रुद्रपुर। करवा चौथ के पावन अवसर पर वार्ड नंबर 14 स्थित पंजाबी कॉलोनी के पंजाबी मंदिर में महिलाओं ने विधि-विधान के साथ करवा माता की पूजा-अर्चना कर निर्जला व्रत रखा। इस अवसर पर पंजाबी समाज सहित विभिन्न समाजों की सैकड़ों सुहागिन महिलाओं ने भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना की।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
मंदिर में सर्वप्रथम भगवान गणेश की आराधना के साथ पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई। इसके बाद महिलाओं ने करवा माता के समक्ष पूजा कर परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत रखा। देर रात चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने और पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने अपना व्रत पूर्ण किया। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, उत्साह और पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने को मिली।
करवा चौथ से जुड़ी है पतिव्रता नारी की प्रेरणादायक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस व्रत से जुड़ी एक प्रचलित कथा में करवा नामक पतिव्रता स्त्री का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार, नदी पार करते समय मगरमच्छ उसके पति का पैर पकड़कर पानी में खींचने लगता है। पति को संकट में देखकर करवा अपने धागे से मगरमच्छ का मुंह बांध देती है और अपने पति के प्राण बचाने का प्रयास करती है। उसकी निष्ठा और साहस से प्रसन्न होकर यमराज मगरमच्छ को यमलोक भेज देते हैं और उसके पति को जीवनदान प्रदान करते हैं।
इसी प्रकार की धार्मिक कथाओं और मान्यताओं से प्रेरित होकर सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं। यह पर्व पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
पंजाबी महासभा की पदाधिकारी और महिलाएं रहीं उपस्थित
इस धार्मिक आयोजन में पंजाबी महासभा की कुमाऊं अध्यक्ष सोनिया सुनेजा, नगर अध्यक्ष आरती डाबर, महामंत्री पूजा बत्रा, कोषाध्यक्ष दीप्ति ग्रोवर, पूजा वाधवा, श्वेता राणा, सारिका बत्रा, पायल रावल, वंदना बत्रा, श्वेता डाबर, किरण मेहंदी रट्टा, उर्मिल बत्रा, चेतन डाबर, सुनीता डाबर, चेतन बत्रा, राखी छाबड़ा, मोनिका ढींगरा, आरती बत्रा, श्वेता बत्रा, रितु बत्रा, नीना बत्रा, अंजू बत्रा, डॉ. दामिनी अरोड़ा, पिंकी बिष्ट अरोड़ा, गुंजा बत्रा और अंजलि अरोड़ा सहित अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं।
पंजाबी मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम ने सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और भारतीय पारंपरिक संस्कृति के प्रति महिलाओं की प्रतिबद्धता को दर्शाया।
