देहरादून/अल्मोड़ा/रुद्रपुर/गदरपुर। उत्तराखंड में सरकारी व्यवस्थाओं और जनसरोकारों से जुड़े कई मामले एक बार फिर चर्चा में हैं। कहीं सरकारी विद्यालयों में हजारों बच्चे फर्नीचर के अभाव में फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, तो कहीं अल्मोड़ा में युवतियों की तस्वीरों और चैट से जुड़े गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन ने कॉस्मेटिक दुकान को सील कर दिया है। दूसरी ओर, तराई क्षेत्र में शुक्रवार को अचानक बदले मौसम, तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। गदरपुर और आसपास के गांवों में धान की खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई, जबकि कई मार्गों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से यातायात भी बाधित हुआ। इन घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था, डिजिटल निजता की सुरक्षा और आपदा के समय किसानों को राहत देने की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।
44 हजार से अधिक विद्यार्थी फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट रूद्रपुर उत्तराखंड
देहरादून। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा लगातार उठ रहा है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड के लगभग 44,085 छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त फर्नीचर उपलब्ध नहीं है। इसके कारण बड़ी संख्या में बच्चे आज भी फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में यह समस्या विशेष रूप से गंभीर बताई जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, माध्यमिक विद्यालयों में करीब 26,835 विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर की आवश्यकता है, जबकि प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 17,250 बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच उपलब्ध नहीं हैं। इस तरह प्राथमिक और माध्यमिक स्तर को मिलाकर हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।
जिलेवार स्थिति में टिहरी जिले में 1,195 विद्यालयों में फर्नीचर की कमी बताई गई है, जबकि पिथौरागढ़ में ऐसे विद्यालयों की संख्या 365 है। प्रदेश में 11,360 प्राथमिक विद्यालय और 2,259 माध्यमिक एवं इंटर कॉलेज संचालित हैं। एक अप्रैल 2026 से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र में भी सभी विद्यालयों में शत-प्रतिशत फर्नीचर उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई विद्यालयों से फर्नीचर की मांग समय पर नहीं पहुंचती। प्रधानाध्यापक, प्रधानाचार्य और शिक्षक आवश्यकता संबंधी प्रस्ताव समय पर नहीं भेजते, जिससे जिला शिक्षा अधिकारियों और मुख्य शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से निदेशालय तक मांग पहुंचने में देरी होती है।
वहीं, विभाग की ओर से यह भी कहा गया है कि बुनियादी सुविधाओं के लिए धन की कमी नहीं है और मांग के अनुसार फर्नीचर उपलब्ध कराया जाता है। कुछ स्थानों पर कुर्सी-मेज क्षतिग्रस्त होने के कारण कमी पैदा होती है।
हालांकि, सवाल यह है कि जब विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने और विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की बात होती है, तब हजारों बच्चों के बैठने तक की उचित व्यवस्था क्यों नहीं हो पा रही है? यदि समस्या केवल मांगपत्र समय पर नहीं भेजे जाने की है, तो विभाग को नियमित निरीक्षण, विद्यालयवार सर्वेक्षण और जवाबदेही की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। बच्चों को सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना किसी भी सरकार और शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अल्मोड़ा में युवतियों की तस्वीरों और चैट से जुड़े आरोप, कॉस्मेटिक दुकान सील
अल्मोड़ा। युवतियों की तस्वीरों, चैट स्क्रीनशॉट और सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सीढ़ी बाजार की हरमाल गली स्थित एक कॉस्मेटिक दुकान को सील कर दिया। दुकान नगर निगम की ओर से आवंटित की गई थी। दुकानदार पर युवतियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप लगे हैं। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
बजरंग दल के मुताबिक, दुकानदार की गतिविधियों को लेकर संगठन को शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद बुधवार को कार्यकर्ताओं ने दुकानदार को रोककर उसका मोबाइल फोन चेक किया। संगठन का दावा है कि मोबाइल में युवतियों की तस्वीरें, चैट के स्क्रीनशॉट और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली। इसके बाद मोबाइल पुलिस को सौंप दिया गया।
संगठन ने उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की साइबर और फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल सामग्री की जांच कर यह पता लगाने की मांग की गई है कि संबंधित तस्वीरें और चैट कहां से आईं तथा उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। युवतियों को ब्लैकमेल करने या परेशान करने की आशंका की भी जांच करने की मांग उठाई गई है।
नगर आयुक्त सीमा विश्वकर्मा ने बताया कि दुकानदार के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई थी। नगर निगम की ओर से दुकान आवंटित किए जाने और मामले का निगम की छवि पर असर पड़ने के मद्देनजर दुकान सील करने की कार्रवाई की गई।
यह मामला डिजिटल निजता और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण गंभीर है। हालांकि, मोबाइल में मिली सामग्री और आरोपों की वास्तविकता पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। आवश्यक है कि डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखकर निष्पक्ष जांच की जाए और किसी की निजी तस्वीरें या चैट सार्वजनिक न हों। बजरंग दल ने भी लोगों से अपील की है कि वे किसी युवती की निजी तस्वीर या बातचीत सोशल मीडिया पर साझा न करें और जांच पूरी होने तक अफवाहें फैलाने से बचें।
