उत्तराखंड/रामपुर। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची से 9.31 लाख नाम कम होने का मुद्दा राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। दूसरी ओर, उत्तराखंड सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में दिनदहाड़े एक व्यक्ति की पांच गोलियां मारकर हत्या किए जाने से कानून-व्यवस्था और अपराधियों के दुस्साहस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, तो दूसरी ओर रामपुर की वारदात ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण और पुलिस की सतर्कता को चर्चा में ला दिया है।
दोनों घटनाएं अलग-अलग प्रकृति की हैं, लेकिन इनसे एक व्यापक सवाल सामने आता है—लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रभावी कानून-व्यवस्था कितनी जरूरी है?
एसआईआर के आंकड़ों पर भाजपा का कांग्रेस को जवाब
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची में 9.31 लाख नाम कम होने को लेकर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस मतदाता सूची के आंकड़ों को गलत तरीके से पेश कर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
भाजपा की ओर से रखे गए आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर के दौरान कम हुए नामों में मृत मतदाता, दूसरे राज्यों में स्थानांतरित हो चुके लोग, डुप्लीकेट प्रविष्टियां और निर्धारित पते पर नहीं मिलने वाले मतदाता शामिल हैं। पार्टी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में 1.24 लाख से अधिक मृत मतदाताओं तथा 6,33,573 से अधिक ऐसे लोगों की प्रविष्टियां सामने आईं, जो दूसरे राज्यों में स्थानांतरित हो चुके हैं अथवा दिए गए पते पर नहीं मिले। इसके अतिरिक्त 61 हजार से अधिक मल्टीपल या डुप्लीकेट प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया है।
भाजपा का तर्क है कि मतदाता सूची को अद्यतन बनाने के लिए इस तरह की प्रविष्टियों की जांच आवश्यक है। हालांकि, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से न हटे और प्रत्येक आपत्ति का निस्तारण नियमानुसार हो।
फार्म-7 पर भाजपा ने पेश किए आंकड़े
भाजपा की ओर से फार्म-7 के आंकड़ों को आधार बनाते हुए कहा गया है कि कुल 96,704 आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। पार्टी के अनुसार, जांच के बाद 89,182 आवेदन निरस्त कर दिए गए, जबकि 7,522 नाम हटाए गए।
प्रदेश में कुल 71,58,949 पंजीकृत मतदाताओं का उल्लेख करते हुए भाजपा ने कांग्रेस के उन दावों पर सवाल उठाया है, जिनमें लाखों नाम काटे जाने को लेकर चिंता जताई जा रही है।
भाजपा का कहना है कि यदि दूसरे राज्यों में स्थानांतरित अथवा अनुपलब्ध बताए गए लोग वास्तव में उत्तराखंड में रह रहे हैं, तो कांग्रेस को संबंधित तथ्यों के साथ अपनी बात सामने रखनी चाहिए। पार्टी ने डुप्लीकेट प्रविष्टियों को लेकर भी सवाल उठाया है और कहा है कि एक व्यक्ति का कई स्थानों पर नाम दर्ज रहना मतदाता सूची की शुद्धता के लिहाज से गंभीर विषय है।
भाजपा की ओर से निर्वाचन प्रक्रिया को बदनाम करने के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा करने की अपील की गई है।
हालांकि, एसआईआर में कम हुए कुल 9.31 लाख नामों और फार्म-7 के तहत हटाए गए 7,522 नामों को अलग-अलग आंकड़ों के रूप में समझना जरूरी है। दोनों आंकड़े एक ही प्रक्रिया के अलग-अलग पहलुओं से जुड़े हैं। इसलिए पूरे मामले का निष्पक्ष आकलन करने के लिए निर्वाचन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों, नाम हटाने के कारणों और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया को सामने रखना आवश्यक होगा।
रामपुर में दिनदहाड़े पांच गोलियां मारकर हत्या
इधर, उत्तराखंड सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव सुभाषनगर डिबडिबा में गुरुवार को दिनदहाड़े हुई हत्या ने इलाके में सनसनी फैला दी।
पुलिस के अनुसार, संदीप सिंह चौहान उर्फ सनी उर्फ सनिया (30) गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे अपनी बेटी के बुखार की दवा लेकर मेडिकल स्टोर से पैदल घर लौट रहा था। वह गांव में अंग्रेजी शराब की दुकान के सामने पहुंचा ही था कि बाइक सवार तीन नकाबपोश हमलावरों ने उसे घेर लिया।
हमलावरों ने अलग-अलग तमंचों से उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। पांच गोलियां लगने से संदीप जमीन पर गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों हमलावर बाइक से फरार हो गए। अचानक हुई गोलीबारी से आसपास मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई।
सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया।
पुरानी रंजिश के पहलू की जांच
मृतक की पत्नी शिवानी ने पुलिस को बताया कि संदीप की गांव के ही तीन लोगों से पुरानी रंजिश चल रही थी। बताया गया कि होली के दौरान बुलेट मोटरसाइकिल से घर के सामने पटाखे चलाने को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मारपीट और फायरिंग की घटना भी हुई थी।
पुलिस इस रंजिश को हत्या की संभावित वजह मानकर जांच कर रही है। हालांकि, हमले के पीछे वास्तविक कारण क्या था और वारदात में कौन-कौन शामिल है, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। हमलावरों के आने-जाने के संभावित रास्तों की भी जांच की जा रही है। फोरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वायड की मदद से साक्ष्य जुटाए गए हैं।
मृतक पर दर्ज थे 20 मुकदमे
पुलिस के मुताबिक, संदीप के खिलाफ बिलासपुर कोतवाली में 16 और उत्तराखंड में चार मुकदमे दर्ज थे। इनमें चोरी, लूट, मारपीट और फायरिंग समेत विभिन्न आरोपों से संबंधित मामले शामिल बताए गए हैं। उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी और वह कुछ दिन पहले ही जमानत पर जेल से बाहर आया था।
पुलिस उसके पुराने विवादों, आपराधिक संपर्कों और संभावित रंजिशों की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
पारदर्शिता और कानून-व्यवस्था, दोनों पर जनता की नजर
उत्तराखंड की मतदाता सूची का विवाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा है। वहीं, रामपुर में हुई हत्या अपराध नियंत्रण, पुलिस जांच और आम नागरिकों की सुरक्षा से संबंधित गंभीर मामला है।
मतदाता सूची में नामों की कमी को लेकर राजनीतिक दलों के दावों का मूल्यांकन तथ्यों और निर्वाचन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि कोई पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।
रामपुर की घटना में भी निष्पक्ष और त्वरित जांच के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण है। दिनदहाड़े हुई गोलीबारी ने ग्रामीण क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता बढ़ाई है। हालांकि, हत्या के पीछे की वास्तविक वजह और आरोपियों की भूमिका पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट: लोकतंत्र में मतदाता सूची का भरोसा और आम नागरिक की सुरक्षा, दोनों शासन व्यवस्था की कसौटी हैं। राजनीतिक आरोपों का जवाब तथ्यों से मिलना चाहिए और अपराध के मामलों में कानून को प्रभावी ढंग से अपना काम करना चाहिए। जनता को बयानबाजी से आगे बढ़कर पारदर्शी प्रक्रिया, जवाबदेही और ठोस कार्रवाई के परिणाम देखने की अपेक्षा है।
मतदाता सूची पर सियासी घमासान, रामपुर में सरेराह पांच गोलियों से गैंगस्टर की हत्या; उत्तराखंड की राजनीति और सीमावर्ती सुरक्षा पर उठे सवालहिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | विशेष रिपोर्ट
