हिंदू वोटों से सत्ता, अल्पसंख्यक शिक्षा के लिए भी सक्रिय धामी सरकार! उत्तराखंड में मदरसों की समस्याएं सुलझाने की पहल

हिंदू वोटों से सत्ता, अल्पसंख्यक शिक्षा के लिए भी सक्रिय धामी सरकार! उत्तराखंड में मदरसों की समस्याएं सुलझाने की पहल

रुद्रपुर। उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार का एक ऐसा पहलू सामने आया है, जो सामाजिक समावेश और अल्पसंख्यक शिक्षा के सवाल पर चर्चा का विषय बन सकता है। भाजपा की सरकार को हिंदू मतदाताओं का व्यापक समर्थन मिलने के बीच राज्य सरकार का अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों और मदरसों की समस्याओं के समाधान के लिए बैठक आयोजित करना इस बात का संकेत है कि शासन की जिम्मेदारी सभी वर्गों तक पहुंचनी चाहिए।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, देहरादून की ओर से जारी 15 अक्टूबर 2026 के पत्र के अनुसार, प्राधिकरण के अध्यक्ष 23 अक्टूबर को ऊधमसिंह नगर जिले के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान मदरसों और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधकों के साथ बैठकें कर उनकी विभिन्न समस्याओं और प्रकरणों के समाधान पर चर्चा की जाएगी।

जसपुर, केलाखेड़ा और रुद्रपुर में बैठकें

प्राधिकरण के पत्र में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पहली बैठक सुबह 10 बजे के.बी.एम. स्कूल, जसपुर में प्रस्तावित है। दूसरी बैठक दोपहर 12 बजे के.बी.एन. स्कूल, केलाखेड़ा, गदरपुर में होगी। इसके बाद दोपहर 3 बजे रुद्रपुर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय के सभागार में बैठक निर्धारित की गई है।

जिलाधिकारी, ऊधमसिंह नगर को पत्र भेजकर इन बैठकों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया गया है।

अल्पसंख्यक शिक्षा पर सरकार की पहल

इस कार्यक्रम का उद्देश्य मदरसों और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विभिन्न मामलों को सुनना और उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। शिक्षा से जुड़े संस्थानों की समस्याओं का निराकरण प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में प्राधिकरण की यह पहल संबंधित संस्थानों के प्रबंधकों को अपनी बात सीधे रखने का अवसर प्रदान कर सकती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह पहल इस संदेश को मजबूत करने का अवसर भी है कि सरकारी योजनाओं, शिक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं का लाभ किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षा का सवाल

लोकतंत्र में सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों को अलग-अलग वर्गों से समर्थन मिलता है, लेकिन सरकार चलाने की जिम्मेदारी पूरे समाज के प्रति होती है। भाजपा को समर्थन देने वाले हिंदू मतदाताओं की अपेक्षाएं अपनी जगह हैं, वहीं अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा और संस्थागत समस्याओं का समाधान भी प्रशासनिक दायित्व का हिस्सा है।

इस पहल को इसी दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। हालांकि, बैठक आयोजित होने और वास्तविक समस्याओं का समाधान होने के बीच अंतर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के प्रबंधक किन मुद्दों को उठाते हैं और संबंधित विभाग उन पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं।