किच्छा। किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला द्वारा अधिवक्ताओं और उनके काले कोट को लेकर की गई टिप्पणी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व विधायक के बयान को लेकर अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश व्याप्त है। वकीलों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले जनप्रतिनिधियों से समाज के सभी वर्गों के प्रति सम्मानजनक भाषा और मर्यादित शब्दों के प्रयोग की अपेक्षा रहती है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि काला कोट न्याय व्यवस्था और कानून के प्रति उनकी जिम्मेदारी का प्रतीक है। अधिवक्ता संविधान, कानून और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय में अपनी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में काले कोट को लेकर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या व्यंग्यात्मक टिप्पणी पूरे अधिवक्ता समाज की गरिमा से जुड़ा विषय बन जाती है।
वकीलों ने पूर्व विधायक की टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, पर अधिवक्ता समुदाय का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने मांग की कि राजेश शुक्ला अपने बयान को स्पष्ट करें और अधिवक्ता समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए स्पष्टीकरण दें।
अधिवक्ताओं का कहना है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि, न्यायपालिका और अधिवक्ता समाज एक-दूसरे के पूरक हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंचों से की गई टिप्पणियों में संवैधानिक संस्थाओं और उनसे जुड़े लोगों की गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। पूर्व विधायक की टिप्पणी के बाद अधिवक्ताओं में बढ़ते आक्रोश ने राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है।
पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की टिप्पणी पर वकीलों में आक्रोश, काले कोट को लेकर दिए बयान पर जताई नाराजगी
