राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली में ये प्रदर्शन विरोध जारी रखने के संकल्प से चल रहा है. आज हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं, कल कुछ और होगा.’
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर
राष्ट्रीय राजधानी में कथित चुनावी अनियमितताओं और विरोध प्रदर्शनों पर लगी पाबंदियों को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन के बीच बोलते हुए गांधी ने कहा कि इन प्रदर्शनों को अलग-अलग आंदोलन नहीं मानना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान की रक्षा के लिए खड़े होने वाले किसी भी व्यक्ति को विपक्ष का समर्थन मिलेगा.
राहुल ने कहा, “यह तांडव है, यह शिव का नृत्य है, इसमें कोई प्लानिंग नहीं होती,” उन्होंने प्रदर्शनों को एक ऐसे आंदोलन के रूप में बताया जो पहले से तय रणनीति के बजाय खुद-ब-खुद विकसित हो रहा है. यह विरोध है.
उन्होंने आगे कहा कि आंदोलन की कोई तय योजना नहीं है. यह अलग-अलग रूप लेता रहेगा. “आज हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं, कल कुछ और होगा,”
गांधी के ये बयान तब आए हैं जब विपक्ष कथित “वोट चोरी”, मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार को लेकर अपना विरोध तेज कर रहा है. कांग्रेस नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को दी जा रही सुरक्षा पर भी सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि प्रदर्शनकारियों पर पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं, जबकि सीईसी सुरक्षित हैं.
‘मेरी बहन ने कहा कि हमें प्रदर्शन की योजना बनानी चाहिए’
यह समझाते हुए कि वे आंदोलन को पारंपरिक तरीके से योजनाबद्ध क्यों नहीं मानते, गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी से हुई बातचीत का जिक्र किया. वे बोले, “मेरी बहन ने कहा कि हमें प्रदर्शन की योजना बनानी चाहिए, लेकिन मैंने कहा ‘तुम समझ नहीं रही हो’,”
गांधी ने तर्क दिया कि यह आंदोलन किसी एक प्रदर्शन को पहले से तय नतीजे के साथ आयोजित करने का मामला नहीं है. इसके बजाय यह एक निरंतर प्रयास है, जिसमें अगला कदम परिस्थितियों से निकलेगा. “आइडिया है दृढ़ता का, बस वही करना है,” फोकस संघर्ष जारी रखने पर है, न कि किसी तय प्रदर्शन रणनीति पर.
उन्होंने आकाशवाणी भवन विरोध प्रदर्शन की घटना का हवाला देते हुए पूछा कि क्या किसी प्रदर्शन के प्रभाव को इस बात से मापा जा सकता है कि वह कितनी सावधानी से योजनाबद्ध था. “आप सोचते हैं कि हमने आकाशवाणी भवन की योजना बनाई थी? योजना थी बस में बैठकर गिरफ्तार होना. लेकिन नतीजा कहां से आया? प्लान से या नॉन-प्लान से?” गांधी ने कहा.
‘शिव जी की बारात में कोई भी शामिल हो सकता है’
दिल्ली विरोध प्रदर्शनों को भगवान शिव की बारात से जोड़ते हुए गांधी ने कहा कि यह आंदोलन किसी भी व्यक्ति के लिए खुला है जो इसमें शामिल होना चाहे. “यह शिव जी का नृत्य चल रहा है, शिव जी की बारात में कोई भी आ सकता है, हम उन्हें नहीं रोकेंगे,” उन्होंने कहा.
कांग्रेस नेता ने इस विचार को भी खारिज किया कि प्रदर्शनों को प्रतिस्पर्धी या समानांतर आंदोलन के रूप में देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकारों को लेकर चिंता जताने वाले लोग और समूह एक ही बड़े आंदोलन का हिस्सा हैं.
अलग-अलग जगहों पर हो रहे अलग-अलग प्रदर्शनों को एक बताते हुए राहुल ने कहा, “सभी प्रदर्शन एक ही प्रदर्शन हैं, कोई समानांतर प्रदर्शन नहीं हैं. हमें परवाह नहीं कि आप कौन हैं, अगर आप संविधान की रक्षा कर रहे हैं तो हम आपका समर्थन करेंगे, आपकी रक्षा करेंगे और आपसे भी यही उम्मीद करेंगे,”
गांधी ने आगे तर्क दिया कि भारत में विरोध जरूरी नहीं कि विस्तृत योजना से हो, बल्कि गलत माने जाने वाले काम का विरोध करने की गहरी भावना से होता है. “हिंदुस्तान प्लान के साथ रेसिस्ट नहीं करता, दिल से रेसिस्ट करता है, और यह जारी रहेगा,”
