अशोक नगर की रामलीला में गूँजे ‘जय श्रीराम’ के जयकारे, शिव धनुष भंग होते ही भक्ति में डूबे रामभक्तरावण-बाणासुर संवाद, सीता स्वयंवर और श्रीराम-परशुराम संवाद का भव्य मंचन; कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध


रुड़की, 9 अक्टूबर 2026।
रुड़की के अशोक नगर में शिव चौक, बुचड़ी फाटक के निकट आयोजित रामलीला के तीसरे दिन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। देवभूमि श्रीराम धार्मिक एवं सांस्कृतिक ट्रस्ट, रुड़की के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में सीता स्वयंवर, रावण-बाणासुर संवाद, भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग करने और माता सीता के वरण सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। जैसे ही भगवान श्रीराम ने शिव धनुष तोड़ा और माता सीता ने उनके गले में वरमाला पहनाई, पूरा रामलीला परिसर ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूँज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव और उत्साह के साथ प्रभु श्रीराम का जयघोष किया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड


रामलीला के तृतीय दिवस का शुभारंभ मुख्य अतिथि शिवचरण पुंडीर, शिवालिक स्कूल; पूर्व सैनिक प्रेमलाल कुलाश्री; जगदंबा कीर्तन मंडली, अशोक नगर; पूर्व प्रधान श्रीमती कमला बमोला; लक्ष्मी आर्ट ज्वैलर्स के सुरेंद्र पाल तथा पवन सहदेव ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के पदाधिकारी, सदस्य, कलाकार, स्थानीय नागरिक और बड़ी संख्या में रामभक्त उपस्थित रहे।
सीता स्वयंवर के मंचन ने बाँधा समां
तीसरे दिन की रामलीला में राजा जनक द्वारा माता सीता के स्वयंवर की घोषणा से कथा आगे बढ़ी। स्वयंवर में शामिल होने के लिए विभिन्न राज्यों के राजा जनकपुरी पहुँचे। सभी के सामने भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने की चुनौती रखी गई। एक-एक कर अनेक शक्तिशाली राजाओं ने धनुष उठाने और उसे तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सका।
स्वयंवर के इस प्रसंग का मंचन कलाकारों ने प्रभावशाली संवादों और जीवंत अभिनय के माध्यम से किया। जैसे-जैसे राजाओं के प्रयास विफल होते गए, वैसे-वैसे मंच पर उत्सुकता और रोमांच बढ़ता गया। स्वयंवर में उपस्थित राजाओं की असफलता से राजा जनक निराश हो उठे। उनकी निराशा और व्याकुलता को देखकर दर्शक भी कथा के भावनात्मक पक्ष से जुड़ते नजर आए।
राजा जनक के संवादों में क्षत्रिय कुल की वीरता और सामर्थ्य को लेकर व्यक्त की गई निराशा ने नाटकीय वातावरण को और प्रभावशाली बना दिया। इस दौरान लक्ष्मण जी ने राजा जनक की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। उनके ओजस्वी संवादों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और रामलीला परिसर तालियों से गूँज उठा।
रावण-बाणासुर संवाद ने बढ़ाया रोमांच
रामलीला के प्रमुख आकर्षणों में रावण और बाणासुर के बीच हुआ संवाद भी शामिल रहा। दोनों पात्रों के बीच प्रस्तुत संवादों में शक्ति, अहंकार, पराक्रम और स्वाभिमान का नाटकीय चित्रण किया गया। कलाकारों ने अपनी संवाद अदायगी और मंचीय प्रस्तुति से इस प्रसंग को जीवंत बना दिया।
रावण-बाणासुर संवाद ने दर्शकों के बीच उत्सुकता बनाए रखी। रामलीला में ऐसे प्रसंग भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी कथाओं को मंच के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। कलाकारों ने संवादों की प्रभावशीलता और अभिनय के जरिए कथा के विभिन्न भावों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया।
शिव धनुष भंग होते ही गूँजा ‘जय श्रीराम’
सीता स्वयंवर का सबसे भावपूर्ण और रोमांचक क्षण उस समय आया, जब महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम धनुष भंग करने के लिए आगे बढ़े। भगवान श्रीराम ने सहजता से भगवान शिव के धनुष को उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाने के प्रयास में धनुष भंग हो गया।
धनुष टूटने के साथ ही रामलीला परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने ‘जय श्रीराम’ के जयकारे लगाने शुरू कर दिए। पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसके बाद माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला पहनाकर उन्हें अपना जीवनसाथी स्वीकार किया। इस दृश्य को कलाकारों ने गरिमामय और भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया।
