देसी, पहाड़ी और बंगाली समाज के उजड़े रोजगार पर रुद्रपुर के विधायक शिव अरोड़ा और महापौर विकास शर्मा जवाब दें—क्या कानून का बुलडोजर गरीबों के लिए ही है?
रुद्रपुर। हिंदू हितों की राजनीति करने वाले जनप्रतिनिधियों के सामने आज सबसे बड़ा सवाल उन परिवारों की रोजी-रोटी का है, जिनके घरों और दुकानों पर बुलडोजर चलने से उनके भविष्य पर संकट खड़ा होने का आरोप है। रुद्रपुर में देसी, पहाड़ी और बंगाली समाज के परिवारों की दुकानों पर कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों ने विधायक शिव अरोड़ा और महापौर विकास शर्मा की जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है।
आरोप है कि कार्रवाई की मार छोटे दुकानदारों और आम परिवारों पर पड़ी, जबकि जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों से जुड़े प्रतिष्ठानों पर वैसी कार्रवाई नहीं दिखाई दी। यदि यह आरोप सही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि किन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हुई, किन्हें नोटिस दिए गए और सभी मामलों में एक समान कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं।
क्या हिंदू हितों की राजनीति करने वाले जनप्रतिनिधियों से यह पूछना गलत है कि गरीब हिंदू परिवारों की दुकानों और घरों पर बुलडोजर चलने के समय उनकी आवाज कहां थी?
विधायक शिव अरोड़ा और महापौर विकास शर्मा को सामने आकर बताना चाहिए कि प्रभावित परिवारों के रोजगार, पुनर्वास और आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए क्या प्रयास किए गए। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यदि कार्रवाई कानूनी थी, तो उसका आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
देसी, पहाड़ी और बंगाली समाज के लोग भी इसी शहर के नागरिक हैं। उनकी आजीविका और सम्मान की रक्षा करना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। कानून का पालन जरूरी है, लेकिन कानून का समान रूप से पालन उससे भी अधिक जरूरी है।
जनता का सवाल साफ है—हिंदू हितों के नाम पर वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधि क्या गरीब हिंदू दुकानदारों के हितों की रक्षा करेंगे, या जनता को केवल चुनाव के समय याद करेंगे?
हिंदुओं के घर-दुकानों पर बुलडोजर, रिश्तेदारों के प्रतिष्ठानों पर खामोशी! शिव अरोड़ा और विकास शर्मा से सवाल
