भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और उनसे जुड़े प्रोटोकॉल को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों और केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों को नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं।

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इस नए आदेश में साफ कहा गया है कि देश में राष्ट्रगान (जन गण मन) और राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) को गाने और बजाने से जुड़े जो भी नियम हैं, उनका हर हाल में सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

गृह मंत्रालय द्वारा 9 जुलाई को भेजे गए इस आधिकारिक पत्र में नियमों की पूरी सूची दोबारा भेजी गई है। इसमें साफ तौर पर बताया गया है कि किन-किन अवसरों पर राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत (National Song First Then National Anthem) को अनिवार्य रूप से गाया या बजाया जाना चाहिए, और कहां इसे वैकल्पिक तौर पर प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके अलावा, कई कार्यक्रमों में दोनों को एक साथ प्रस्तुत करने की परंपरा है, उसके लिए भी नियम स्पष्ट किए गए हैं।

हमेशा राष्ट्रीय गीत पहले गाया या बजाया जाएगा-मंत्रालय

मंत्रालय ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि “जब भी किसी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों को एक साथ प्रस्तुत किया जा रहा हो, तो हमेशा राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) पहले गाया या बजाया जाएगा। इसके ठीक बाद राष्ट्रगान (जन गण मन) की प्रस्तुति होगी।” इसके अलावा, जिन राज्यों का अपना कोई आधिकारिक राज्य गीत (State Song) है, उनके लिए भी भ्रम दूर किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि यदि किसी राज्य में राज्य गीत भी गाया जा रहा है, तो भी राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान को एक साथ ही रखा जाएगा, जिसमें पहले राष्ट्रीय गीत और फिर राष्ट्रगान की तय व्यवस्था का पालन होगा।

किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होगी स्वीकार

एक और महत्वपूर्ण बात जो इस निर्देश में कही गई है, वह है उच्चारण की शुद्धता। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत गाते समय उनके शब्दों का सही पाठ, लय और उच्चारण बिल्कुल सटीक होना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। लोगों और संस्थाओं की मदद के लिए दोनों का एकदम सही पाठ और शुद्ध उच्चारण गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है। मंत्रालय ने सभी राज्यों और विभागों से कहा है कि वे अपने अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों, कॉलेजों और संगठनों को ये नियम भेजें ताकि जमीन पर इसका कड़ाई से पालन हो सके।


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