तराई में ओलावृष्टि का कहर, धान की फसल जमीन पर बिछी
रुद्रपुर/गदरपुर। तराई क्षेत्र में शुक्रवार को मौसम के अचानक बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि से धान की खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। कई खेतों में फसल जमीन पर बिछ गई और ओलों की सफेद परत जम गई। धान के साथ गन्ने की फसल पर भी मौसम की मार पड़ने की आशंका है।
धान की फसल इस समय पकने के दौर में है। ऐसे में तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पहले से बारिश के कारण नुकसान झेल रहे किसानों के लिए यह दोहरी मार साबित हुई। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन राजस्व और कृषि विभाग की ओर से खेतों का निरीक्षण करने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
नारायणपुर दोहरिया में बर्बादी का मंजर
गदरपुर क्षेत्र के ग्राम नारायणपुर दोहरिया में ओलावृष्टि ने खेतों की तस्वीर बदल दी। बारिश थमने के बाद जब किसान खेतों में पहुंचे तो धान की फसल जमीन पर बिछी देखकर मायूस हो गए। किसानों का कहना है कि उन्होंने पिछले 70 वर्षों में ऐसा नुकसान नहीं देखा।
महीनों की मेहनत से तैयार हो रही फसल को बर्बाद होते देख किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की आशंका है। फसल तैयार होने के करीब थी और किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन अचानक आई प्राकृतिक आपदा ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया।
नुकसान की जानकारी मिलने पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ग्राम नारायणपुर दोहरिया पहुंचे और प्रभावित किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान भजन सिंह, पूर्व प्रधान अवतार सिंह, ओमपाल सिंह, हरभजन सिंह, त्रिलोक सिंह, राम सिंह, हुकम सिंह, संतोष सिंह, सुखा भुसरी, वीरेंद्र सिंह, नेतराम, जरनैल सिंह और राजपाल सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
सांसद अजय भट्ट ने अधिकारियों से की बातचीत
गदरपुर क्षेत्र में किसानों की फसल को हुए नुकसान को लेकर सांसद अजय भट्ट ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली थी और वह क्षेत्र में जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच उनकी पत्नी के हृदय में अचानक दर्द होने के कारण उन्हें दिल्ली जाना पड़ रहा है।
सांसद ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से तत्काल बातचीत की है। अधिकारियों को जल्द से जल्द नुकसान की रिपोर्ट तैयार कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिस किसान की फसल को जितना नुकसान हुआ है, उसी के अनुसार मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को स्थिति की जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर बाजपुर में उतरा, जहां उन्होंने हालात की जानकारी लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
कई गांवों में धान की फसल प्रभावित, सड़कें भी बाधित
गदरपुर ब्लॉक के मुकुंदपुर, चार नंबर, पांच नंबर, रामचंद्रपुर, सीतापुर, गोपाल नगर, खेमपुर और रोशनपुर तोता वाला सहित अनेक गांवों में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की सूचना है। कई खेतों में खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई। किसानों को आशंका है कि इससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
तेज हवाओं के कारण गदरपुर-रुद्रपुर और गदरपुर-सकैनिया मार्ग पर कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए। इससे यातायात बाधित हुआ और सड़कों पर वाहनों की कतारें लग गईं।
सूचना मिलने पर उप जिलाधिकारी डॉ. अमृता शर्मा और तहसीलदार लीना चंद्रा राजस्व कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और कर्मचारियों की मदद से गिरे पेड़ों को कटवाकर सड़क से हटवाया। इसके बाद यातायात बहाल कराया गया।
स्कूल की चहारदीवारी क्षतिग्रस्त, कार पर गिरा पेड़
आंधी-तूफान का असर सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों पर भी पड़ा। राजकीय अटल उत्कृष्ट विद्यालय के पास सड़क किनारे खड़ी एक कार पर यूकेलिप्टस का पेड़ गिर गया, जिससे कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। वहीं, ग्राम गोपाल नगर स्थित आश्रम पद्धति विद्यालय में पेड़ गिरने से चहारदीवारी को नुकसान पहुंचा।
राहत की बात यह रही कि तूफान के समय विद्यालय के बच्चे कक्षाओं के अंदर थे। पेड़ दूसरी दिशा में गिरने से बड़ा हादसा टल गया। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सलविंदर सिंह कलसी भी सूचना मिलने पर किसानों के साथ प्रभावित खेतों में पहुंचे।
अब राहत और मुआवजे पर टिकी किसानों की निगाहें
ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी क्षतिग्रस्त फसल का वास्तविक आकलन कब होगा और मुआवजा कितनी जल्दी मिलेगा। किसानों को राहत देने के लिए जरूरी है कि राजस्व और कृषि विभाग संयुक्त रूप से प्रभावित खेतों का सर्वेक्षण करें, नुकसान का पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करें और पात्र किसानों तक सहायता समय पर पहुंचाएं।
प्रशासन के सामने एक ओर सड़कों पर गिरे पेड़ों और क्षतिग्रस्त बिजली ढांचे को दुरुस्त करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर किसानों के नुकसान का आकलन कर उन्हें राहत दिलाने की जिम्मेदारी भी है। सरकारी विद्यालयों में फर्नीचर की कमी और अल्मोड़ा में डिजिटल निजता से जुड़ा मामला भी यह याद दिलाते हैं कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर घोषणाओं के साथ प्रभावी कार्रवाई और जवाबदेही आवश्यक है।
फिलहाल, तराई के किसान आसमान साफ होने और खेतों में हुए नुकसान का सही आकलन होने का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासनिक सर्वेक्षण कितनी तेजी से पूरा होता है और प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए किए गए आश्वासन जमीन पर कब उतरते हैं।
