लाइव :स्वाइन फ्लू की दस्तक के बीच रुद्रपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल, मरीजों का इलाज कौन करेगा?

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रुद्रपुर। देहरादून में एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के लगातार बढ़ते मामलों ने पूरे उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को सतर्क करने की जरूरत पैदा कर दी है। देहरादून में 148 सैंपलों की जांच में 59 मरीजों में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि और पांच मौतों का आंकड़ा सामने आया है। ऐसे समय में सवाल यह है कि यदि संक्रमण का प्रकोप कुमाऊं मंडल में बढ़ता है तो रुद्रपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू जिला चिकित्सालय और पंडित राम सुमेर शुक्ला राजकीय मेडिकल कॉलेज कितने तैयार हैं?

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


यह सवाल इसलिए गंभीर है क्योंकि रुद्रपुर जिला अस्पताल पहले से ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार शासन से 11 चिकित्सकों की तैनाती के आदेश के बाद भी केवल चार चिकित्सकों ने ज्वाइन किया। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को दूसरे चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर किए जाने की स्थिति बनी हुई है।
मेडिकल कॉलेज में भी डॉक्टरों का संकट
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। अगस्त में जारी जानकारी के अनुसार 85 स्वीकृत फैकल्टी पदों में केवल 37 पद भरे होने की बात सामने आई थी। कॉलेज की ओर से विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किए जा रहे हैं। कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अगस्त 2026 में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के अनेक पदों पर भर्ती की जानकारी उपलब्ध है।
जुलाई में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज को 2026-27 सत्र के लिए 100 एमबीबीएस सीटों की मान्यता देने से इनकार किया था। रिपोर्टों में फैकल्टी, संसाधनों और निर्माण कार्यों से जुड़ी कमियों का उल्लेख किया गया। एक रिपोर्ट में कॉलेज में उस समय केवल 13 फैकल्टी उपलब्ध होने की जानकारी भी सामने आई थी।
अब सबसे बड़ा सवाल—एच1एन1 बढ़ा तो व्यवस्था क्या होगी?
देहरादून में स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों में मास्क अनिवार्य करने, संदिग्ध मरीजों को अलग देखने और संक्रमित मरीजों की निगरानी की व्यवस्था कर रहा है। रुद्रपुर में भी ऐसी तैयारी पहले से दिखाई देनी चाहिए।
क्या जिला अस्पताल में एच1एन1 संदिग्ध मरीजों के लिए अलग वार्ड और पर्याप्त आइसोलेशन व्यवस्था है?
क्या पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सक, फिजिशियन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, पल्मोनोलॉजिस्ट और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध है?
क्या ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, आवश्यक जांच और संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था पूरी क्षमता में उपलब्ध है?
यदि जिले में एक साथ बड़ी संख्या में मरीज सामने आते हैं तो उनका इलाज जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में किस व्यवस्था के तहत होगा?
क्या कुमाऊं मंडल के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले गंभीर मरीजों के लिए रुद्रपुर को वास्तविक रीजनल रेफरल सेंटर के रूप में तैयार किया गया है?
ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि रुद्रपुर जिला अस्पताल केवल शहर के मरीजों का अस्पताल नहीं है। यह पूरे ऊधमसिंह नगर के बड़े हिस्से के साथ कुमाऊं के सीमावर्ती क्षेत्रों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सरकारी चिकित्सा केंद्र है। विधायक शिव अरोड़ा ने भी हाल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्काल नियुक्ति और मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कक्षाएं शुरू कराने का मुद्दा स्वास्थ्य मंत्री के सामने उठाया है।
राज्य बनने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद रुद्रपुर को औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में लगातार विकसित किया गया। मेडिकल कॉलेज से लोगों को उम्मीद थी कि ऊधमसिंह नगर सहित कुमाऊं के मरीजों को उच्च स्तरीय सरकारी स्वास्थ्य सुविधा स्थानीय स्तर पर मिलेगी। मगर मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की कमी और जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव की खबरें उस उम्मीद पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।
सरकार के सामने अब केवल मेडिकल कॉलेज की इमारत और एमबीबीएस कक्षाएं शुरू कराने का लक्ष्य पर्याप्त नहीं है। मरीज को डॉक्टर चाहिए, विशेषज्ञ चाहिए, जांच चाहिए, दवा चाहिए और गंभीर स्थिति में तत्काल उपचार चाहिए।
एच1एन1 हो, कोरोना हो या कोई दूसरी संक्रामक बीमारी—महामारी की स्थिति में अस्पताल की असली क्षमता कागजों पर उपलब्ध बेड से तय होती है, बल्कि डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, दवाओं, ऑक्सीजन, जांच और आपातकालीन उपचार की वास्तविक उपलब्धता से तय होती है।
इसलिए स्वास्थ्य विभाग को तत्काल रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज और जवाहरलाल नेहरू जिला चिकित्सालय का एच1एन1 एवं अन्य संक्रामक रोगों की तैयारियों को लेकर सार्वजनिक ऑडिट कराना चाहिए। जिले की जनता को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि कितने डॉक्टर स्वीकृत हैं, कितने कार्यरत हैं, कितने विशेषज्ञ पद खाली हैं, कितने बेड उपलब्ध हैं और आपात स्थिति में कितने मरीजों को एक साथ उपचार दिया जा सकता है।
देहरादून के आंकड़े चेतावनी दे रहे हैं। अब रुद्रपुर को आंकड़े सामने रखकर अपनी तैयारी साबित करनी होगी। सवाल सिर्फ स्वाइन फ्लू का नहीं, कुमाऊं की पूरी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता का है।


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