गुटखा बंद करके नशामुक्त उत्तराखंड बनेगा या शराब की भट्टियों पर भी लगेगा ताला? धामी सरकार से सीधा सवाल! तंबाकू-निकोटीन पर प्रतिबंध का स्वागत, लेकिन शराब की दुकानों, गली-मोहल्लों में नशे के कारोबार और युवाओं में बढ़ती लत पर सरकार कब करेगी निर्णायक कार्रवाई?



रुद्रपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा-पान मसाला जैसे उत्पादों पर प्रतिबंध की अवधि बढ़ाकर नशे के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस फैसले की सराहना होनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल गुटखा-तंबाकू पर प्रतिबंध लगाने से उत्तराखंड

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर

नशामुक्त बन जाएगा?
रुद्रपुर की शराब भट्टी के बाहर का नजारा सरकार की नशामुक्ति संबंधी घोषणाओं पर कई सवाल खड़े करता है। एक तरफ नशे से दूर रहने की अपील की जाती है, दूसरी तरफ शराब की दुकानों पर आकर्षक फ्लेक्स लगाकर कारोबार चलता दिखाई देता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकार युवाओं को नशे से बचाना चाहती है या शराब से मिलने वाले राजस्व को भी सुरक्षित रखना चाहती है?
आखिर शराब की दुकानों, आवासीय इलाकों में खुले ठेकों और बीयर बार के संचालन पर सरकार की नीति क्या है? क्या स्कूल-कॉलेजों के आसपास नशे की उपलब्धता रोकने के लिए प्रभावी निगरानी हो रही है? रुद्रपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कथित कच्ची शराब और अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार पर पुलिस तथा संबंधित विभाग कितने प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर रहे हैं? इन सवालों का जवाब जनता चाहती है।
हेरोइन, चरस और गांजे जैसे मादक पदार्थों की अवैध बिक्री पर कठोर कार्रवाई जरूरी है। हालांकि, किसी भी अधिकारी, पुलिसकर्मी या राजनीतिक दल की मिलीभगत का आरोप ठोस प्रमाणों के आधार पर ही लगाया जाना चाहिए।
देहरादून सहित विभिन्न शहरों में विद्यार्थियों के बीच नशे की समस्या को भी गंभीरता से लेने की जरूरत है। युवाओं का भविष्य बचाने के लिए केवल प्रतिबंध नहीं, बल्कि नियमित जांच, नशामुक्ति केंद्र, जागरूकता और अवैध कारोबारियों पर निर्णायक कार्रवाई आवश्यक है।
मुख्यमंत्री धामी ने पंजाब में नशामुक्ति की बात रखी थी। अब जनता का सवाल है कि दूसरे प्रदेशों को नशामुक्ति का संदेश देने वाली सरकार अपने उत्तराखंड को नशे से बचाने के लिए कितनी सख्ती दिखाएगी?
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। क्या नशामुक्त उत्तराखंड का संकल्प जमीन पर उतरेगा या गुटखा प्रतिबंध जैसी घोषणाओं तक ही सीमित रहेगा?
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर