राहुल गांधी की राजनीति में भागते गांधी! सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, विचारधारा पर उठे सवालगांधी के नाम पर कांग्रेस की राजनीति, सोशल मीडिया पर भागते गांधी की तस्वीरों से सियासी व्यंग्य तेज!

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स |अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड देश-विदेश की खबर
राहुल गांधी की राजनीति में भागते गांधी! सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, विचारधारा पर उठे सवाल
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आंदोलन और चुनाव आयोग को लेकर दिए गए बयानों के बीच सोशल मीडिया पर गांधी जी के भागते हुए दिखाए जा रहे एक दृश्य को लेकर व्यंग्यात्मक चर्चाएं हो रही हैं। इस दृश्य को लेकर राजनीतिक समर्थक और विरोधी अपने-अपने अंदाज में टिप्पणी कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने दावा किया कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और उन्हें जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को पुलिसकर्मियों का समर्थन मिल रहा है। ये राहुल गांधी के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

आखिर किस गति से भाग रहे हैं आधुनिक गांधी?सोशल मीडिया पर गांधी जी के भागते हुए दृश्य को लेकर एक अलग ही राजनीतिक व्यंग्य देखने को मिल रहा है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि गांधीवादी विचारधारा का आज की राजनीति में कितना प्रभाव बचा है और क्या महात्मा गांधी के अहिंसा, सत्य और संवाद के सिद्धांत राजनीतिक संघर्षों में पर्याप्त जगह पा रहे हैं?
निशाने पर यह सवाल भी है कि गांधी के नाम पर राजनीति करने वाले दलों और गांधीवादी मूल्यों के बीच आज कितनी समानता रह गई है। कुछ आलोचक मौजूदा राजनीतिक माहौल को नाथूराम गोडसे की विचारधारा से जोड़कर टिप्पणी कर रहे हैं, जबकि इस पर राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों के विचार अलग-अलग हैं।
जंतर-मंतर से सुप्रीम कोर्ट तक: संघर्ष या सियासी संदेश?राहुल गांधी के आंदोलन को कांग्रेस चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बता रही है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल दृश्य और उस पर बन रहे व्यंग्य ने राजनीतिक विमर्श को एक नया मोड़ दिया है।

जंतर-मंतर से सुप्रीम कोर्ट तक: संघर्ष या सियासी संदेश?राहुल गांधी के आंदोलन को कांग्रेस चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बता रही है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल दृश्य और उस पर बन रहे व्यंग्य ने राजनीतिक विमर्श को एक नया मोड़ दिया है।
अब सवाल यह है कि कथित वोट चोरी के आरोपों पर आगे क्या तथ्य सामने आते हैं और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का संस्थागत स्तर पर क्या जवाब मिलता है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर

सोशल मीडिया पर इन दिनों गांधी जी के भागते हुए दृश्य को लेकर खूब व्यंग्य हो रहा है। व्यंग्यकारों की चुटकी है कि जो लोग महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को आदर्श बताने वालों की विचारधारा से सहानुभूति रखते हैं, वे गांधी के नाम से जुड़े राजनीतिक प्रतीकों को सड़क पर दौड़ते देखकर गदगद हो रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों से इतनी बेचैनी क्यों? राजनीति में गांधी का नाम सबको चाहिए, लेकिन गांधीवादी विचारों पर चलने की बारी आए तो कदम पीछे क्यों हट जाते हैं?