99 दिन का धरना… 100वें दिन सरकार के सामने बड़ा सवाल!2013 से लंबित नियुक्तियों पर राज्य आंदोलनकारियों का सब्र टूटा, तीन दिन में फैसला नहीं हुआ तो आत्मघाती कदम की चेतावनी

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देहरादून, 21 सितम्बर 2026। उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारियों की नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर सरकार के सामने गंभीर चुनौती के रूप में खड़ा हो गया है। वर्ष 2013 से लंबित नियुक्तियों की मांग को लेकर 15 जून 2026 से शहीद स्मारक देहरादून में चल रहा धरना सोमवार को 99वें दिन भी जारी रहा। मंगलवार को आंदोलन 100वें दिन में प्रवेश करेगा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


शासन से मिले आश्वासन के बावजूद अब तक ठोस निर्णय नहीं होने से आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सोमवार को आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी देहरादून को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी को सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
मंच संयोजक अम्बुज शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मुख्य सचिव आनंद वर्धन और गृह सचिव शैलेश बगौली के साथ आंदोलनकारियों की वार्ता हुई थी। 14 सितम्बर को गृह सचिव की ओर से आश्वासन दिया गया था कि अगली कैबिनेट बैठक में आंदोलनकारियों के मामले का समाधान किया जाएगा।
आंदोलनकारियों का कहना है कि 100 दिन से अधिक समय तक चले धरने ने उन्हें शारीरिक, आर्थिक और मानसिक रूप से प्रभावित किया है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि आने वाले तीन दिनों के भीतर नियुक्तियों के मामले में निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलनकारी सामूहिक रूप से आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर होने की चेतावनी दे रहे हैं। उन्होंने ऐसी स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अगली कैबिनेट बैठक में 2013 से लंबित नियुक्तियों के मामले पर सरकार कोई ठोस फैसला लेगी, या 100वें दिन भी आंदोलनकारियों का धरना जारी रहेगा?
धरने को राम किशन, पंकज सिंह रावत, सुनीता ठाकुर, मनोरथ ध्यानी, गीता नेगी, एकादशी देवी, प्यार सिंह थलवाल, देवेश्वर काला, पुष्पा बहुगुणा, सुरेश कुमार, प्रमिला रावत, प्रभात डंडरियाल, रेखा शर्मा, विकास रावत, चमन सिंह पंवार, मधु थपलियाल, रामपाल, बालेश बवानिया और विनोद कटारिया सहित अन्य लोगों ने समर्थन दिया।


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