रुद्रपुर,गांधी पार्क से मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में निकलेगी पदयात्रा, कांग्रेस के ‘वोट चोर’ अभियान का भाजपा देगी जवाब; 26 साल के उत्तराखंड में विकास, पलायन, रोजगार और जमीनों पर कब्जे का मुद्दा भी गरमाया
रुद्रपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंगलवार को रुद्रपुर में भारतीय जनता पार्टी की ओर से ‘लोकतंत्र बचाओ,
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
अराजकता हटाओ’ पदयात्रा निकाली जा रही है। श्री राम पार्क (गांधी पार्क) में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। मुख्यमंत्री के सड़क मार्ग से दोपहर करीब 12 बजे के बाद रुद्रपुर पहुंचने का कार्यक्रम है। उनके आगमन से पहले गांधी पार्क में तैयारियां चल रही हैं। विधायक शिव अरोड़ा, महापौर विकास शर्मा और भाजपा संगठन के पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में पदयात्रा निकाली जाएगी।
भाजपा इस पदयात्रा के माध्यम से कांग्रेस और INDIA गठबंधन के ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान का जवाब देने की तैयारी में है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जनता के बीच भ्रम फैला रहा है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतंत्र को मजबूत करने की संवैधानिक प्रक्रिया है।
हालांकि, इस पदयात्रा से पहले रुद्रपुर की स्थानीय समस्याओं को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल भाजपा के अपने नारे ‘अराजकता हटाओ’ को लेकर है। आखिर अराजकता की परिभाषा क्या है और क्या इसका आकलन केवल राजनीतिक विरोध के आधार पर किया जाएगा?
गरीब की दुकान पर बुलडोजर, बड़े कब्जों पर कार्रवाई कब?
रुद्रपुर रोडवेज के सामने वर्षों से रोजगार कर रहे छोटे दुकानदारों और व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई आज भी चर्चा का विषय है। सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन प्रभावित दुकानदारों के रोजगार और पुनर्वास की व्यवस्था भी सरकार की जवाबदेही है।
स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि जब गरीब और छोटे कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर बुलडोजर चलता है तो क्या वह अराजकता नहीं है? यदि सरकारी जमीनों पर बड़े स्तर पर कब्जे हुए हैं तो उन पर समान रूप से कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती?
रुद्रपुर और ऊधम सिंह नगर में सरकारी, नजूल तथा अन्य सार्वजनिक भूमि पर कथित कब्जों को लेकर हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति का मामला चर्चा में रहा है। स्थानीय स्तर पर इन कब्जों का अनुमान करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक बताया जाता है, हालांकि इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि और जमीनवार विवरण सामने आना बाकी है।
रिजॉर्ट, शोरूम और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के निर्माण तथा बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट के लिए जमीनों के इस्तेमाल को लेकर भी जांच की मांग उठ रही है। पंतनगर क्षेत्र में कथित अवैध प्लॉटिंग का मामला भी गंभीर जांच का विषय है। सवाल है कि प्रशासन इन मामलों में कितनी कार्रवाई कर रहा है और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कब तय होगी?
नौकरशाही और पूंजीपतियों के बीच आम आदमी की सुनवाई कहां?
औद्योगिक नगरी रुद्रपुर में हजारों परिवार छोटे व्यापार, मजदूरी और स्वरोजगार से जुड़े हैं। लोगों का सवाल है कि विकास की योजनाओं में आम आदमी की भागीदारी कितनी है? क्या प्रशासनिक व्यवस्था गरीब और प्रभावशाली लोगों के लिए समान है? क्या स्थानीय युवाओं को रोजगार और छोटे व्यापारियों को संरक्षण मिल रहा है?
सरकार पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि प्रशासनिक कार्रवाई का सबसे अधिक असर गरीब और छोटे कारोबारियों पर पड़ता है, जबकि बड़े भूमि कारोबारियों के मामलों में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होती। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और सरकारी जमीनों का सार्वजनिक ऑडिट कराने की मांग उठ रही है।
26 साल के उत्तराखंड का हिसाब भी मांगेगी जनता
9 नवंबर को उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस मनाया जाएगा। राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्य आंदोलन के मूल सपनों और वर्तमान परिस्थितियों की समीक्षा भी जरूरी है। अलग राज्य बनने के समय रोजगार, पलायन रोकने, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और स्थानीय युवाओं को अवसर देने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे।
आज भी पहाड़ के अनेक गांव पलायन की समस्या से जूझ रहे हैं। बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव गंभीर सवाल बने हुए हैं। मैदानी क्षेत्रों में अनियोजित शहरीकरण, जमीनों पर कब्जे, यातायात और प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
राज्य आंदोलनकारियों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, उसमें आम नागरिक को सम्मान, रोजगार और न्याय मिलना प्राथमिकता थी। इसलिए राज्य स्थापना दिवस से पहले सरकार से इन सवालों पर जवाब मांगना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधियों के सामने उठेंगे स्थानीय मुद्दे
पदयात्रा का निर्धारित मार्ग गांधी पार्क से बाटा चौक, भगत सिंह चौक, अग्रवाल धर्मशाला और काशीपुर बाईपास होते हुए वापस गांधी पार्क तक प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ विधायक शिव अरोड़ा, महापौर विकास शर्मा और भाजपा के अन्य नेता इसमें शामिल होंगे।
भाजपा जहां कांग्रेस के चुनाव आयोग और SIR संबंधी आरोपों का जवाब देने के लिए यह अभियान चला रही है, वहीं स्थानीय जनता की अपेक्षा है कि मुख्यमंत्री रुद्रपुर की जमीनों, अतिक्रमण, प्रभावित दुकानदारों, रोजगार और भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों पर भी स्पष्ट जवाब दें।
लोकतंत्र में विपक्ष को सवाल उठाने का अधिकार है और सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी है कि वह उन सवालों का जवाब दे। इसी तरह मतदाता सूची का शुद्धिकरण जरूरी है तो किसी पात्र नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
रुद्रपुर की इस पदयात्रा के बीच एक सवाल शहर की राजनीति और प्रशासन के सामने खड़ा है—यदि अराजकता हटानी है तो कार्रवाई का पैमाना सभी के लिए समान होना चाहिए। गरीब की दुकान हो या प्रभावशाली व्यक्ति का प्रतिष्ठान, कानून का पालन निष्पक्ष रूप से होना चाहिए। लोकतंत्र केवल नारों से नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों, रोजगार और न्याय की रक्षा से मजबूत होता है।
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