इस संभावित विस्तार को लेकर कयासों का बाजार गर्म है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा ओडिशा की एक हाई-प्रोफाइल महिला सांसद की हो रही है। सूत्रों का दावा है कि 1994 बैच की पूर्व IAS अधिकारी और भुवनेश्वर से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी को इस बार मोदी सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
दरअसल, इस बात को हवा तब और मिल गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस शिष्टाचार भेंट को आगामी मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार परफॉर्मेंस के आधार पर कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि कुछ नए और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले चेहरों को टीम मोदी में शामिल किया जा सकता है।
नौकरशाही से राजनीति तक का सफर: कौन हैं अपराजिता सारंगी?
बिहार के मुजफ्फरपुर में जन्मीं अपराजिता सारंगी की पहचान एक बेहद कड़क और ईमानदार प्रशासनिक अधिकारी की रही है। वह 1994 बैच की ओडिशा कैडर की IAS अफसर हैं। साल 2018 में उन्होंने अपनी प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली और भाजपा का दामन थाम लिया। राजनीति में आते ही उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ दिखाई और 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की। इसके बाद 2024 के चुनाव में उन्होंने बीजू जनता दल (BJD) के दिग्गज नेता अरूप पटनायक को पटखनी देकर दोबारा भुवनेश्वर से संसद पहुंचीं।
प्रशासनिक अनुभव की बात करें तो अपराजिता ने ओडिशा सरकार में साल 2009 से 2013 के बीच स्कूल शिक्षा, पंचायती राज और टेक्सटाइल जैसे बेहद महत्वपूर्ण विभागों में सचिव के रूप में काम किया है। इसके अलावा वह जन शिक्षा विभाग की सचिव भी रह चुकी हैं। फिलहाल वह भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर टीवी डिबेट्स में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखती हैं और संसद में संविधान संशोधन विधेयकों पर संयुक्त समिति जैसे प्रमुख पैनल की अध्यक्षता भी कर रही हैं। यही वजह है कि मोदी कैबिनेट विस्तार में उनके नाम की चर्चा सबसे आगे चल रही है।
क्यों पड़ रही है कैबिनेट में बदलाव की जरूरत?
असल में, इस फेरबदल के पीछे सिर्फ नए चेहरों को लाना नहीं, बल्कि कुछ मौजूदा खाली पदों को भरना भी है। मंगलवार को ही केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है और पार्टी ने उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया, जिसके बाद उनका हटना तय माना जा रहा था।
इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश भाजपा के दिग्गज नेता पंकज चौधरी और दिल्ली भाजपा के हर्ष मल्होत्रा, जो फिलहाल केंद्रीय राज्य मंत्री हैं, उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी जा चुकी हैं। ‘एक व्यक्ति एक पद’ के सिद्धांत के तहत अब इनकी जगह नए चेहरों को शामिल किया जाना लाजमी है।
आगामी विधानसभा चुनावों पर नजर
बताया जा रहा है कि इस मोदी कैबिनेट विस्तार में केवल प्रशासनिक अनुभव ही नहीं, बल्कि आगामी सियासी समीकरणों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा आलाकमान इन राज्यों के क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश करेगा।
हाल ही में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को फिर से राज्यसभा भेजने के बजाय पंजाब विधानसभा चुनाव में उतारने के संकेत मिले हैं, जिससे साफ है कि भाजपा राज्यों के चुनावों को लेकर बेहद गंभीर है। बहरहाल, अपराजिता सारंगी के नाम पर अभी कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन यदि उन्हें कैबिनेट में जगह मिलती है, तो ओडिशा समेत महिला नेतृत्व को लेकर भाजपा एक बड़ा सियासी संदेश देने में कामयाब रहेगी।
