उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में कहीं-कहीं घने कोहरे का प्रकोप जारी है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के मैदानी क्षेत्र शीत लहर की चपेट में हैं, जबकि पर्वतीय क्षेत्र में निकल रही चटख धूप ठंड से राहत दे रही है।

आज से मौसम में बदलाव आने का पूर्वानुमान है। नए साल से पहले पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। मैदानी क्षेत्रों में कोहरा छाएगा। […]

उत्तर प्रदेश में जब भी अपराध की बात होती है, तो सबसे पहले हर किसी की जुबां पर पूर्वांचल का नाम आता है. लेकिन पूर्वांचल की बड़ी छवि के साये में पश्चिमी यूपी से भी कई कुख्यात अपराधी निकले, जिसमें से एक था विनय त्यागी.

विनय त्यागी खैर अब इन दुनिया में नहीं रहा. लेकिन जरायम की दुनिया में उसका नाम सालों-साल गूंजता रहा. करीब 29 साल तक उसने अपराध जगत में दबदबा बनाए रखा. […]

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर शैल सांस्कृतिक समिति का अल्टीमेटमसीबीआई जांच में देरी हुई तो सड़क से सदन तक आंदोलन—गोपाल सिंह पटवाल

रुद्रपुर। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर उत्तराखंड की सियासत और समाज में उबाल है। ताजा आरोपों, वायरल ऑडियो और लगातार उठ रहे “वीआईपी एंगल” के सवालों के […]

हमारी संस्कृति, हमारी पहचान — उत्तरायणी (घुघुतिया त्यार) महोत्सव 2026 : रुद्रपुर में लोकसंस्कृति का विराट उत्सव!शैल सांस्कृतिक समिति (शैल परिषद),

रुद्रपुर,उत्तराखंड की आत्मा उसकी लोकसंस्कृति, लोकपर्व और सामूहिक चेतना में बसती है। पर्व केवल तिथि नहीं होते, वे पीढ़ियों को जोड़ने वाले सेतु होते हैं। ऐसे ही पर्वों में उत्तरायणी, […]

अंकिता भंडारी हत्याकांड: एक बार फिर उठते सवाल, क्या सच अब भी दबा है?

अंकिता भंडारी हत्याकांड—उत्तराखंड के इतिहास का वह काला अध्याय, जिसने न सिर्फ देवभूमि की आत्मा को झकझोरा, बल्कि सत्ता, सिस्टम और न्याय की विश्वसनीयता पर भी गहरे सवाल खड़े किए। […]

20 वर्षों का इंतज़ार खत्म: विधायक शिव अरोड़ा ने मकरन्दपुर की पुरानी मांग को विकास में बदला”

रुद्रपुर के विधायक शिव अरोरा ने 20 वर्षों से लंबित मकरन्दपुर टीन शेड की मांग पूरी कर यह साबित किया है कि संवेदनशील नेतृत्व ही सच्चा विकास लाता है। 25 […]

जब सत्ता, स्त्री और सोशल मीडिया एक-दूसरे से टकराते हैं :अंकिता भंडारी के नाम पर चल रही ‘नैतिक अराजकता’ का उत्तराखंड

हम सब उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की सरकार को दो टूक चेतावनी:वीआईपी सलाखों के पीछे जाएँ, हर आरोप की निष्पक्ष जांच हो—वरना होगा राज्यव्यापी आंदोलन हम सब उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की […]

अंकिता की चुप्पी नहीं, सवाल बोल रहे हैं — उत्तराखंड की अस्मिता कटघरे में, सत्ता की साख दांव पर”

उत्तराखंड की राजनीति, प्रशासन और सत्ता के गलियारों में जब भी अंकिता भंडारी हत्याकांड का नाम आता है, तो केवल एक अपराध नहीं, बल्कि राज्य की आत्मा पर लगा एक […]

अंकिता की चीख, सत्ता की चुप्पी और वीआईपी का साया: उत्तराखंड की अस्मिता के कठघरे में राजसत्ता”

उत्तराखंड की शांत वादियों में गूंजने वाली एक बेटी की चीख आज भी सत्ता के गलियारों में अनसुनी है। अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक जघन्य अपराध नहीं, बल्कि यह उस […]

सत्ता, सच और अंकिता की अस्मिता?जब अपराध सत्ता-संरक्षित हो जाए, तब न्याय की राह सबसे कठिन हो जाती है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक जघन्य अपराध नहीं, बल्कि सत्ता, पैसे और रसूख के उस गठजोड़ का भयावह प्रतीक है, जिसने देवभूमि की आत्मा को झकझोर दिया है। हालिया वायरल […]