रिपोर्ट के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं की कुल संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है. उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में मौतों का आंकड़ा सबसे अधिक बढ़ा, जबकि पंजाब में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
2025 में बढ़ी सड़क दुर्घटनाएं और मौतें
सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में देशभर में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 5.3 प्रतिशत बढ़कर 5.1 लाख से अधिक हो गई. इसी अवधि में सड़क हादसों में मौतों की संख्या बढ़कर 1.8 लाख से ज्यादा पहुंच गई. सरकार के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. औसतन हर दिन 502 लोगों की जान सड़क हादसों में गई.
उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मौतें
आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सड़क हादसों में मौतों के मामले में देश में सबसे ऊपर रहा. राज्य में वर्ष 2024 के दौरान 24,118 लोगों की मौत हुई थी, जो 2025 में बढ़कर 27,550 हो गई. इसी प्रकार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु भी सड़क दुर्घटना मौतों के मामले में शीर्ष राज्यों में शामिल रहे. वहीं पंजाब ने राहत भरी तस्वीर पेश की. राज्य में सड़क हादसों में मौतों की संख्या 4,759 से घटकर 3,062 रह गई, जो सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है.
Road Accident Deaths: सड़क हादसे के डरावने आंकड़े
18 राज्यों में बढ़ीं मौतें, 17 में कमी
मंत्रालय की लिखित जानकारी के अनुसार, 2025 में 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़ी, जबकि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कमी दर्ज की गई. विशेष रूप से लक्षद्वीप में लगातार दूसरे वर्ष भी सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मौत दर्ज नहीं हुई.
आंकड़ों में हो सकता है और इजाफा
मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम बंगाल के आंकड़े अन्य राज्यों की तुलना में अलग समयावधि के रिकॉर्ड पर आधारित हैं. पश्चिम बंगाल के लिए उपलब्ध डेटा जनवरी 2026 तक के रिकॉर्ड से लिया गया है, जबकि अन्य राज्यों के आंकड़े 22 जुलाई तक के eDAR रिकॉर्ड पर आधारित हैं. अधिकारियों का मानना है कि जब पश्चिम बंगाल का अद्यतन डेटा शामिल होगा तो कुल मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है.
क्या है eDAR सिस्टम?
e-Detailed Accident Report (eDAR) एक डिजिटल केंद्रीय दुर्घटना प्रबंधन प्रणाली है. इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करना और सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाना है. इस प्रणाली के जरिए दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़े एकत्र किए जाते हैं, जिनके आधार पर सड़क सुरक्षा नीतियां तैयार की जाती हैं.
ब्लैक कॉरिडोर बने चिंता का कारण
राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर 6,358 “ब्लैक कॉरिडोर” चिन्हित किए गए, जहां 37,164 लोगों की मौत हुई. सबसे अधिक ब्लैक कॉरिडोर तमिलनाडु में 958 दर्ज किए गए. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 671 और कर्नाटक में 607 ब्लैक कॉरिडोर चिह्नित हुए. जिलों की बात करें तो तमिलनाडु का विलुप्पुरम जिला सबसे अधिक 70 ब्लैक कॉरिडोर के साथ सूची में शीर्ष पर रहा.
कैसे कम होंगे हादसे?
एकस्पर्ट्स के अनुसार लगातार बढ़ती मौतें इस बात का संकेत हैं कि वर्तमान रणनीतियां अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं. उनका मानना है कि केवल जुर्माना और जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं. सड़क इंजीनियरिंग, ब्लैक कॉरिडोर सुधार, वाहन सुरक्षा मानकों और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत करने की जरूरत है. विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लैक कॉरिडोर की पहचान के बाद यदि वहां त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जाएं तो दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है.
