11 मौतों के बाद बड़ा सवाल: आखिर किसकी लापरवाही की कीमत चुका रहे हैं रुद्रपुर-किच्छा के लोग? सड़क हादसे ने खोली संबंधित विभागों की पोल!


11 मौतों के बाद बड़ा सवाल: आखिर किसकी लापरवाही की कीमत चुका रहे हैं रुद्रपुर-किच्छा के लोग? सड़क हादसे ने खोली संबंधित विभागों की पोल!
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, परिजनों को बंधाया ढांढस; सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, हादसों की रोकथाम में नाकाम जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही कौन तय करेगा?

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


रुद्रपुर। बीती रात हुए भीषण सड़क हादसे में रुद्रपुर और किच्छा क्षेत्र के 11 लोगों की असामयिक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। किसी घर का चिराग बुझ गया, तो किसी परिवार ने अपना सहारा खो दिया। पोस्टमार्टम हाउस में अपनों को खोने वाले परिजनों की आंखों में आंसू और दिल में दर्द है। इस हृदयविदारक घटना के बीच भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेश शुक्ला पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता का आश्वासन भी दिया।
लेकिन इस दर्दनाक हादसे के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है—आखिर सड़क हादसों में जा रही इन जिंदगियों का जिम्मेदार कौन है? क्या हर बार दुर्घटना के बाद शोक जताना ही व्यवस्था की जिम्मेदारी बनकर रह गया है?
11 मौतें, लेकिन जिम्मेदारी किसकी?
राजेश शुक्ला ने संबंधित पुलिस अधिकारियों से टेलीफोन पर वार्ता कर क्षेत्र में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराने, दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम करने और हादसों की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया।
उनकी चिंता जायज है, लेकिन सवाल यह है कि जब सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है, तो संबंधित विभाग पहले से सतर्क क्यों नहीं होते? क्या दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील मार्गों की नियमित समीक्षा की जाती है? क्या सड़क की स्थिति, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और वाहनों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की प्रभावी निगरानी हो रही है?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों को देना चाहिए। हालांकि, इस हादसे के कारणों की आधिकारिक जांच सामने आने से पहले किसी विशेष विभाग या व्यक्ति को सीधे तौर पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
पुलिस, परिवहन और सड़क निर्माण विभाग की जवाबदेही पर सवाल
सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें यातायात पुलिस, परिवहन विभाग, सड़क निर्माण एवं रखरखाव से जुड़े विभागों और स्थानीय प्रशासन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि किसी दुर्घटना में तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग, वाहन की तकनीकी खराबी, चालक की लापरवाही या सड़क की खामी सामने आती है, तो प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
क्या दुर्घटनास्थल पर पर्याप्त चेतावनी संकेतक लगे थे? क्या सड़क की बनावट और उसकी स्थिति सुरक्षित थी? क्या वाहन की फिटनेस, परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच हुई थी? क्या चालक ने निर्धारित यातायात नियमों का पालन किया था? क्या संबंधित मार्ग पर पहले भी दुर्घटनाएं हुई थीं और उनके बाद सुधारात्मक कदम उठाए गए थे?
इन सवालों की जांच के बिना केवल संवेदना व्यक्त कर देना पर्याप्त नहीं होगा। 11 लोगों की मौत एक गंभीर चेतावनी है, जिसे प्रशासन और संबंधित विभागों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले जागना जरूरी
अक्सर किसी बड़े सड़क हादसे के बाद अधिकारी सक्रिय दिखाई देते हैं। निरीक्षण होते हैं, निर्देश जारी किए जाते हैं और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बातें कही जाती हैं। लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये कदम दुर्घटना होने से पहले उठाए गए थे?
यदि किसी मार्ग पर लगातार हादसे हो रहे हैं, तो वहां दुर्घटनाओं के कारणों का अध्ययन कर ठोस सुधार किए जाने चाहिए। तेज रफ्तार पर नियंत्रण, नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई, हेलमेट और सीट बेल्ट के नियमों का पालन, वाहन फिटनेस की जांच तथा संवेदनशील स्थानों पर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम प्राथमिकता होने चाहिए।
प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि दुर्घटना के बाद घायलों को समय पर एंबुलेंस और उपचार मिले। सड़क सुरक्षा के लिए केवल अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमों का निरंतर पालन और जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।
राजेश शुक्ला की चिंता के साथ अब ठोस कार्रवाई की अपेक्षा
पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। यह एक संवेदनशील पहल है। अब क्षेत्र की जनता की अपेक्षा है कि इस हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच हो और जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाए, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
प्रशासन को दुर्घटनास्थल का तकनीकी निरीक्षण कराना चाहिए। वाहन की स्थिति, चालक की भूमिका, सड़क की परिस्थितियों और यातायात प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की जांच की जानी चाहिए। यदि किसी विभाग की लापरवाही सामने आती है, तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल: क्या 11 मौतों के बाद बदलेगी व्यवस्था?
रुद्रपुर और किच्छा क्षेत्र के 11 परिवारों के लिए यह हादसा जीवनभर का दर्द बन गया है। उनकी क्षति की भरपाई कोई मुआवजा नहीं कर सकता। लेकिन व्यवस्था की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए गंभीर प्रयास किए जाएं।
अब जनता जानना चाहती है कि इस हादसे के वास्तविक कारण क्या थे, सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाएंगे।
11 मौतें केवल एक दुर्घटना का आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था के सामने खड़ा एक गंभीर सवाल हैं। संवेदनाएं जरूरी हैं, लेकिन संवेदनाओं के साथ जवाबदेही और कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है। संबंधित विभागों को यह साबित करना होगा कि लोगों की जान बचाना उनकी प्राथमिकता है, केवल हादसे के बाद बयान जारी करना नहीं।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, रुद्रपुर