उत्तराखंड रुद्रपुर /उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक कल्याण, ग्रामीण विकास और व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने पंजीकृत मदरसों में आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वहीं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को निश्शुल्क कोचिंग का लाभ देने के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा दो लाख से बढ़ाकर आठ लाख रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। दिव्यांग विद्यार्थियों को परीक्षा में राहत देने और जीएसटी के प्रावधानों में संशोधन के माध्यम से कारोबारियों को सहूलियत देने से जुड़े निर्णय भी चर्चा में रहे।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
कैबिनेट की बैठक में कुल 26 बिंदुओं पर निर्णय लिए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में लगभग 7,400 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट को भी स्वीकृति दी गई है। हालांकि, विधानसभा सत्र आहूत होने के कारण बैठक के सभी निर्णयों की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। ऐसे में कुछ प्रस्तावों के विस्तृत क्रियान्वयन और विधायी प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेशों से होना बाकी है।
मदरसों में आधुनिक शिक्षा के साथ दीनी तालीम, प्रेम और भाईचारे पर जोर
उत्तराखंड सरकार ने पंजीकृत मदरसों की शिक्षा व्यवस्था के मानक नए सिरे से निर्धारित करने की दिशा में कदम उठाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 20 जून 2026 को मदरसा बोर्ड समाप्त करने के बाद सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया। अब इसी प्राधिकरण के माध्यम से मदरसों में शिक्षा व्यवस्था को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करने की व्यवस्था की जा रही है।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने पंजीकृत मदरसों में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के साथ इस्लामिक धार्मिक शिक्षा देने के लिए भी पाठ्यक्रम निर्धारित किया है। दोपहर बाद दीनी तालीम देने का प्रावधान ऐच्छिक रखा गया है। इसका अर्थ है कि धार्मिक शिक्षा के लिए निर्धारित व्यवस्था का पालन करते हुए आधुनिक और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा को भी महत्व दिया जाएगा।
नए धार्मिक पाठ्यक्रम में प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द पर जोर दिया गया है। नफरत, हिंसा और कट्टरता को बढ़ावा देने वाली सामग्री को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी और परस्पर सम्मान की भावना विकसित करना बताया जा रहा है।
समाज सुधार के नजरिये से इस कदम का महत्व इस बात में है कि शिक्षा व्यवस्था में आधुनिक विषयों और धार्मिक अध्ययन के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन, शिक्षकों की उपलब्धता और विद्यार्थियों को मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता के आधार पर ही किया जा सकेगा।
एससी-एसटी विद्यार्थियों को निश्शुल्क कोचिंग के लिए आय सीमा में राहत
धामी मंत्रिमंडल ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए संचालित निश्शुल्क कोचिंग योजना में आय सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत परिवार की वार्षिक आय सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर आठ लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया है।
इस बदलाव से उन विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है, जो पहले निर्धारित आय सीमा से बाहर होने के कारण सहायता प्राप्त नहीं कर पाते थे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कोचिंग, अध्ययन सामग्री और अन्य संसाधनों पर होने वाले खर्च को देखते हुए आय सीमा में वृद्धि पात्र परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
यह निर्णय सामाजिक और शैक्षिक अवसरों तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, योजना के तहत पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और लाभ मिलने की शर्तें संबंधित शासनादेश के अनुसार लागू होंगी।
दिव्यांग विद्यार्थियों को परीक्षा में पांच प्रतिशत अंकों की छूट
कैबिनेट ने दिव्यांगजनों को राहत देने के उद्देश्य से राज्य परिषदीय परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने के लिए पांच प्रतिशत अंकों की शिथिलता देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बौद्धिक अक्षमता, मानसिक बीमारी, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, सेरेब्रल पाल्सी और स्पेशल लर्निंग डिसेबिलिटी से प्रभावित विद्यार्थियों को इस व्यवस्था के दायरे में रखा गया है।
