राज्य कर विभाग के सर्वे को लेकर व्यापारियों में बढ़ता आक्रोश, व्यापार मंडल ने जताई कड़ी आपत्ति

Spread the love


रुद्रपुर उत्तराखंड,  राज्य कर विभाग की ओर से व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर चलाए जा रहे सर्वे अभियान को लेकर व्यापारियों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि विभाग द्वारा किए जा रहे सर्वे की कार्यप्रणाली न केवल असुविधाजनक है, बल्कि इससे व्यापारिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को व्यापार मंडल के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला अध्यक्ष राजकुमार भूड्ढी और महानगर अध्यक्ष संजय जुनेजा के नेतृत्व में राज्य कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं तथा एक ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त आयुक्त राकेश वर्मा, संयुक्त आयुक्त रोशन लाल तथा राज्य कर विभाग के उपायुक्त विनय ओझा को ज्ञापन देकर सर्वे अभियान के दौरान अपनाई जा रही प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। व्यापार मंडल का कहना है कि विभागीय अधिकारी सर्वे के दौरान व्यापारियों से ऐसी कई जानकारियां मांग रहे हैं जिनका उनके व्यवसाय, कर निर्धारण अथवा कर भुगतान से कोई सीधा संबंध नहीं है। इससे व्यापारियों में भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो रही है।
ज्ञापन में व्यापारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य कर विभाग का उद्देश्य यदि कर व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाना है तो सर्वे की प्रक्रिया भी उसी अनुरूप होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में जिस प्रकार की जानकारियां मांगी जा रही हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि सर्वे अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। व्यापारियों का आरोप है कि कई मामलों में उनसे व्यक्तिगत और अतिरिक्त सूचनाएं भी मांगी जा रही हैं, जिनका व्यापारिक लेन-देन या कर संबंधी दायित्वों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि व्यापार पहले से ही विभिन्न आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, बाजार में मंदी, ऑनलाइन कारोबार का दबाव तथा अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण व्यापारी वर्ग कई प्रकार की परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में यदि सर्वे के नाम पर अतिरिक्त दबाव बनाया जाएगा तो इसका सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी कर कानूनों का पालन करने के पक्षधर हैं और सरकार के राजस्व हितों का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी प्रकार की अनावश्यक पूछताछ या दबाव उचित नहीं है।
व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सर्वे के दौरान कई प्रतिष्ठानों में अधिकारियों के व्यवहार और पूछताछ की शैली से व्यापारियों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि विभागीय कार्रवाई का भय दिखाकर जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है, जिससे व्यापारी स्वयं को असहज महसूस कर रहे हैं। व्यापार मंडल के अनुसार सर्वे की प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव दिखाई देता है, जिसके कारण व्यापारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
ज्ञापन के माध्यम से व्यापार मंडल ने मांग की कि वर्तमान सर्वे अभियान को तत्काल प्रभाव से रोका जाए तथा इसकी समीक्षा की जाए। संगठन का कहना है कि यदि विभाग को किसी प्रकार की जानकारी चाहिए तो उसके लिए स्पष्ट और न्यायसंगत प्रक्रिया निर्धारित की जानी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी व्यापारी का अनावश्यक उत्पीड़न न हो और न ही उसे मानसिक अथवा आर्थिक रूप से परेशान किया जाए।
व्यापार मंडल के नेताओं ने अधिकारियों को अवगत कराया कि व्यापारी वर्ग हमेशा सरकार और प्रशासन के साथ सहयोग करता आया है। कर संग्रह में व्यापारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और राज्य की आर्थिक व्यवस्था में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी कार्रवाई के दौरान उनके सम्मान और अधिकारों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन और व्यापारियों के बीच विश्वास का वातावरण बना रहना आवश्यक है, तभी कर व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सकती है।
प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से यह भी अनुरोध किया कि सर्वे से संबंधित दिशा-निर्देश सार्वजनिक किए जाएं ताकि व्यापारियों को यह स्पष्ट जानकारी मिल सके कि उनसे कौन-कौन सी सूचनाएं मांगी जा सकती हैं और किन परिस्थितियों में सर्वे किया जाएगा। इससे अनावश्यक विवादों और भ्रम की स्थिति से बचा जा सकेगा। व्यापारियों का मानना है कि स्पष्ट नियम और पारदर्शी प्रक्रिया ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकती है।
व्यापार मंडल ने चेतावनी भी दी कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया और सर्वे की वर्तमान कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो संगठन व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि व्यापारी अपने सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन और अन्य आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में व्यापारी और व्यापार मंडल के पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश अरोरा, गदरपुर व्यापार मंडल अध्यक्ष दीपक बेहड़, जिला प्रभारी अशोक छाबड़ा, जिला उपाध्यक्ष सुरमुख सिंह विर्क, अरुण अग्रवाल, गुलशन नारंग, जिला कोषाध्यक्ष विनीत जैन, शिवेन सेठी, पारस अरोरा, इरशाद अहमद, रवि तनेजा, मुकेश नारंग, संजय ठुकराल, गौरव आहूजा सहित अनेक व्यापारी शामिल थे। सभी ने एक स्वर में व्यापारियों की समस्याओं को उठाते हुए विभाग से संवेदनशील और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की मांग की।
कुल मिलाकर राज्य कर विभाग के सर्वे को लेकर व्यापारियों और प्रशासन के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। जहां विभाग कर व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सर्वे अभियान चला रहा है, वहीं व्यापारी इसे अनावश्यक दबाव और उत्पीड़न के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में विभाग और व्यापारिक संगठनों के बीच संवाद तथा समाधान की दिशा में उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल व्यापारियों ने अपनी चिंताओं को प्रशासन के समक्ष स्पष्ट रूप से रख दिया है और अब वे सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।


Spread the love