भगवान शिव और उनके अस्त्रों की महिमा पू राणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर-इन त्रिदेवों का सृष्टि के संचालन में अलग-अलग योगदान है। ब्रह्मा सृजन करते हैं, विष्णु पालन करते हैं, और शिव संहारक के रूप में जाने जाते हैं।

ऋषियों, मुनियों, देवताओं, असुरों और मनुष्यों द्वारा इन त्रिदेवों से वरदान प्राप्त करने की अनेक कथाएं प्राचीन ग्रंथों में मिलती हैं। शिव अपने उदार स्वभाव के लिए विशेष रूप से […]

देहरादून की हलचल से कुछ दूर, क्लेमेंट टाउन में स्थित है एक ऐसी जगह, जहाँ समय ठहर सा जाता है। यहाँ ना कोई राजनीतिक भाषण है, ना कोई भागमभाग। यहाँ सिर्फ है – मौन, मंत्र और ममता। हम बात कर रहे हैं माइंड रोलिंग मॉनेस्ट्री, जिसे आमजन बुद्ध मंदिर के नाम से जानते हैं। यह न केवल उत्तराखंड की आध्यात्मिक धरोहर है, बल्कि विश्व बौद्ध आस्था का एक जीवंत प्रतीक भी है। सन् 1959 के बाद जब तिब्बती धर्मगुरु और साधु भारत आए, तब उन्होंने अपनी परंपराओं को जीवित रखने के लिए देश के विभिन्न कोनों में बौद्ध मठों की स्थापना की। देहरादून का यह मंदिर 1965 में कोएन रिनपोछे और अन्य लामाओं द्वारा स्थापित किया गया। यह बौद्ध धर्म की न्योमा (Nyingma) परंपरा का मुख्य केंद्र है, जो महायान बौद्ध शाखा की सबसे पुरानी परंपरा मानी जाती है। बुद्ध मंदिर का मुख्य स्तूप, जिसकी ऊँचाई करीब 185 फुट है, पूरे भारत में सबसे ऊँचे स्तूपों में गिना जाता है। इसकी दीवारों पर उकेरे गए अष्टधातु चित्र, तिब्बती भित्तिचित्र (Murals), और सोने की परत से ढंकी बुद्ध प्रतिमा इसे नयनाभिराम बनाती है।पांच मंजिला इस संरचना में हर तल पर बुद्ध के जीवन, धर्मचक्र प्रवर्तन, और निर्वाण की कथाएं चित्रित की गई हैं। मंदिर परिसर में फैले बांस के झुरमुट, पुष्पवाटिका, और ध्यान स्थली मन को एक विलक्षण शांति प्रदान q यह मंदिर केवल एक पर्यटक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र है। यहां प्रतिदिन: ध्यान सत्र मंत्र जाप तिब्बती ग्रंथों का पठन बौद्ध दर्शन पर प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहां आने वाले साधु वर्षों तक रहकर “लुंग” (बौद्ध शास्त्रों का पाठ) और “रिगपा” (बोधि की स्थिति) की साधना करते हैं। — लोक आकर्षण: श्रद्धा और पर्यटन का मिलन बुद्ध मंदिर आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण है। मुख्य आकर्षण हैं: विशाल बुद्ध प्रतिमा और स्तूप रंग-बिरंगी प्रार्थना चक्र (Prayer Wheels) शांत उद्यान और कमल-ताल तिब्बती पुस्तकालय और ध्यान कक्ष परिसर में स्थित कैफे और हस्तशिल्प बाजार यहां हर वर्ष हजारों पर्यटक, साधक और विदेशी पर्यवेक्षक आते हैं। विशेष रूप से बुद्ध पूर्णिमा और तिब्बती नववर्ष (लोसर) पर हजारों श्रद्धालु यहां एकत्र होते हैं। शिक्षा और संस्कृति: परंपरा की पाठशाला मंदिर परिसर में स्थित Ngagyur Nyingma College में 300 से अधिक छात्र तिब्बती बौद्ध शास्त्रों, संस्कृत, ध्यान और तंत्र विद्या का अध्ययन करते हैं। यह कॉलेज तिब्बती संस्कृति के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। — देहरादून के लिए गौरव बुद्ध मंदिर ना केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यटन की दृष्टि से भी देहरादून की पहचान बन चुका है। क्लेमेंट टाउन के लोग इसे “शांति का द्वार” कहते हैं। जहाँ एक ओर देश के कोने-कोने में धार्मिक स्थलों की भीड़ और विवाद हैं, वहीं देहरादून का यह बुद्ध मंदिर हमें मौन में ध्यान, करुणा में शक्ति, और विनम्रता में क्रांति का संदेश देता है। यह स्थान हर उस व्यक्ति को आमंत्रण देता है जो जीवन की भीड़ में भीतर की शांति की तलाश में है।✍️ अवतार सिंह बिष्ट, संवाददाता,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी!

