किच्छा। नगर पालिका चुनाव में मतदान पूरा हो चुका है, लेकिन सियासी ड्रामा अभी खत्म नहीं हुआ। स्ट्रांग रूम के बाहर कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ और भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के बीच हुआ विवाद अब पूरे चुनाव की सबसे चर्चित घटना बन गया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए और मीडिया में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी खूब चला।
मामला उस समय गरमा गया जब स्ट्रांग रूम के बाहर पर्दे लगाने को लेकर आपत्ति हुई। विवाद बढ़ा और बेहड़ को थप्पड़ मारे जाने का आरोप सामने आया। पुलिस ने मामले में धीरज कुमार नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जबकि शांति व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में करीब 30 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब राजनीतिक व्यंग्य का सवाल यह है कि किच्छा के चुनाव में असली किंगमेकर कौन था और पर्दे के पीछे किसकी भूमिका कितनी थी? चुनावी मैदान में भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह आमने-सामने हैं। दूसरी ओर राजकुमार ठुकराल समेत कई स्थानीय राजनीतिक चेहरे भी पूरे घटनाक्रम के बीच सक्रिय दिखाई दिए।
सबसे दिलचस्प अध्याय अब 24 सितंबर की मतगणना के बाद खुलेगा। जीत किसी की भी हो, सवाल और आरोपों की राजनीति खत्म होने के आसार कम हैं। हारने वाला पक्ष चुनावी प्रक्रिया, प्रशासन और स्ट्रांग रूम की व्यवस्था पर सवाल उठाएगा—ऐसी आशंकाएं राजनीतिक बयानबाजी में पहले ही दिखाई देने लगी हैं। वहीं जीतने वाला पक्ष इसे जनता के फैसले की मुहर बताएगा।
यानी मतदान की मशीनें और मतपेटियां अब स्ट्रांग रूम में बंद हैं, लेकिन किच्छा की राजनीति में आरोपों की पेटी अभी खुली हुई है।
**HGT की नजर अब नतीजे पर—कौन जीतेगा चुनाव और किसकी खुलेगी राजनीतिक पटकथा की अगली पारी?**
किच्छा चुनाव की सियासी नौटंकी: मंच पर बेहड़-शुक्ला, पर्दे के पीछे कौन-कौन?
