हल्द्वानी में 28 मतदाताओं के नाम हटाने के मामले में FIR के आदेश, रुद्रपुर में पुष्पा उप्रेती के नाम से 300 आपत्तियों पर उठे सवाल

SIR में पहचान के कथित दुरुपयोग की जांच की मांग तेज, पुष्पा उप्रेती और गोपी किशन के शपथपत्रों के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी की भूमिका अहम

रुद्रपुर। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए कथित तौर पर फर्जी आपत्तियां दर्ज किए जाने के मामले में सवाल गहराने लगे हैं। हल्द्वानी में एक व्यक्ति के नाम से 28 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फार्म-7 भरे जाने के प्रकरण में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम शुभांगी गुप्ता ने छह अक्टूबर 2026 को पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद रुद्रपुर में पुष्पा उप्रेती और गोपी किशन के नाम से दर्ज आपत्तियों का मामला भी चर्चा में आ गया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड

हल्द्वानी में न्यायालय ने क्या दिए आदेश?

इंद्रानगर निवासी इकराम अली के अनुसार, वह SIR प्रक्रिया में अपने बूथ पर बूथ लेवल एजेंट-2 (BLA-2) के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्हें 20 अगस्त को जानकारी मिली कि निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर 12 अगस्त 2026 को भाग संख्या 134 के 28 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए उनके नाम से फार्म-7 भरे गए हैं।

इकराम अली का दावा है कि उन्होंने न तो ये आवेदन भरे और न ही किसी अन्य व्यक्ति को अपनी ओर से आवेदन करने के लिए अधिकृत किया। उन्होंने 24 अगस्त को बनभूलपुरा थाने और 29 अगस्त को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नैनीताल को शिकायत भेजी थी। प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर उन्होंने 15 सितंबर को न्यायालय का रुख किया।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में संशोधन के लिए निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने और किसी की पहचान का कथित दुरुपयोग कर आवेदन भरने के मामले में आपराधिक जांच अलग-अलग विषय हैं। पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना करने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच में आवेदन भरने के लिए इस्तेमाल किए गए लॉगिन विवरण, पंजीकृत मोबाइल नंबर, ई-मेल, ओटीपी, इंटरनेट प्रोटोकॉल पता और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित अभिलेख महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

रुद्रपुर में पुष्पा उप्रेती के नाम से करीब 300 आपत्तियां दर्ज होने का दावा

रुद्रपुर के वार्ड संख्या-06 और नवगठित वार्ड संख्या-20 एवं 21 में SIR प्रक्रिया के दौरान दर्ज आपत्तियों को लेकर भी विवाद सामने आया है।

भूतबंगला निवासी पुष्पा उर्फ पुष्पा उप्रेती पत्नी गिरीश ने नौ सितंबर 2026 को जिला निर्वाचन अधिकारी, ऊधम सिंह नगर को दिए प्रार्थना पत्र में दावा किया कि उनके नाम से मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, जबकि उन्होंने स्वयं कोई ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन आपत्ति दाखिल नहीं की।

उनके शपथपत्र के अनुसार, किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके नाम और पते का इस्तेमाल किया। स्थानीय स्तर पर उनके नाम से करीब 300 आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई है। उन्होंने अपने नाम से दर्ज आपत्तियों को खारिज करने का अनुरोध भी किया है।

पुष्पा उप्रेती ने कथित तौर पर भाजपा कार्यालय से फोन आने और उन्हें बार-बार कार्यालय बुलाए जाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी व्यक्ति या राजनीतिक संगठन की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

गोपी किशन ने भी शपथपत्र देकर जताई अनभिज्ञता

इसी प्रकरण में प्रीत विहार कॉलोनी, फाजलपुर महरौला निवासी गोपी किशन पुत्र दिल्ली धार की ओर से भी जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शपथपत्र प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई है।

गोपी किशन का कहना है कि उनके नाम से भी SIR प्रक्रिया के अंतर्गत मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज की गईं, जबकि उन्होंने स्वयं कोई ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन आवेदन नहीं किया। उन्होंने भी अपने नाम से दर्ज आपत्तियों को समाप्त करने की इच्छा व्यक्त की है।

दो अलग-अलग व्यक्तियों के नाम से इस प्रकार के शपथपत्र सामने आने के बाद यह पता लगाना जरूरी हो गया है कि आवेदन किसने भरे, किन माध्यमों से जमा किए गए और क्या संबंधित व्यक्तियों की सहमति ली गई थी।

क्या रुद्रपुर में भी दर्ज हो सकती है FIR?

हल्द्वानी के मामले में न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश से रुद्रपुर में स्वतः प्राथमिकी दर्ज नहीं हो जाती। हालांकि, यदि पुष्पा उप्रेती और गोपी किशन की पहचान का उनकी जानकारी या सहमति के बिना इस्तेमाल किए जाने के संबंध में शिकायत और पर्याप्त आधार सामने आते हैं, तो वे पुलिस से जांच और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।

जिला निर्वाचन अधिकारी को भी प्रत्येक आपत्ति का रिकॉर्ड, आवेदन का माध्यम, संबंधित पहचान विवरण और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच करानी चाहिए। यदि प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपराध के तथ्य सामने आते हैं, तो पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।

उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी SIR के दौरान फार्म-7 से संबंधित आपत्तियों को लेकर शिकायतें और राजनीतिक आरोप सामने आए हैं। हालांकि, किसी क्षेत्र में अधिक आपत्तियां दर्ज होना अपने आप में फर्जीवाड़े का प्रमाण नहीं है। प्रत्येक शिकायत की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें

मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया लोकतंत्र से सीधे जुड़ी है। किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाने का प्रयास उसके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। वहीं, बिना पर्याप्त साक्ष्य किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को दोषी ठहराना भी उचित नहीं है।

अब सवाल यह है कि रुद्रपुर में पुष्पा उप्रेती और गोपी किशन के नाम से दर्ज आपत्तियों की तकनीकी जांच कब शुरू होगी? क्या आवेदन भरने वाले व्यक्ति की पहचान सामने आएगी? और यदि पहचान के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई होगी?

फिलहाल हल्द्वानी में न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस विवेचना का रास्ता खुला है, जबकि रुद्रपुर में सामने आए आरोपों की सच्चाई निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगी।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | रुद्रपुर