पंतनगर/रुद्रपुर। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित 120वां अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी इस बार किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि उद्यमियों और तकनीकी संस्थानों के लिए बड़े मंच के रूप में सामने आया है। 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हो रहे इस मेले में अब तक उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और नेपाल तक से किसान पहुंच चुके हैं। मेले में 560 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं और विश्वविद्यालय को चार दिनों में करीब 40 से 50 हजार किसानों के पहुंचने की उम्मीद है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
मेले की इस वर्ष की थीम ‘स्मार्ट खेती-स्वस्थ धरती-समृद्ध किसान’ रखी गई है। आयोजन में उन्नत बीज, कृषि मशीनरी, ड्रोन तकनीक, सेंसर आधारित खेती, प्राकृतिक एवं जैविक कृषि, एग्री स्टार्टअप, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, डेयरी, बागवानी और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से जुड़ी तकनीकों को प्रमुखता दी गई है।
राज्यपाल ने किया मेले का उद्घाटन
3 अक्टूबर को राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप सहित कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी, किसान और विद्यार्थी मौजूद रहे।
उद्घाटन के बाद राज्यपाल ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और किसानों, कृषि वैज्ञानिकों तथा विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान कृषि नवाचारों, स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों और नई कृषि तकनीकों को भी देखा गया।
‘लैब से लैंड’ तक पहुंचे कृषि शोध
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं और फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वैज्ञानिक शोध का वास्तविक लाभ तभी है जब वह ‘लैब से लैंड’ तक पहुंचे और किसान के खेत में दिखाई दे।
उन्होंने किसानों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, सेंसर और डिजिटल तकनीक जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि खेती में तकनीक का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि लागत कम करना, संसाधनों का बेहतर उपयोग और किसानों की आय बढ़ाना भी होना चाहिए।
राज्यपाल ने उत्तराखंड में हनी रिवोल्यूशन, एरोमा रिवोल्यूशन और श्री अन्न यानी मिलेट्स की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने किसानों से उत्पादन के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बाजार, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर भी ध्यान देने की अपील की।
उन्नत बीज खरीदने के लिए लगी कतारें
मेले में सबसे अधिक आकर्षणों में से एक पंतनगर के उन्नत एवं प्रमाणित बीजों की बिक्री है। उद्घाटन के पहले ही दिन किसानों की बीज खरीदने के लिए लंबी कतारें देखने को मिलीं।
विश्वविद्यालय की ओर से इस वर्ष ब्रीडर बीज की खरीद पर 15 प्रतिशत विशेष छूट दी जा रही है। सामान्य तौर पर यह छूट 10 प्रतिशत बताई गई है। गेहूं की विभिन्न उन्नत प्रजातियों के साथ दलहनी और तिलहनी फसलों के बीज भी उपलब्ध हैं।
विश्वविद्यालय के अनुसार इस बार पिछले वर्ष की तुलना में बीज उत्पादन और उपलब्धता बढ़ाई गई है। गेहूं की विभिन्न प्रजातियों के साथ जौ, मसूर, चना और तिलहनी फसलों के बीज भी किसानों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।
ड्रोन से लेकर स्मार्ट खेती तक
मेले में पारंपरिक कृषि उपकरणों के साथ आधुनिक तकनीक भी किसानों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर, पावर टिलर, प्लांटर, सिंचाई उपकरण और अन्य कृषि मशीनरी के साथ ड्रोन आधारित कृषि तकनीक और सेंसर आधारित खेती का प्रदर्शन किया जा रहा है।
इसके अलावा जैविक उत्पाद, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, दुग्ध उत्पाद, फूल और सब्जियों की नई प्रजातियां तथा स्मार्ट कृषि उपकरण भी प्रदर्शित किए गए हैं।