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के क्लेमेंट टाउन क्षेत्र में स्थित है। यह न केवल एक आकर्षक पर्यटन स्थल है, बल्कि आध्यात्मिक साधना और तिब्बती संस्कृति का भी प्रमुख केंद्र है। […]

संपादकीय लेख: “ग्राम स्वराज्य की दिशा में निर्णायक पड़ाव” त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 – लोकतंत्र की असली परीक्षा गांवों मेंआपका वोट, आपके गांव का भविष्य”!

उत्तराखंड में आज त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का प्रथम चरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को मजबूती देने वाला महाअभियान है। 49 विकासखंडों में फैले 5823 बूथों […]

संपादकीय लेख: उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में पंचायत चुनाव का ‘साड़ी-सूट-शराब’ समीकरण

उत्तराखंड के मैदानी जिलों—विशेषकर ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और आसपास के इलाकों में पंचायत चुनाव अब लोकतंत्र का त्योहार नहीं, एक खुला बाजार बन चुके हैं। जहाँ मतदाता अपनी नीयत […]

देहरादून में स्वाद का नया केंद्र बना “SWAD” – ग्राफिक एरा के छात्रों की पहली पसंद द्वारा स्मार्ट सिटी में SWAD रेस्टोरेंट की हकीकत: स्वाद से ज्यादा लाल मिर्च की मार अवतार सिंह बिष्ट, विशेष संपादकीय, हिन्दुस्तान ग्लोबल टाइम्स, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

आज की अपडेट खबर स्मार्ट सिटी में SWAD रेस्टोरेंट की हकीकत: स्वाद से ज्यादा लाल मिर्च की मार देहरादून: जहां एक ओर स्मार्ट सिटी की चमक बढ़ रही है, वहीं […]

संपादकीय लेखपंचायत चुनावों में पारदर्शिता और अनुशासन की मिसाल बनता उधमसिंहनगर प्रशासन

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लोकतंत्र की नींव माने जाते हैं। यह चुनाव न केवल ग्रामीण भारत की प्रशासनिक दिशा तय करते हैं, बल्कि आम नागरिक को सत्ता की प्रक्रिया में सीधा […]

ठुकराल की जनपथ पर वापसी — सुषमा के समर्थन में जनसैलाब ने बदली चुनावी फिज़ा!त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025, खानपुर पूर्व सीट विशेष विश्लेषण

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आखिरी चरण में रुद्रपुर की खानपुर पूर्व जिला पंचायत सीट पर जो सियासी तस्वीर उभरकर सामने आई है, उसने पूरे ऊधमसिंहनगर जिले की चुनावी राजनीति में […]

दिल्ली में उत्तराखंड क्रांति दल की अहम बैठक, त्रिस्तरीय चुनाव में विजयी उम्मीदवारों को सम्मानित करने की बनी रणनीति पंकज सिंह, खटीमा

नई दिल्ली। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) दिल्ली प्रदेश इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली स्थित अल्मोड़ा भवन में संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता आईटी प्रकोष्ठ अध्यक्ष पंकज सिंह (फूलैया गांव, खटीमा) […]

वार्ड 14 कुर्रैया व 16 प्रतापपुर में पंचायत चुनाव को लेकर जनसंपर्क अभियान तेज, पूर्व विधायक व महापौर भी कूदे मैदान में

रुद्रपुर/किच्छा। आगामी पंचायत चुनावों के मद्देनज़र वार्ड संख्या 14 कुर्रैया और 16 प्रतापपुर क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान को नई गति मिल रही है। प्रत्याशी अपने समर्थकों और पार्टी नेताओं के […]

आनंदखेड़ा में उमड़ा जनसैलाब: ठुकराल की वापसी के संकेत, सुषमा हालदार के समर्थन में जनसंपर्क अभियान जोरों पर

खानपुर (रुद्रपुर)। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल एक बार फिर अपने पुराने जनाधार को सक्रिय करते नजर आ रहे हैं। खानपुर पूर्व जिला पंचायत सीट के अंतर्गत आने वाले आनंदखेड़ा नंबर-1 […]