रुद्रपुर ग्राम सभा जवाहर नगर की ग्राम प्रधान दीपा कांडपाल पर ग्रामीण में लगाया जातिवाद फैलाने का आरोप, नाम ना छापने पर ग्राम वासी महिला अपने बयान में बताया कि ग्राम प्रधान दीपा कांडपाल के द्वारा एक जाति गत के लोगों के साथ प्रताड़ना द्वेष भावना से कर रही है। वास्तविक बीपीएल कार्ड धारकों का द्वेष भावना से पीला काट कर दिया गया है।जबकि संपन्न परिवारों को जो बीपीएल की श्रेणी में नहीं आते हैं, बोर्ड बैंक बढ़ाने के लिए उन्हें बीपीएल कार्ड बनवा दिये है। वही ग्राम प्रधान के द्वारा सरकार की मध में प्राप्त धनराशि का भी दुरुपयोग किया गया है। आपको अवगत करा दे जवाहर नगर जो की पूर्ण रूप से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गांव है। सभी लोग मिलजुल कर रहते हैं। पूर्व में राष्ट्रपति अवार्ड भी गांव को मिला है। जवाहर नगर एक आदर्श गांव से कैसे बन गया नशा तस्करों ड्रग्स माफिया, घोटाले बाजों का गांव। अवगत करा दे की सिडकुल स्थापना के बाद ग्राम सभा जवाहर नगर मैं कृषि भूमि पर प्लाटिंग शुरू हुई जिससे आसपास के क्षेत्र एवं नौकरी पेशा लोगों के द्वारा जवाहर नगर में अपना स्थाई आवास बना लिया। उन्हीं में से ग्राम प्रधान दीपा कांडपाल के द्वारा हाल फिलहाल कृषि भूमि पर प्लाट खरीद कर मकान बनाने के उपरांत जातिवाद समीकरण लेकर ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा और उन्हें विजय प्राप्त हुई। आज भी गांव के अंदर प्रधान के द्वारा जातिवाद समीकरण लेकर गांव में राजनीतिक की जा रही है। दूसरी जाति के लोगों का उत्पीड़न कर वोट की राजनीतिक खेली जा रही है। गांव के ज्यादातर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार ग्राम प्रधान के कार्यकलापों से नाखुश है। विकास कार्यों के नाम पर जमकर बंदर बांट हुई है। विकास कार्यों के नाम पर घोटाले को लेकर जनहित याचिका की तैयारी ग्राम वासी कर रहे हैं। आपको अवगत करा दें इससे पूर्व भी विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी का चोला उड़े हुए ग्राम प्रधान के द्वारा दूसरी राष्ट्रीय पार्टी को अंदर खाने समर्थन दिया गया। ग्राम प्रधान के पति ललित कांडपाल पर शराब माफिया ,ड्रग्स माफिया नशा तस्करों को संरक्षण देने का भी आरोप है। गांव के अंदर जब से दीपा कांडपाल ने प्रधानी जीती है नशा तस्करों की बाढ़ आ गई है । अवैध वसूली से तंग आकर जवाहर नगर से लगाती हुई ग्राम सभा नगला में शराब तस्कर के द्वारा पूर्व में प्रधान पति ललित कांडपाल को बुरी तरह से पीटा गया था । केश कोर्ट में विचाराधीन है। ग्l जवाहर नगर निवासी मोहन पांडे जो की एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति की जांच की मांग की है। ग्राम सभा जवाहर नगर में हुए विकास कार्यों या विकास के नाम पर जो पैसा ग्राम सभा को आवंटन हुआ था उसकी भी जांच होनी चाहिए।
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- Avtar Singh Bisht
- October 12, 2024
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हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स ,अवतार सिंह बिष्ट, अध्यक्ष ,उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद पूर्वमेयर रामपाल सिंह, तीन अन्य पर दर्ज मुकदमे में मीडिया ने लिखा गलत तथ्य ,वास्तव में माननीय न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ है। पेड़ों को काटने और गायब करने का जबकि मीडिया के लोग लिख रहे हैं सरकारी जमीन पर कब्जा किया जाने का मुकदमा हुआ है दर्ज।। जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी जमीन कब्जा किया जाने का मुकदमा नगर निगम अथवा जिला प्रशासन लिखवाता है ।कोई भी बाहर का व्यक्ति सरकारी जमीन से संबंधित मुकदमा नहीं लिखवा सकता।। जिस व्यक्ति बालक नाथ ने तीनों के विरुद्ध माननीय न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया है।। वह स्वयं नजूल पर काबिज हैं। और नजूल पर काबिज व्यक्ति के द्वारा नजूल पर कब्जाने का मुकदमा नहीं लिखाया जा सकता।। माननीय न्यायालय के आदेश पर निवृत्तिमान में रामपाल विकास शर्मा तथा रोशन अरोड़ा के विरुद्ध जो मुकदमा दर्ज हुआ है वह मुकदमा धारा 379 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 धारा 26 के अंतर्गत है ।यह दोनों धाराएं जमीन से संबंधित नहीं है। दोनों धाराएं वन विभाग की पेड़ों से तथा पेड़ों की जड़ों को लुप्त करने से संबंधित है। अधूरी जानकारी के चलते खबर प्रसारित हो रही है,सरकारी जमीन पर कब्जाने का मुकदमा दर्ज,