मंच पर प्रस्तुत इस प्रसंग ने दर्शकों को रामायण की उस महत्वपूर्ण घटना से जोड़ दिया, जिसमें भगवान श्रीराम के पराक्रम, सहजता और मर्यादा का चित्रण मिलता है। माता सीता द्वारा वरमाला पहनाए जाने के दृश्य पर रामभक्तों ने उत्साहपूर्वक जयघोष किया। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित उपस्थित दर्शकों ने इस प्रस्तुति का आनंद लिया।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने मोहा मन
शिव धनुष भंग होने के बाद भगवान परशुराम के प्रवेश से रामलीला का वातावरण और भी रोमांचक हो गया। धनुष टूटने की घटना से उत्पन्न परिस्थितियों के बीच भगवान परशुराम और लक्ष्मण जी के बीच हुए ओजस्वी, तार्किक और प्रभावशाली संवादों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दोनों पात्रों के बीच संवादों की तीव्रता, भाव-भंगिमा और अभिनय ने मंचन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। लक्ष्मण जी के निर्भीक उत्तर और भगवान परशुराम के तेजस्वी व्यक्तित्व को कलाकारों ने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना की और कई अवसरों पर तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
इन प्रसंगों के साथ रामलीला के तीसरे दिन की प्रस्तुति का समापन हुआ। आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय लोकनाट्य परंपरा की जीवंत झलक भी देखने को मिली।
श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास
देवभूमि श्रीराम धार्मिक एवं सांस्कृतिक ट्रस्ट की ओर से आयोजित रामलीला का उद्देश्य धार्मिक कथाओं के मंचन के साथ भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, सत्य, कर्तव्य और धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है। रामलीला भारतीय समाज की ऐसी सांस्कृतिक परंपरा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को अपनी धार्मिक विरासत से जोड़ती रही है।
अशोक नगर में आयोजित इस रामलीला में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी और रामभक्तों का उत्साह आयोजन की विशेषता रहा। मंच पर प्रस्तुत प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों को रामायण की घटनाओं का स्मरण कराया गया। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम सामाजिक सहभागिता और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत करते हैं।
ट्रस्ट पदाधिकारी, कलाकार और गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर नगर पंचायत ढंडेरा के अध्यक्ष सतीश सिंह नेगी, ट्रस्ट के संस्थापक अर्जुन सिंह तड़ियाल, संरक्षक राजेंद्र सिंह रावत, अध्यक्ष विक्रम प्रसाद कुलाश्री, महासचिव जगदीश नेगी, संयोजक सुरेंद्र सिंह नेगी, कार्यकारिणी अध्यक्ष दिगंबर सिंह नेगी और निर्देशक बलबीर सिंह रावत उपस्थित रहे। इनके साथ धर्मगुरु चंद्र मोहन कुलाश्री, सुदर्शन डोवरियाल, हरेंद्र सिंह बिष्ट, विनोद जखवाल, गोपाल दत्त मैदौला, आनंद सिंह रावत, मेघ सिंह चौहान, चिंतामणि जखवाल, त्रिलोक सिंह रावत, चंद्र बल्लभ बड़थ्वाल, प्रेम सिंह राणा, खुशीराम बंगवाल, मनोज भारद्वाज, ताजवर सिंह रौथाण, नागेंद्र सिंह दुमांगा, राकेश चौहान, मुकेश बिष्ट, हरदीप, आयुष, अभिनयाल, प्रियांशु और मनीषा रावत सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
इसके अतिरिक्त सृष्टि बिष्ट, स्नेहा, नरेंद्र सिंह गोसाई, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, पार्वती देवी, साहिल, रिया बिष्ट, अरनव डोबरियाल, अंशुल, देवांशी, मानवी, आशिक, रिया, कृतिका, हिमांशु, ममता चौहान, सुनीता नेगी, माहेश्वरी नेगी, रजनी कुलाश्री, सरोज बड़थ्वाल, भास्कर कणवाल, प्रदीप बुडाकोटी, हेमंत बड़थ्वाल और राजकुमार पत्रकार सहित ट्रस्ट के सदस्य, रामलीला के कलाकार तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
रामलीला के तीसरे दिन सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग और श्रीराम-परशुराम संवाद के प्रभावशाली मंचन ने अशोक नगर में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना दिया। ‘जय श्रीराम’ के जयकारों के बीच संपन्न हुई प्रस्तुति ने दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ी। आयोजन के माध्यम से क्षेत्र में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सहभागिता की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है।
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