जगमोहन नेगी, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी की कलम से ,बागेश्वर मे बॉबी की गिरप्तारी के दिन ही मैने लिख दिया था. क्यों इसे नेता बनाने पर तुले हो… क्यों पीछे पड़े… तुम इसे विधायक बनवाके छोड़ोगे… लेकिन ये to सीधे सांसद बनने निकल पड़े अब भुगतो सब….. ऐसे ही शिव प्रसाद सेमवाल के पीछे पड़े वो नेता बन गए पत्रकार से आशुतोष भी चुनौती बन गए हैं.. अब ऐसे ही इन्होने उमेश कुमार को बिधायक बनवा दिये.. और अब वो कल हमारे दो पूर्व cm को चुनौती दे रहे थे एक पत्रकार के सामने.. की त्रिवेंद्र जी को 04 लाख मे समेट दूंगा और हरीश रावत जी की to जमानत बचाने के लाले पड़ जायेंगे…. दरसल ये सब इन नेताओं के कारण नेता बने हैं और अब इन पर भारी पड़ रहे हैं…

उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम में बदलाव के आसार नजर आ रहे हैं। 20 मार्च से पहाड़ों में मौसम बदलने का अनुमान है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 23 मार्च तक 5 पहाड़ी जिले चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में बारिश के साथ-साथ बर्फबारी भी हो सकती है।

कल मौसम रहेगा शुष्क आने वाले दिनों में भी मैदानी क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना रह सकता है जिससे तपिश बढ़ने की आशंका है। दून में भी लगातार पारे में […]

कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में […]

    PAC के दो सिपाहियों को आजीवन कारावास, तीन दशक बाद अदालत ने सुनाया फैसला रामपुर तिराहा कांड में सामूहिक दुष्कर्म, लूट, छेड़छाड़ और साजिश रचने के मामले में अदालत ने आखिरकार फैसला सुना दिया। पीएसी के दो सिपाहियों पर 15 मार्च को दोष सिद्ध हो चुका था।

दहशत के साए में हुई थी अस्मत तार-तार, नहीं भूली खौफ की रातहिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स। अवतार सिंह बिष्ट। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-7 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने […]

चुनाव आचार संहिता की वजह से लटकी 3253 पदों पर शिक्षकों की भर्ती, कैबिनेट में मिली थी मंजूरी।उत्तराखंड में एक मार्च से लेकर 16 मार्च तक मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा बनाए गए प्रवर्तन दल ने सात करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, अवैध शराब और मादक पदार्थ को सीज किया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डाॅ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि जो जिले अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय सीमाओं से लगे हैं, उनके चेकपोस्ट पर प्रभावी निगरानी की जाए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने रविवार […]

उत्तराखंड में कांग्रेस विधायकों का टूटना जारी है. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को झटका देते हुए बद्रीनाथ के मौजूदा विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी रविवार को भाजपा में शामिल हो गए.गढ़वाल कांग्रेस मुक्त, टिहरी सीट पर कोशिश तेज…अब एक और विधायक पर भाजपा की निगाह।

गढ़वाल सीट में 14 विधानसभा सीटों में बदरीनाथ ही अकेली कांग्रेस के पास थी। तीन बार के विधायक भंडारी चमोली जिले की राजनीति में प्रभाव रखते हैं। जिला पंचायत सीट […]

80के दशक में इंदिरा गांधी को देश की सबसे ताकतवर नेताओं में माना जाता था। उत्तराखंड का गढ़वाल क्षेत्र तब कांग्रेस का गढ़ था। लेकिन 1982 के उपचुनाव में गढ़वाल सीट पहाड़ पुत्र हेमवती नंदन बहुगुणा और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बीच की जंग का अखाड़ा बन गई।जब बहुगुणा के समर्थन में इंदिरा गांधी के खिलाफ खड़ा हो गया था पूरा पहाड़

दो दिग्गजों की जंग के कारण लोकसभा का एक उपचुनाव देश की राजनीति में सबसे बड़ा चर्चा का विषय था। इस उपचुनाव में पूरा पहाड़ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे बहुगुणा […]

प्रदेश के शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने, आमजन को सुविधा और आरामदायक सफर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार की ओर से लाई गई उत्तराखंड स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन नीति-2024 को लागू करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर हाईपावर कमेटी का गठन किया गया है।परिवहन सचिव अरविंद सिंह हयांकी की ओर से शुक्रवार को जारी शासनादेश में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छह सदस्यीय हाईपावर कमेटी बनाई गई है, जो नीति निर्धारण व इसकी निगरानी का कार्य करेगी।

वहीं, परिवहन आयुक्त की अध्यक्षता में बनाई गई दूसरी कमेटी नीति के क्रियान्वयन का कार्य करेगी। उत्तराखंड स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन नीति-2024 के अनुसार वर्ष 2027 तक प्रदेश के सभी शहरों […]

पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र करन सिंह नगन्याल ने ऐसे पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।पुलिस मुख्यालय के सख्त निर्देशों के बावजूद ड्यूटी के दौरान कई पुलिसकर्मी वर्दी में रील बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर रहे हैं।

आइजी नगन्याल ने कहा कि यह अत्यंत आपत्तिजनक है। उन्होंने सभी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को पुलिस मुख्यालय के निर्देशों का पूर्ण पालन करने के निर्देश दिए हैं। IG ने […]

Uttarakhand:  वन पंचायतों की एकमात्र व्यवस्था वाले मध्य हिमालयी राज्य उत्तराखंड में अब इनके सशक्तीकरण पर सरकार ने ध्यान केंद्रित किया है। कैबिनेट ने इसके लिए वन पंचायत नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।राज्य में वन पंचायतों की संख्या 11217 है। इनके मध्य सीमा समेत अन्य विवाद सामने आने पर इसके निस्तारण को वन और राजस्व विभाग की संयुक्त समिति गठित की जाएगी। समिति के निर्णय को डीएफओ व डीएम के पास चुनौती भी दी जा सकेगी।

जुर्माना वसूल करने का अधिकार भी पहली बार यही नहीं, वन पंचायतों के अधीन वन क्षेत्रों में उनके द्वारा जड़ी-बूटी व सगंध पादपों की खेती करने उन्हें इनके दोहन से […]