- Avtar Singh Bisht
- December 28, 2023
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देहरादून की हलचल से कुछ दूर, क्लेमेंट टाउन में स्थित है एक ऐसी जगह, जहाँ समय ठहर सा जाता है। यहाँ ना कोई राजनीतिक भाषण है, ना कोई भागमभाग। यहाँ सिर्फ है – मौन, मंत्र और ममता। हम बात कर रहे हैं माइंड रोलिंग मॉनेस्ट्री, जिसे आमजन बुद्ध मंदिर के नाम से जानते हैं। यह न केवल उत्तराखंड की आध्यात्मिक धरोहर है, बल्कि विश्व बौद्ध आस्था का एक जीवंत प्रतीक भी है। सन् 1959 के बाद जब तिब्बती धर्मगुरु और साधु भारत आए, तब उन्होंने अपनी परंपराओं को जीवित रखने के लिए देश के विभिन्न कोनों में बौद्ध मठों की स्थापना की। देहरादून का यह मंदिर 1965 में कोएन रिनपोछे और अन्य लामाओं द्वारा स्थापित किया गया। यह बौद्ध धर्म की न्योमा (Nyingma) परंपरा का मुख्य केंद्र है, जो महायान बौद्ध शाखा की सबसे पुरानी परंपरा मानी जाती है। बुद्ध मंदिर का मुख्य स्तूप, जिसकी ऊँचाई करीब 185 फुट है, पूरे भारत में सबसे ऊँचे स्तूपों में गिना जाता है। इसकी दीवारों पर उकेरे गए अष्टधातु चित्र, तिब्बती भित्तिचित्र (Murals), और सोने की परत से ढंकी बुद्ध प्रतिमा इसे नयनाभिराम बनाती है।पांच मंजिला इस संरचना में हर तल पर बुद्ध के जीवन, धर्मचक्र प्रवर्तन, और निर्वाण की कथाएं चित्रित की गई हैं। मंदिर परिसर में फैले बांस के झुरमुट, पुष्पवाटिका, और ध्यान स्थली मन को एक विलक्षण शांति प्रदान q यह मंदिर केवल एक पर्यटक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र है। यहां प्रतिदिन: ध्यान सत्र मंत्र जाप तिब्बती ग्रंथों का पठन बौद्ध दर्शन पर प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहां आने वाले साधु वर्षों तक रहकर “लुंग” (बौद्ध शास्त्रों का पाठ) और “रिगपा” (बोधि की स्थिति) की साधना करते हैं। — लोक आकर्षण: श्रद्धा और पर्यटन का मिलन बुद्ध मंदिर आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण है। मुख्य आकर्षण हैं: विशाल बुद्ध प्रतिमा और स्तूप रंग-बिरंगी प्रार्थना चक्र (Prayer Wheels) शांत उद्यान और कमल-ताल तिब्बती पुस्तकालय और ध्यान कक्ष परिसर में स्थित कैफे और हस्तशिल्प बाजार यहां हर वर्ष हजारों पर्यटक, साधक और विदेशी पर्यवेक्षक आते हैं। विशेष रूप से बुद्ध पूर्णिमा और तिब्बती नववर्ष (लोसर) पर हजारों श्रद्धालु यहां एकत्र होते हैं। शिक्षा और संस्कृति: परंपरा की पाठशाला मंदिर परिसर में स्थित Ngagyur Nyingma College में 300 से अधिक छात्र तिब्बती बौद्ध शास्त्रों, संस्कृत, ध्यान और तंत्र विद्या का अध्ययन करते हैं। यह कॉलेज तिब्बती संस्कृति के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। — देहरादून के लिए गौरव बुद्ध मंदिर ना केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यटन की दृष्टि से भी देहरादून की पहचान बन चुका है। क्लेमेंट टाउन के लोग इसे “शांति का द्वार” कहते हैं। जहाँ एक ओर देश के कोने-कोने में धार्मिक स्थलों की भीड़ और विवाद हैं, वहीं देहरादून का यह बुद्ध मंदिर हमें मौन में ध्यान, करुणा में शक्ति, और विनम्रता में क्रांति का संदेश देता है। यह स्थान हर उस व्यक्ति को आमंत्रण देता है जो जीवन की भीड़ में भीतर की शांति की तलाश में है।✍️ अवतार सिंह बिष्ट, संवाददाता,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी!
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