फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट पर STF का बड़ा शिकंजा: काशीपुर के कारोबारी समेत दो गिरफ्तार, अवैध हथियार और नकली लाइसेंस बरामद! कई बड़े नाम जांच के घेरे में

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रुद्रपुर/काशीपुर। उत्तराखंड में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री के “अपराध मुक्त उत्तराखंड” अभियान के अंतर्गत चल रही कार्रवाई में एसटीएफ ने काशीपुर के एक कारोबारी सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से तीन अवैध हथियार, आठ जिंदा कारतूस, दो फर्जी शस्त्र लाइसेंस और एक कार की चाबी बरामद की गई है। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश में सक्रिय फर्जी शस्त्र लाइसेंस नेटवर्क को लेकर कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं और कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड


फर्जी लाइसेंसों के खिलाफ चल रहा है विशेष अभियान
उत्तराखंड पुलिस और एसटीएफ पिछले कुछ समय से बाहरी राज्यों से उत्तराखंड में ट्रांसफर किए गए शस्त्र लाइसेंसों की गहन जांच कर रही है। जांच के दौरान कई ऐसे लाइसेंस सामने आए जिनकी वैधता और जारी होने की प्रक्रिया संदिग्ध पाई गई। इसके बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर राज्यभर में व्यापक अभियान शुरू किया गया।
एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस केवल कानून का उल्लंघन नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। ऐसे लाइसेंसों के जरिए अवैध हथियार रखने वाले लोग आसानी से कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश करते हैं, जिससे अपराध को बढ़ावा मिलता है।
चार जून को दर्ज हुआ था मुकदमा
इस पूरे मामले की शुरुआत चार जून को हुई, जब काशीपुर कोतवाली में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के संबंध में एक मुकदमा दर्ज कराया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि कुछ लोगों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों और गलत जानकारियों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त किए हैं या उन्हें दूसरे राज्यों से स्थानांतरित कराया है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद एसटीएफ ने मामले की गहन जांच शुरू की और संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाने लगी। तकनीकी और सर्विलांस टीमों को भी जांच में लगाया गया ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
10 जून की कार्रवाई से खुली परतें
जांच के दौरान 10 जून की रात एसटीएफ और ऊधम सिंह नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने काशीपुर क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई की थी। टीम ने एक स्विफ्ट कार से चार अवैध हथियार और 237 जिंदा कारतूस बरामद किए थे।
जांच में सामने आया कि बरामद हथियार और दस्तावेज काशीपुर निवासी सौरभ अग्रवाल, गौरव अग्रवाल और दीप्ति अग्रवाल से जुड़े हुए हैं। इसके बाद एसटीएफ ने इन व्यक्तियों की तलाश तेज कर दी। कई टीमों को अलग-अलग स्थानों पर रवाना किया गया और संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार 10 जून की बरामदगी ने इस पूरे रैकेट की गंभीरता को उजागर कर दिया था। बड़ी संख्या में कारतूस और हथियार मिलने से यह स्पष्ट हो गया कि मामला केवल फर्जी लाइसेंसों तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध हथियारों के नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है।
गुप्त सूचना पर हुई गिरफ्तारी
एसटीएफ को बुधवार देर रात सूचना मिली कि दो व्यक्ति भारी मात्रा में अवैध हथियारों के साथ रुद्रपुर क्षेत्र में मौजूद हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई की।
टीम ने रोडवेज बस स्टेशन के समीप घेराबंदी कर दो संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ और तलाशी के दौरान उनकी पहचान काशीपुर निवासी कारोबारी सौरभ अग्रवाल और उसके चालक अमित पाल के रूप में हुई।
तलाशी के दौरान पुलिस ने उनके कब्जे से एक 12 बोर पम्प एक्शन गन, एक .30 बोर सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, एक .32 बोर ऑटोमैटिक पिस्टल, आठ जिंदा कारतूस और दो फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किए।
बरामद हथियारों और दस्तावेजों को कब्जे में लेकर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी।
साक्ष्य मिटाने की कोशिश का खुलासा
पूछताछ के दौरान एक और महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया। एसटीएफ के अनुसार 10 जून को काशीपुर में जिस स्विफ्ट कार से अवैध हथियार और कारतूस बरामद किए गए थे, उसे आरोपी अमित पाल ने पुलिस कार्रवाई के बाद एक पार्किंग स्थल में छिपाकर खड़ा कर दिया था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कदम साक्ष्यों को छिपाने और जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से उठाया गया था। हालांकि एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए आरोपी के कब्जे से कार की चाबी भी बरामद कर ली है और वाहन को जांच के दायरे में ले लिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि वाहन की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसमें और कौन-कौन से दस्तावेज या साक्ष्य मौजूद थे।
कई बड़े नाम जांच के घेरे में
एसटीएफ अधिकारियों का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। कुछ ऐसे लोगों के नाम भी सामने आए हैं जिन्होंने कथित रूप से फर्जी लाइसेंसों का इस्तेमाल किया या उन्हें बनवाने में भूमिका निभाई।
हालांकि जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने अभी किसी अन्य व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी लाइसेंसों का नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
अब तक की कार्रवाई में बड़ी सफलता
एसटीएफ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में अब तक महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है।
अब तक की प्रमुख उपलब्धियां
03 मुकदमे दर्ज
07 आरोपी गिरफ्तार
12 अवैध हथियार बरामद
315 जिंदा कारतूस बरामद
कई फर्जी शस्त्र लाइसेंस जब्त
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पुलिस लगातार इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है और अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी शस्त्र लाइसेंसों का नेटवर्क केवल प्रशासनिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे लाइसेंसों के माध्यम से आपराधिक तत्व वैधता का आवरण प्राप्त कर लेते हैं और हथियारों का दुरुपयोग करने की संभावना बढ़ जाती है।
यदि किसी व्यक्ति के पास फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार मौजूद है तो वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी से बच सकता है। यही कारण है कि केंद्र और राज्य सरकारें ऐसे मामलों को लेकर विशेष सतर्कता बरत रही हैं।
जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही पुलिस
एसएसपी एसटीएफ ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्य कर रही है। किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
उन्होंने कहा कि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की जा रही है। यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यभर में लाइसेंस सत्यापन अभियान आगे भी जारी रहेगा और संदिग्ध लाइसेंसों की विस्तृत जांच की जाएगी।
जनता से सहयोग की अपील
एसटीएफ ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। पुलिस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को किसी संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस, अवैध हथियार या ऐसे किसी नेटवर्क की जानकारी हो तो वह तत्काल पुलिस या एसटीएफ को सूचित करे।
अधिकारियों का मानना है कि जनता के सहयोग से ऐसे रैकेटों पर अधिक प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सकता है। सूचना देने वाले व्यक्तियों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
उत्तराखंड में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ एसटीएफ की यह कार्रवाई राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। काशीपुर के कारोबारी सौरभ अग्रवाल और उसके चालक अमित पाल की गिरफ्तारी ने यह संकेत दिया है कि जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के करीब हैं। बरामद अवैध हथियार, कारतूस और नकली लाइसेंस इस बात का प्रमाण हैं कि मामला गंभीर और व्यापक है।
आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है। फिलहाल उत्तराखंड पुलिस और एसटीएफ का अभियान लगातार जारी है और राज्य में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश स्पष्ट रूप से दिया जा रहा है।


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