बताया गया है कि संबंधित श्रेणियों के पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को 28 प्रतिशत अंक प्राप्त होने पर उत्तीर्ण घोषित करने का प्रावधान किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की विशिष्ट शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए परीक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाना है। इस निर्णय के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित नियमों और पात्रता संबंधी निर्देशों का पालन आवश्यक होगा।
ग्रामीण सड़कों से लेकर पर्यटन और खिलाड़ियों तक कई फैसले
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़क संपर्क से छूटे गांवों तक सड़क पहुंचाने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपने का निर्णय भी किया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त सड़क एवं सेतु निर्माण की स्वीकृति प्रक्रिया सरल बनाने, पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों को निगम की बसों में निश्शुल्क यात्रा की सुविधा देने और उत्तराखंड एडवेंचर टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड के गठन से जुड़े निर्णय भी सामने आए हैं।
प्रदेश के 13 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के पुनर्गठन, समान नागरिक संहिता की नियमावली में संशोधन के तहत नाम बदलने का अवसर देने और लंबित स्टांप वादों के निस्तारण के लिए एकमुश्त समाधान योजना लाने से संबंधित प्रस्ताव भी बैठक के प्रमुख बिंदुओं में शामिल बताए गए हैं।
जीएसटी संशोधनों से कारोबारियों को राहत देने की तैयारी
व्यापार जगत के लिए भी राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में किए गए तीन संशोधनों को विधेयक के रूप में विधानसभा में प्रस्तुत करने का रास्ता साफ किया है।
वित्त विभाग के राज्य कर विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जीएसटी अधिनियम में किए गए बदलावों के अनुरूप राज्य के कानून में संशोधन किए गए थे। इसके लिए तीन सितंबर 2026 को उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 जारी किया गया था। अब इसे विधेयक के रूप में विधानसभा में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
पहला प्रमुख बदलाव बिक्री के बाद दी जाने वाली छूट से संबंधित है। जीएसटी अधिनियम की धारा 15 में संशोधन के तहत निर्धारित शर्तों के अधीन आपूर्तिकर्ता क्रेडिट नोट जारी कर छूट का लाभ दे सकेगा। पहले इसके लिए आपूर्ति से पहले या उसी समय किए गए समझौते से जुड़ी शर्तें लागू थीं। संशोधन के तहत संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट को प्राप्तकर्ता द्वारा नियमानुसार वापस करने की शर्त भी महत्वपूर्ण रहेगी।
दूसरा बदलाव धारा 34 के अंतर्गत क्रेडिट और डेबिट नोट जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ा है। इसका उद्देश्य बिक्री के बाद दी जाने वाली छूट और क्रेडिट नोट की व्यवस्था के बीच कानूनी तालमेल स्थापित करना है, ताकि निर्धारित नियमों के अनुसार कर संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।
तीसरा बदलाव धारा 54 के अंतर्गत रिफंड से संबंधित है। उलटी कर संरचना की स्थिति में कच्चे माल पर जीएसटी की दर तैयार उत्पाद की तुलना में अधिक होने से कारोबारियों का इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा हो सकता है। संशोधन के तहत पात्र दावों पर अनंतिम रिफंड की सुविधा का विस्तार किया गया है। निर्धारित शर्तें पूरी होने पर पात्र कारोबारियों को रिफंड का 90 प्रतिशत तक अग्रिम भुगतान मिलने की सुविधा मिल सकती है। इससे कारोबार में फंसी पूंजी का दबाव कम करने में मदद मिलने की संभावना है।
शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर एक साथ ध्यान
उत्तराखंड मंत्रिमंडल के इन निर्णयों में शिक्षा व्यवस्था के नियमन, वंचित विद्यार्थियों को सहायता, दिव्यांगजनों के लिए परीक्षा संबंधी राहत, ग्रामीण संपर्क मार्गों के विस्तार और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे अलग-अलग क्षेत्र शामिल हैं।
मदरसों के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम का प्रभाव शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक सद्भाव के स्तर पर परखा जाएगा। कोचिंग योजना की बढ़ी आय सीमा से वास्तविक लाभ कितने विद्यार्थियों तक पहुंचता है, यह क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। वहीं, जीएसटी संशोधनों को विधायी मंजूरी मिलने के बाद कारोबारियों को मिलने वाली राहत की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
कुल मिलाकर, सरकार के सामने इन फैसलों को प्रभावी ढंग से लागू करने, पारदर्शिता बनाए रखने और पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाने की चुनौती रहेगी। इन निर्णयों की वास्तविक सफलता का आकलन सरकारी आदेशों, बजट के उपयोग और जमीनी परिणामों के आधार पर किया जाएगा।
