रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)
दिनांक: 25 अगस्त 2026 (घटना दिनांक: 24 अगस्त 2026)
घटना की पृष्ठभूमि और बैठक
कलेक्ट्रेट सभागार में कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता और जिलाधिकारी निनित सिंह भदौरिया (जिला निर्वाचन अधिकारी) व एसएसपी अजय गणपति की मौजूदगी में मतदाता सूची शुद्धिकरण (SIR 2026) को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था ताकि पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करने पर चर्चा की जा सके.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
विवाद की शुरुआत और तीखी झड़प
बैठक के दौरान जब भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला कमिश्नर के समक्ष फर्जी और डबल वोटों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराने और आपत्तिकर्ताओं को धमकाए जाने का मुद्दा उठा रहे थे, तभी कांग्रेस के नेता व पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया.
बात इतनी बढ़ गई कि वर्तमान भाजपा विधायक शिव अरोड़ा और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल सीधे आमने-सामने आ गए. दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस, मर्यादाहीन भाषा का प्रयोग और गाली-गलौज शुरू हो गई. देखते ही देखते दोनों पक्षों के समर्थक भी आपस में भिड़ गए और अधिकारियों के सामने ही जमकर हाथापाई व धक्का-मुक्की हुई.
दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप
- भाजपा विधायक शिव अरोड़ा का पक्ष: विधायक शिव अरोड़ा ने आरोप लगाया कि जब भाजपा नेता शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे थे, तो कांग्रेस नेता अपना आपा खो बैठे और उन्होंने गुंडागर्दी और गाली-गलौज शुरू कर दी. सरकारी बैठक की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए उन्होंने विपक्षी नेताओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. [1]
- कांग्रेस नेता राजकुमार ठुकराल का पक्ष: पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने भाजपा नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के नेताओं ने पहले बदतमीजी की और गाली-गलौज की शुरुआत की. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिला प्रशासन केवल भाजपा नेताओं को शह दे रहा है और एकतरफा रुख अपना रहा है.
अधिकारियों की मौजूदगी और FIR को लेकर कदम
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत और डीएम नितिन सिंह भदौरिया ने नेताओं को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन माहौल बेहद गरमा गया था. बैठक के तुरंत बाद विधायक शिव अरोड़ा और भाजपा जिला अध्यक्ष कमल जिंदल के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट परिसर में ही धरने पर बैठ गए.
- सीसीटीवी और वीडियो फुटेज की जांच: जिलाधिकारी और एसएसपी ने बताया कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा व शांति भंग करने के मामले को गंभीरता से लिया गया है.
- मुकदमे की तैयारी: प्रशासन कलेक्ट्रेट सभागार के भीतर की आधिकारिक वीडियो रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहा है. भाजपा नेताओं द्वारा सौंपे गए तहरीर/ज्ञापन और इन वीडियो साक्ष्यों के आधार पर पुलिस दोषी नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है.
वर्तमान स्थिति: क्षेत्र में किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए रुद्रपुर कलेक्ट्रेट परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी (PAC) को तैनात रखा गया है.
संपादकीय लेख अवतार सिंह बिष्ट,कुर्सी का ‘विशेष पुनरीक्षण’ और लोकतंत्र का कलेक्ट्रेट दंगल?रुद्रपुर में जब हुक्मरानों ने ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) की बैठक बुलाई, तो नेताओं को लगा कि शायद अपनी-अपनी सियासी जमीन का ‘गहन शुद्धिकरण’ करने का मौका आ गया है। आखिर मामला ‘मिशन 2027’ का जो ठहरा! चुनावी वैतरणी पार लगाने के लिए वोट बैंक को चमकाना जितना जरूरी है, विरोधियों के वोट कटवाना उससे भी ज्यादा पवित्र काम माना जाता है।
फिर क्या था, कलेक्ट्रेट का एसी (AC) कमरा अचानक कुरुक्षेत्र के मैदान में तब्दील हो गया। कुमाऊं कमिश्नर और जिलाधिकारी महोदय डायरी-पेन लेकर कागजी वोटों की गिनती दुरुस्त करने बैठे थे, लेकिन नेताओं ने सीधे ‘हाथ-पैर’ से वोटों का हिसाब-किताब बराबर करना शुरू कर दिया। वर्तमान विधायक शिव अरोड़ा और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के बीच जब मर्यादाओं की ‘स्क्रिप्ट’ फटने लगी, तो अधिकारियों को समझ आया कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए टेबल थपथपाने से ज्यादा जरूरी, टेबल के नीचे छिपना है।
अब माहौल में ‘एफआईआर’ (FIR) का तड़का लग चुका है। कलेक्ट्रेट परिसर में धरने और पुलिस के बूटों की आवाजें गूंज रही हैं। जनता ताली बजा रही है कि जो नेता क्षेत्र की सड़कों और पानी की समस्याओं पर कभी अधिकारियों के सामने नहीं गरजे, वे मिशन 2027 की ‘पटकथा’ लिखने के लिए साहबों के सामने ही आपस में गुत्थमगुत्ता हो गए। सच है, वोट लिस्ट सुधरे न सुधरे, रुद्रपुर की राजनीति का ‘मानसिक पुनरीक्षण’ जनता ने लाइव देख लिया है!
कलेक्ट्रेट का ‘दंगल’ और मीडिया का ‘मंगल’: टीआरपी का चुनावी शंखनाद
रुद्रपुर कलेक्ट्रेट में नेताओं के बीच मर्यादाएं तार-तार हुईं, कुर्सियां हिलीं, और अधिकारियों के पसीने छूटे। लेकिन इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच अगर कोई सबसे ज्यादा गदगद था, तो वह था हमारा टीआरपी-भोगी मीडिया। लोकतंत्र के इस ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) ने चुनावी खबरों के अकाल से जूझ रहे स्थानीय चैनलों और सोशल मीडिया पोर्टलों के लिए ‘अमृतधारा’ का काम किया।
जैसे ही विधायक शिव अरोड़ा और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की शुरू हुई, कलेक्ट्रेट सभागार एक लाइव रियलिटी शो में बदल गया। पत्रकारों के कैमरे जनता की समस्याओं को ढूंढते-ढूंढते थक चुके थे, लेकिन नेताओं की इस लाइव भिड़ंत को देखकर उनके लेंस चमक उठे। ‘ब्रेकिंग न्यूज’ की ऐसी सुनामी आई कि रुद्रपुर की टूटी सड़कें, जलभराव और महंगाई के मुद्दे पल भर में हवा हो गए।
चैनलों पर लाल रंग की पट्टियां दौड़ने लगीं—”रुद्रपुर में महासंग्राम!”, “अधिकारियों के सामने चले लात-घूंसे!” थंबनेल ऐसे बनाए गए मानो मिशन 2027 का फाइनल मुकाबला इसी कलेक्ट्रेट रूम में खेला जा रहा हो। नेताओं के बयानों को मिर्च-मसाला लगाकर परोसा गया, क्योंकि जितनी ज्यादा नफरत और हंगामा होगा, टीआरपी का मीटर उतनी ही तेजी से भागेगा। जनता भी विकास के मुद्दों को भूलकर स्क्रीन से चिपक गई। सच तो यह है कि नेताओं ने सिर्फ अपनी सियासी पटकथा लिखी, लेकिन असली मुनाफा तो मीडिया ने अपनी टीआरपी की झोली में बटोरा।
