रुद्रपुर में बिल्डर प्रिया शर्मा और सुधीर चावला पर एक और FIR, 35.14 लाख की जमीन का कब्जा नहीं मिलने का आरोप
एनएच-74 भूमि मुआवजा प्रकरण से लेकर जमीन के पुराने विवादों तक चर्चा में रहा नाम, रेरा के आदेशों के बावजूद कब्जा नहीं मिलने का दावा; पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
रुद्रपुर। जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े विवाद में बिल्डर प्रिया शर्मा और सुधीर चावला के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। हेल्पिंग हैंड न्यूज की 28 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, हल्द्वानी निवासी गुरमीत सिंह की शिकायत पर रुद्रपुर कोतवाली में एफआईआर संख्या 0574/2026 दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि 35.14 लाख रुपये में जमीन खरीदने और रजिस्ट्री कराने के बावजूद उन्हें भूखंड का कब्जा नहीं मिला। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2) और 318(4) का उल्लेख किया गया है। जांच उपनिरीक्षक महेश कांडपाल को सौंपी गई बताई गई है।
35.14 लाख का भुगतान, फिर भी जमीन पर कब्जा नहीं
प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, गुरमीत सिंह ने 7 अक्टूबर 2017 को ग्राम कोलड़ा, तहसील रुद्रपुर में खसरा संख्या 226/मि०/3 के अंतर्गत 9,122.5 वर्ग फीट भूखंड 35,14,000 रुपये में खरीदा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि भुगतान आरटीजीएस और चेक के माध्यम से किया गया। रजिस्ट्री के दौरान 1,76,000 रुपये स्टाम्प शुल्क और 25,200 रुपये पंजीकरण शुल्क भी जमा किए गए।
आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के बावजूद उन्हें जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिला। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा), देहरादून का भी रुख किया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रेरा ने 6 जुलाई 2023 को कब्जा सौंपने का आदेश दिया था। इसके बाद अपीलीय अधिकरण में अपील खारिज होने और फरवरी 2026 में निष्पादन आदेश जारी होने का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद विवाद समाप्त नहीं हुआ। संबंधित आदेशों की प्रमाणित प्रतियों से इन तथ्यों की पुष्टि होना जरूरी है।
एनएच-74 भूमि मुआवजा प्रकरण में भी आया था नाम
प्रिया शर्मा का नाम पहले भी ऊधम सिंह नगर के चर्चित एनएच-74 भूमि मुआवजा प्रकरण में सामने आया था। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कृषि भूमि को अकृषि दर्शाकर कथित रूप से अधिक मुआवजा प्राप्त करने के आरोपों की जांच हुई थी। रिपोर्ट में उनकी गिरफ्तारी, जेल में रहने और बाद में जमानत मिलने का उल्लेख भी है।
इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में जमीन से संबंधित कथित फर्जी दस्तावेजों और अन्य विवादों का जिक्र किया गया है। हालांकि, इन मामलों की वर्तमान स्थिति, आरोपपत्र और न्यायालयों के अंतिम निर्णयों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। किसी मामले में गिरफ्तारी या जमानत को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
आलीशान कार्यालय और संपत्ति को लेकर भी उठे सवाल
प्रकाशित रिपोर्ट में रुद्रपुर के गाबा चौक स्थित कार्यालय, महंगी गाड़ियों और कथित बड़ी संपत्ति के स्रोत को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, संपत्ति के वास्तविक मूल्य, स्वामित्व और आय के स्रोत की पुष्टि के लिए आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड आवश्यक हैं। केवल महंगी गाड़ियों या आलीशान कार्यालय के आधार पर अवैध संपत्ति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
पुलिस जांच में सामने आएंगे अहम तथ्य
इस मामले में अब जमीन की रजिस्ट्री, भुगतान के बैंक रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख, रेरा के आदेश और भूखंड पर कथित निर्माण से जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, नामजद पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
बड़ा सवाल यह है कि रजिस्ट्री और भुगतान के बाद भी खरीदार को जमीन का कब्जा क्यों नहीं मिला? क्या संबंधित आदेशों का पालन हुआ और भूखंड पर कथित निर्माण किस आधार पर कराया गया? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और प्रमाणित दस्तावेजों से ही सामने आएगा।
फिलहाल, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच का विषय है। संबंधित पक्षों का जवाब मिलने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
रुद्रपुर में बिल्डर प्रिया शर्मा और सुधीर चावला पर एक और FIR, 35.14 लाख की जमीन का कब्जा नहीं मिलने का आरोपएनएच-74 भूमि मुआवजा प्रकरण से लेकर जमीन के पुराने विवादों तक चर्चा में रहा नाम, रेरा के आदेशों के बावजूद कब्जा नहीं मिलने का दावा; पुलिस जांच पर टिकी निगाहें अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
