सेवा ही जिनकी सबसे बड़ी राजनीति है
रुद्रपुर जैसे तेजी से विकसित होते शहर में अनेक नेता आए, अनेक संगठन बने और समय के साथ राजनीतिक समीकरण बदलते रहे। इन सबके बीच एक नाम ऐसा है, जिसे लोग किसी पद या चुनावी पहचान से नहीं, बल्कि समाज सेवा के कारण जानते हैं। वह नाम है सुशील बाबा। उनके समर्थकों की नजर में वे रुद्रपुर की सामाजिक चेतना का चेहरा हैं। जन्मदिन के अवसर पर उनके व्यक्तित्व और समाज के प्रति समर्पण को याद करना स्वाभाविक है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
आज के समय में अधिकांश लोग समाज सेवा को राजनीति तक पहुंचने का माध्यम बनाते हैं। सुशील गावा का सफर इससे अलग दिखाई देता है। उन्होंने पहले कांग्रेस में काम किया, बाद में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े, फिर सक्रिय राजनीति से स्वयं को अलग कर दिया। यह निर्णय इस बात का संकेत माना जाता है कि उनका लक्ष्य किसी पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि समाज के बीच रहकर सेवा करना है। आज भी उनकी पहचान किसी दल से अधिक एक समाजसेवी की है।
रुद्रपुर का शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला होगा, जहां सुशील बाबा किसी सामाजिक, धार्मिक या जनहित के कार्यक्रम में न पहुंचे हों। किसी परिवार में खुशी का अवसर हो, किसी के घर शोक हो, किसी गरीब को सहायता की आवश्यकता हो या किसी नागरिक के साथ अन्याय हुआ हो, वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करते हैं। यही निरंतरता उन्हें आम लोगों से जोड़ती है।
धर्म और संस्कृति के प्रति उनकी आस्था भी उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अयोध्या तक पैदल यात्रा निकालकर उन्होंने भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं थी, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का संदेश भी थी। रामचरितमानस का उनका ज्ञान, रामलीला के संवादों का स्मरण और घर-घर जाकर भगवान श्रीराम के चित्र वितरित करना उनकी सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राष्ट्रीय भावना के प्रति उनका समर्पण भी समय-समय पर दिखाई देता रहा है। तिरंगा यात्रा हो या राष्ट्र जागरण अभियान, वे स्वयं लोगों के बीच पहुंचकर युवाओं और नागरिकों को देशभक्ति का संदेश देते रहे हैं।
रुद्रपुर में मानसून का मौसम शुरू हो चुका है। रिमझिम बारिश ने दस्तक दे दी है। ऐसे मौसम में शहर की सबसे बड़ी चिंता फिर सामने खड़ी दिखाई देती है। कल्याणी नदी हो या शहर के नाले, प्लास्टिक, पॉलीथिन और कूड़े-कचरे से उनकी हालत बदहाल है। विडंबना यह है कि इन जलमार्गों को किसी प्राकृतिक आपदा ने नहीं, बल्कि लोगों की लापरवाही ने जाम किया है। वर्षों से नदी और नालों में कचरा डालने की आदत ने उनके प्राकृतिक प्रवाह को रोक दिया है।
अब जब तेज बारिश होगी और कल्याणी नदी अपने वास्तविक स्वरूप में लौटेगी, तब पानी का रास्ता बंद होने के कारण वही पानी लोगों के घरों और सड़कों पर दिखाई देगा। इसके बाद प्रशासन पर सवाल उठेंगे, राजनीति होगी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलेगा। यह दृश्य रुद्रपुर हर वर्ष देखता है।
इसी दौरान एक दृश्य ऐसा भी होता है जो हर साल लोगों के मन में जगह बना लेता है। पानी से भरी गलियों के बीच कमर तक पानी में उतरकर लोगों की मदद करते हुए सुशील बाबा दिखाई देते हैं। किसी बुजुर्ग को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना, बच्चों को गोद में उठाकर निकालना, जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाना या प्रशासन के साथ राहत कार्यों में सहयोग करना—ऐसी तस्वीरें अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि कैमरे बाद में पहुंचते हैं, सुशील बाबा पहले पहुंच जाते हैं।
यह भी सच है कि यदि नागरिक स्वयं नदियों और नालों को कूड़ाघर न बनाएं तो हर वर्ष ऐसी नौबत ही न आए। समाज सेवा केवल किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं होती। शहर की सफाई, नदी का संरक्षण और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। सुशील गावा समय-समय पर लोगों को इसी जिम्मेदारी का एहसास कराने का प्रयास भी करते रहे हैं।
उनकी एक और विशेषता यह है कि वे जनहित के मुद्दों को लगातार उठाते हैं। शहर की समस्या हो, गरीबों का अधिकार हो, प्रशासनिक लापरवाही का मामला हो या सामाजिक बुराई के खिलाफ आवाज उठानी हो, वे खुलकर अपनी बात रखते हैं। यही कारण है कि वे अक्सर जनचर्चा का विषय बने रहते हैं।
उनका मिलनसार और सहज स्वभाव उन्हें समाज के हर वर्ग के करीब ले जाता है। वे केवल कार्यक्रमों में मंच साझा करने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि घर-घर जाकर लोगों से मिलने वाले समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। यही आत्मीयता उन्हें अलग पहचान देती है।
समाज में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं, जिनकी पहचान किसी राजनीतिक पद से नहीं, बल्कि उनके कार्यों से बनती है। किसी व्यक्ति का वास्तविक सम्मान उसके पीछे चलने वाले काफिले से नहीं, बल्कि उसके साथ खड़े होने वाले लोगों से होता है। सुशील गावा के साथ समाज का विश्वास जुड़ा हुआ दिखाई देता है। यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
जन्मदिन केवल शुभकामनाओं का अवसर नहीं, बल्कि सेवा के उस सफर को सम्मान देने का भी दिन है, जिसने अनेक लोगों के जीवन को किसी न किसी रूप में छुआ है। कामना है कि सुशील बाबा स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों और इसी समर्पण के साथ रुद्रपुर की जनता की सेवा करते रहें।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं, सुशील गावा ,आपकी पहचान पद से नहीं, सेवा से बनी है। यही पहचान आने वाले वर्षों में भी समाज को प्रेरित करती रहे, यही शुभेच्छा है।
