रूद्रपुर की सरज़मीं हमेशा से सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की गवाह रही है। इस परंपरा में इस बार विशेष रंग भरा पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की सक्रिय उपस्थिति ने। ग्राम खानपुर नंबर-1 से लेकर गंगापुर रोड स्थित कॉलोनियों और ट्रांजिट कैंप के मंदिरों तक—ठुकराल का गणेश महोत्सवों में भाग लेना केवल धार्मिक रस्म अदायगी नहीं था, बल्कि यह समाज को जोड़ने की उनकी पुरानी पहचान को एक बार फिर सामने लेकर आया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)
ग्राम खानपुर के युवाओं द्वारा पहली बार आयोजित गणेश उत्सव में उनका शामिल होना एक बड़ा संदेश था। ग्रामीण अंचल के युवाओं का उत्साह और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ जब राजकुमार ठुकराल ने सराहीं, तो यह केवल प्रशंसा भर नहीं रही बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़े रखने का आह्वान भी बन गई। ठुकराल का यह कहना कि “गणेश महोत्सव समाज को जोड़ने और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने का पर्व है”—आस्था और सामाजिक चेतना का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
स्वर्णिम हिल व्यू सिटी कॉलोनी में उनका मुख्य अतिथि के रूप में स्वागत और श्रद्धालुओं को दी गई शुभकामनाएँ भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गणपति बप्पा केवल विघ्नहर्ता ही नहीं बल्कि नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने वाले आराध्य हैं। यह बात आज के दौर में बेहद प्रासंगिक है, जब युवाओं को आधुनिकता की तेज़ दौड़ में अपनी परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा चाहिए।
ध्यान देने योग्य है कि राजकुमार ठुकराल केवल मंचीय भाषणों तक सीमित नहीं रहते। ट्रांजिट कैम्प के राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित गणेश महोत्सव में उन्होंने न केवल भाग लिया, बल्कि भंडारे का प्रसाद भी ग्रहण किया। यही व्यवहार उन्हें भीड़ से अलग करता है—जनता के बीच जाकर, उनके साथ बैठकर, उनकी परंपराओं को साझा करके।
आज जब राजनीति अक्सर आडंबर और दिखावे में सिमटती जा रही है, ठुकराल का यह जनसरोकार वाला पक्ष उन्हें एक अलग पहचान देता है। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी सक्रियता केवल राजनीतिक उपस्थिति नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे की मशाल है।
राष्ट्रीय खेल दिवस और मेजर ध्यानचंद की जयंती पर उनके संदेश से यह भी स्पष्ट होता है कि ठुकराल की दृष्टि केवल धर्म और संस्कृति तक सीमित नहीं, बल्कि खेलों और स्वस्थ समाज की ओर भी है।
इसलिए यह कहना अनुचित न होगा कि पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल आज भी रुद्रपुर की सांस्कृतिक और सामाजिक धड़कन में मौजूद हैं। वे राजनीति से इतर भी अपने जनसरोकार, अपनी आस्था और अपने व्यवहार से समाज को दिशा दे रहे हैं। यही उन्हें एक “जननायक” बनाता है।