महिला स्वयं सहायता समूहों ने जैम, जेली, पापड़, अचार, बेकरी उत्पाद, बड़ी और हस्तशिल्प सहित स्थानीय उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं। इससे मेले में खेती के साथ ग्रामीण उद्यमिता और महिला स्वरोजगार का पक्ष भी सामने आया है।
पंतनगर और पतंजलि मिलकर बढ़ाएंगे किसानों की आय
4 अक्टूबर को किसान मेले के दूसरे दिन पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने किसानों से संवाद किया। उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय और पतंजलि के बीच कृषि क्षेत्र में व्यापक सहयोग का प्रस्ताव रखा।
इस सहयोग में औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों, उन्नत बीज और रोपण सामग्री, किसानों के प्रशिक्षण, उत्पादों की खरीद, प्रसंस्करण और बाजार उपलब्ध कराने जैसे विषयों को शामिल करने की बात कही गई।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाने से किसानों की समस्या हल नहीं होगी। किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य और मजबूत बाजार भी मिलना चाहिए। पंतनगर के कृषि अनुसंधान और पतंजलि के संसाधनों तथा बाजार व्यवस्था को जोड़कर किसानों के लिए बेहतर मॉडल विकसित किया जा सकता है।
भीड़ ने बढ़ाई यातायात की चुनौती
किसान मेले में रविवार को उमड़ी भारी भीड़ का असर पंतनगर की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा। नगला से गोलगेट, फूलबाग से टांडा मोड़ और पंतनगर परिसर के आसपास करीब पांच किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
कई वाहन चालक करीब ढाई से तीन घंटे तक जाम में फंसे रहे। रविवार को मेले में बढ़े वाहन दबाव के साथ वीआईपी मूवमेंट को भी जाम का एक कारण बताया गया।
मेले को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले से ही पार्किंग, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए थे। इसके बावजूद रविवार की भीड़ ने व्यवस्थाओं की परीक्षा ले ली।
फल, सब्जी और पुष्प प्रदर्शनी भी आकर्षण
मेले में 3 और 4 अक्टूबर को फल, सब्जी, पुष्प और प्रसंस्कृत उत्पादों की प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। किसानों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
इसके अलावा कृषि वैज्ञानिकों के विशेष व्याख्यान और किसान संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। किसानों को खेती से जुड़ी नई तकनीक, रोग नियंत्रण, फसल प्रबंधन और बाजार संबंधी जानकारी विशेषज्ञों के माध्यम से दी जा रही है।
प्रगतिशील किसानों का सम्मान
उद्घाटन समारोह के दौरान उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से चयनित नौ प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से चयनित किया गया था। उन्हें पांच-पांच हजार रुपये की राशि और प्रतीक चिह्न प्रदान किए गए।
अब 6 अक्टूबर को समापन
किसान मेले का समापन 6 अक्टूबर को गांधी हॉल में पुरस्कार वितरण समारोह के साथ होगा। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्टॉलों को सम्मानित किया जाएगा।
कुल मिलाकर इस वर्ष का पंतनगर किसान मेला केवल कृषि उत्पादों और बीजों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। स्मार्ट खेती, ड्रोन, एआई, प्राकृतिक खेती, कृषि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, बाजार और एग्री स्टार्टअप जैसे विषयों ने इसे कृषि के बदलते स्वरूप का बड़ा मंच बना दिया है।
HGT की नजर में बड़ा सवाल
पंतनगर में किसानों को तकनीक और उन्नत बीज उपलब्ध कराने की तस्वीर उत्साहजनक है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब मेले में दिखाई जा रही तकनीक और शोध किसान के खेत तक पहुंचे, खेती की लागत घटे, उत्पादन का उचित मूल्य मिले और किसान की वास्तविक आय बढ़े।
पंतनगर की पहचान देश के कृषि शोध और हरित क्रांति से जुड़ी रही है। अब चुनौती यह है कि विश्वविद्यालय ‘फूड सरप्लस’ से आगे बढ़कर ‘इनकम सरप्लस’ किसान की दिशा में कितनी प्रभावी भूमिका निभाता है। यही इस 120वें किसान मेले की सबसे बड़ी कसौटी भी होगी।
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