जंतवाल अपने पीछे पत्नी कुमाऊं विश्विद्यालय में प्रोफेसर सावित्री जंतवाल व दो बेटियां छोड़ गए हैं।
दिल का दौरा पड़ने से निधन
डॉ जंतवाल में अपने रूटीन स्वास्थ्य जांच के लिये दिल्ली गए थे, जहां उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उनके पार्थिव शरीर को नैनीताल लाया जा रहा है।
जंतवाल राज्य बनने के बाद हुए 2002 ल पहले विधान सभा चुनाव में नैनीताल सीट से विधायक चुने गए थे । उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक सदस्यों में शामिल जंतवाल डीएसबी परिसर छात्रसंघ के उप सचिव, सचिव अध्यक्ष व छात्रमहासंघ अध्यक्ष रहे।
रुद्रपुर। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्षशील साथी, उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता, नैनीताल विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. नारायण सिंह जंतवाल के निधन का समाचार अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। उनके निधन से उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति, राज्य आंदोलनकारी समाज और उत्तराखंड क्रांति दल को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
डॉ. जंतवाल केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, पहचान और क्षेत्रीय अधिकारों की आवाज उठाने वाले संघर्ष के साथी थे। उत्तराखंड राज्य निर्माण के आंदोलन में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करने का अवसर मिला। उनके साथ बिताए आंदोलन के दिन और राज्य निर्माण के सपनों को लेकर हुई चर्चाएं हमेशा स्मृतियों में रहेंगी।
नशा नहीं रोजगार दो, वनाधिकार आंदोलन सहित अन्य आंदोलनों में सक्रिय भूमिका रही। राज्य के तमाम जन आंदोलनों में उनकी अग्रणी भूमिका रही। उत्तराखंड राज्य निर्माण के नेतृत्वकर्ता के साथ जेल भी गए। उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष, संरक्षक रहे।
हाल ही में उत्तराखंड क्रांति दल की गैरसैंण राजधानी सहित अन्य मुद्दों को लेकर निकाली यात्रा में गैरसैंण चौखुटिया, द्वाराहाट आदि क्षेत्रों में शामिल रहे।
राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन
डॉ. नारायण सिंह जंतवाल उत्तराखंड क्रांति दल के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। वर्ष 2002 में उत्तराखंड की पहली निर्वाचित विधानसभा में उन्होंने नैनीताल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने राज्य की क्षेत्रीय अस्मिता और जनहित के सवालों को राजनीतिक मंचों पर लगातार उठाया।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
उनकी शैक्षणिक योग्यता के संबंध में उपलब्ध चुनावी अभिलेखों में एमए और एलएलबी का उल्लेख मिलता है। उनका सार्वजनिक जीवन उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति और राज्य के बुनियादी सवालों से जुड़ा रहा।
राज्य निर्माण के बाद भी उन्होंने उत्तराखंड के मूल सवालों को लेकर अपनी आवाज बुलंद रखी। स्थायी राजधानी, मूल निवास, भू-कानून, पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर वे लगातार अपनी बात रखते रहे। उनका मानना था कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण जिन सपनों और अपेक्षाओं के साथ हुआ था, उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष जारी रहना चाहिए।
एक संघर्षशील साथी को भावभीनी श्रद्धांजलि
आज उनके निधन का समाचार सुनकर मन अत्यंत व्यथित है। राज्य आंदोलन के दौर के अनेक साथी धीरे-धीरे हमसे बिछड़ते जा रहे हैं। डॉ. नारायण सिंह जंतवाल का जाना भी उसी संघर्षशील पीढ़ी के लिए एक बड़ी क्षति है, जिसने अलग उत्तराखंड राज्य का सपना देखा, उसके लिए संघर्ष किया और अपना जीवन समर्पित किया।
मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। शोकाकुल परिजनों, मित्रों, समर्थकों और उत्तराखंड क्रांति दल के सभी साथियों को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति। शांति।। शांति।।।
अवतार सिंह बिष्ट
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
अध्यक्ष: उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद, उत्तराखंड

