उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में हाल ही में हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद एक बेहद चौंकाने वाला और नया विवाद सामने आया है।

Spread the love

परिसर के भीतर बने एक अवैध ढांचे को ध्वस्त किए जाने के बाद जब वहां से मलबा साफ किया जा रहा था, तब अचानक जमीन के नीचे एक पुराना कुआं नजर आया। सरकारी जमीन पर बनी इमारत के ठीक नीचे कुएं की मौजूदगी उजागर होते ही प्रशासनिक महकमे में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना के सामने आने के बाद से ही शहर में तरह-तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अधिकारियों की मानें तो जो इमारत ढहाई गई है, उसे इसी कुएं को ढककर तैयार किया गया था।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक का बड़ा दावा

कलेक्ट्रेट परिसर में कुआं मिलने की खबर फैलते ही हिंदू संगठनों की हलचल तेज हो गई है। मामले के मुख्य शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी ने इस नए खुलासे के बाद एक बहुत बड़ा दावा पेश किया है। मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कुएं के सामने आने से उनका पुराना अंदेशा अब सच में बदल चुका है।

विकास त्यागी के मुताबिक सनातन परंपरा में कुएं को बेहद पवित्र और पूजनीय स्थान का दर्जा दिया गया है। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि इस जगह पर प्राचीन समय में कोई मंदिर मौजूद रहा होगा, जिसे नष्ट करके बाद में अवैध ढांचा खड़ा कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि यदि इस पूरे परिसर की ईमानदारी से खोदाई और जांच कराई जाए, तो यहां से प्राचीन देव मूर्तियां भी बरामद हो सकती हैं। इसी आधार पर उन्होंने शासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से वैज्ञानिक सर्वे कराने की पुरजोर मांग की है।

SDM ने की कुएं की पुष्टि

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी तुरंत एक्शन में आ गए हैं। घटनास्थल पर जायजा लेने पहुंचे सहारनपुर सदर के उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) सुबोध कुमार ने मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से माना कि ढहाई गई इमारत के मलबे के नीचे कुएं की उपस्थिति पाई गई है।

उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में यही बात सामने आई है कि अवैध निर्माण पूरी तरह से कुएं को दबाकर ही खड़ा किया गया था। हालांकि, यह कुआं किस दौर का है और इसका निर्माण किसने कराया था, इससे जुड़े पुख्ता दस्तावेज अभी सामने नहीं आए हैं। साक्ष्यों को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाने और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए फिलहाल प्रशासन ने उस पूरे हिस्से को सुरक्षित तरीके से ढकवा दिया है।

पुराने नक्शे और अभिलेख खंगालेगा महकमा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर गहन छानबीन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। कलेक्ट्रेट परिसर के सबसे पुराने नक्शों, राजस्व विभाग के सरकारी रजिस्टरों और ऐतिहासिक कागजातों की बारीकी से पड़ताल शुरू की जा रही है, ताकि इस संरचना के वास्तविक इतिहास और समय का सही पता लगाया जा सके।

जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की समीक्षा और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो भी प्रामाणिक तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के आलोक में कानून के मुताबिक आगे के कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल कलेक्ट्रेट के आसपास के इलाके में कौतूहल और तनाव का माहौल बना हुआ है।


Spread the love