डिजिटल चक्रव्यूह में दंगाई: जंतर-मंतर के हर उपद्रवी को बेनकाब करती दिल्ली पुलिस की तीसरी आंख

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डिजिटल सुराग: जंतर-मंतर पर आधी रात का उपद्रव और एआई का जाल

20 और 22 जुलाई 2026 की रात दिल्ली का जंतर-मंतर अचानक रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। नीट (NEET) परीक्षा धांधली के विरोध में चल रहा शांतिपूर्ण प्रदर्शन आधी रात को हिंसक हो उठा। प्रदर्शनकारियों की आड़ में छिपे कुछ शातिर उपद्रवियों ने पूरी प्लानिंग के साथ हिंसा को अंजाम दिया। चेहरे पर नकाब पहने और हाथों में पत्थर-लाठियां लिए इन दंगाइयों ने पुलिस बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका, पेट्रोल पंपों पर तोड़फोड़ की और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) पर भारी पथराव शुरू कर दिया। इस खूनी झड़प में एक एसीपी (ACP) समेत कई सुरक्षाकर्मी लहुलूहान हो गए।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

वारदात को अंजाम देकर उपद्रवी यह सोचकर भाग निकले कि अंधेरे और नकाब के पीछे उनका चेहरा कभी बेनकाब नहीं होगा। लेकिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस बार पारंपरिक जांच के बजाय डिजिटल सर्विलांस का सहारा लिया। पुलिस ने आंदोलन स्थल पर अपनी सबसे आधुनिक हथियार ‘इक्षणा’ (Ikshana) सर्विलांस वैन को तैनात कर दिया।

क्राइम ब्रांच की टीम ने घटना की रात के 80 से अधिक वीडियो, ड्रोन फुटेज और सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के रिकॉर्ड्स को खंगालना शुरू किया। ‘इक्षणा’ वैन में मौजूद एआई-पावर्ड फेशियल रिकग्निशन (AI-Powered Facial Recognition) सॉफ्टवेयर ने कमाल कर दिया। नकाबपोश दंगाइयों ने जब कुछ पलों के लिए भी चेहरा खोला, एआई कैमरे ने तुरंत उनका डिजिटल स्केच तैयार कर लिया। सॉफ्टवेयर ने लाइव फीड में संदिग्ध चेहरों पर ग्रीन बॉक्स बनाकर उनका मिलान पुलिस के राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस से किया।

नतीजतन, जो उपद्रवी खुद को भीड़ में सुरक्षित समझ रहे थे, वे एक-एक कर चिन्हित हो गए। पुलिस ने उनके मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी ट्रेल का पीछा करते हुए दिल्ली-एनसीआर से कई मुख्य आरोपियों को दबोच लिया। जंतर-मंतर की इस क्राइम स्टोरी ने साबित कर दिया कि तकनीक के इस दौर में अब कानून की नजरों से बचना नामुमकिन है


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