनों के बीच पैसों को लेकर अक्सर विवाद होने की बात सामने आई है।
थाना थलीसैंण के प्रभारी निरीक्षक रवींद्र नेगी के अनुसार आशंका है कि बिगारी सिंह ने अपने पिता को कीटनाशक पिलाया। इसके बाद पकड़े जाने के डर से वह घबरा गया और खुद भी कीटनाशक पी लिया। हालत बिगड़ने पर ग्रामीण उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, मगर अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। बख्तावर सिंह ने घर पर ही दम तोड़ दिया।
पुलिस ने मौके से कीटनाशक की शीशी और अन्य सामग्री कब्जे में ली है। बख्तावर सिंह सेना से सेवानिवृत्त थे। परिजनों के मुताबिक उनकी पत्नी का करीब एक वर्ष पहले निधन हुआ था। बिगारी खेती-बाड़ी और मजदूरी करते थे। पुलिस ने परिवार के सदस्यों से पूछताछ शुरू कर दी है।
पत्नी के जाने के बाद युवक ने उठाया आत्मघाती कदम
देहरादून के पटेलनगर क्षेत्र की संस्कृति लोक कॉलोनी स्थित जोड़ी बस्ती में मोहम्मद नवाज ने आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार नवाज के दो बच्चे हैं। बताया जा रहा है कि पारिवारिक विवाद के चलते कुछ समय पहले उसकी पत्नी घर छोड़कर चली गई थी। पुलिस प्रथमदृष्टया पारिवारिक तनाव और अकेलेपन को घटना से जोड़कर जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि वास्तविक कारण विस्तृत जांच के बाद स्पष्ट होगा।
बागेश्वर में बच्चों पर ततैयों और बंदरों का हमला
बागेश्वर जिले में ततैयों के हमले में छह बच्चों के घायल होने की खबर है। इनमें से एक बच्चे को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में ततैयों और जंगली जीवों के बढ़ते हमले से लोगों में चिंता है।
वहीं गरुड़ क्षेत्र के ग्वाड़-पजेणा गांव निवासी 14 वर्षीय प्रियांशु जोशी को बंदरों के झुंड ने घायल कर दिया। प्रियांशु घांघली बाजार स्थित कोचिंग सेंटर से ट्यूशन पढ़कर बुधवार सुबह करीब 11 बजे पैदल घर लौट रहा था। इसी दौरान सात-आठ बंदरों के झुंड ने उसे घेर लिया। छात्र द्वारा उन्हें भगाने का प्रयास करने पर बंदर आक्रामक हो गए और उसके दाएं पैर के पीछे के हिस्से में काट लिया।
परिजनों ने उसे सीएचसी बैजनाथ पहुंचाया। अस्पताल के अनुसार बच्चे को बंदरों के चार दांत लगे थे और उसे आवश्यक इंजेक्शन दिया गया। क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रमोद जोशी और ग्राम प्रधान मनोज कुमार ने घायल छात्र को मुआवजा देने तथा बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए संबंधित विभाग से कार्रवाई की मांग की है।
सड़क की तकनीकी खामी पर ठेकेदार की जवाबदेही तय होगी
उत्तराखंड में सड़क की तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटना में मौत या स्थायी अपंगता होने पर ठेकेदार की जवाबदेही तय करने की तैयारी है। प्रस्तावित नियमावली में अधिकतम 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किए जाने की बात सामने आई है।
राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के बीच सड़क की डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी खामियों को भी दुर्घटनाओं के कारणों में शामिल किया जा रहा है। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 210डी के तहत राज्य सरकार को स्थानीय और राज्य सड़कों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार प्राप्त है। जनविश्वास एक्ट के तहत सड़कों की तकनीकी खामी के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान बताया गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों के मामलों में आर्थिक दंड के साथ ब्लैकलिस्टिंग जैसे प्रावधान भी लागू हैं।
नशा मुक्ति केंद्र होंगे डिजिटल, मोबाइल पर मिलेगी मरीज की जानकारी
उत्तराखंड में सरकारी और निजी नशा मुक्ति केंद्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी है। इससे मरीज के परिजनों को उपचार की स्थिति जानने के लिए बार-बार केंद्र के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। प्रस्तावित व्यवस्था में मोबाइल के माध्यम से मरीज के उपचार की स्थिति और फॉलोअप संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है।
स्वास्थ्य विभाग की बैठक में इस व्यवस्था पर मंथन किया गया। प्रस्तावित प्लेटफॉर्म कर्नाटक के ई-मानस मॉडल की तर्ज पर विकसित करने की योजना है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बनाने पर विचार किया जा रहा है। प्लेटफॉर्म पर नशा मुक्ति केंद्रों का पंजीकरण, उपलब्ध बेड, विशेषज्ञ चिकित्सक और उपचार सुविधाओं की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने की योजना है। इससे मरीजों के उपचार की निगरानी और केंद्रों की जवाबदेही मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दून में 19-20 सितंबर को उत्तराखंड फोटो फेयर
फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के शौकीनों के साथ पेशेवरों के लिए देहरादून में 19 और 20 सितंबर को उत्तराखंड फोटो फेयर आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम कारगी चौक स्थित नीरजा ग्रीन में होगा।
देवभूमि फोटोग्राफर्स की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में कार्यक्रम संयोजक नितेश अग्रवाल ‘बंटी’ ने बताया कि यह तीसरा उत्तराखंड फोटो फेयर होगा। फेयर में कैमरा तकनीक, आधुनिक लेंस, कंप्यूटर, स्टोरेज, सॉफ्टवेयर, प्रिंटिंग और अन्य डिजिटल उपकरणों से जुड़ी कंपनियां अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगी।
फोटोग्राफर्स को नवीनतम तकनीक समझने के साथ कला, व्यवसाय और तकनीकी ज्ञान से जुड़ने का अवसर मिलेगा। मास कम्युनिकेशन, फोटोग्राफी और मीडिया से जुड़े छात्र-छात्राएं तथा विशेषज्ञ भी अपने अनुभव साझा करेंगे।
सातूं-आठूं के समापन पर दिखी कुमाऊं की लोकसंस्कृति
कुमाऊं के पारंपरिक लोकपर्व सातूं-आठूं के समापन अवसर पर नगर में भक्ति और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। पांच दिनों से चल रहे धार्मिक महोत्सव का समापन भगवान महेश और माता गौरा के विधिवत विवाह तथा प्रतिमा विसर्जन के साथ हुआ।
पूरे आयोजन के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाज, पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक गतिविधियों ने कुमाऊं की समृद्ध लोक परंपरा को जीवंत किया। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। भगवान महेश और माता गौरा के विवाह की रस्मों के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
एक ओर हिमालय की जैव विविधता वैज्ञानिकों को नई खोजों के लिए आकर्षित कर रही है, वहीं दूसरी ओर सड़क सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे मुद्दे सरकार और समाज के सामने गंभीर चुनौती बने हुए हैं। इन सबके बीच सातूं-आठूं जैसे लोकपर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बने हुए हैं।


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