उधम सिंह नगर की कांग्रेस इन दिनों जश्न और अशांति—दोनों के बीच झूल रही है। एक खेमे में मिठाइयां बंट रही हैं, जश्न का माहौल है, तो दूसरे खेमे में इस्तीफों की फेहरिस्त बढ़ रही है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर हिमांशु गाबा की नियुक्ति और रुद्रपुर महानगर कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में ममता रानी की ताजपोशी ने कांग्रेस के भीतर खेमाबंदी को खुलेआम सतह पर ला दिया है।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
यह केवल संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि उधम सिंह नगर कांग्रेस की दशकों पुरानी सियासी परंपरा को चुनौती देने जैसा है। क्योंकि इस जिले में कांग्रेस की सियासत की डोर लंबे समय से पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता तिलक राज बहेड़ के हाथों में रही है। बहेड़ न केवल किच्छा के विधायक हैं बल्कि रुद्रपुर से लेकर किच्छा तक उनकी राजनीतिक पकड़ इतनी गहरी रही है कि एक समय कहा जाता था — “बिना तिलक राज बहेड़ की अनुमति के कांग्रेस का कोई पत्ता तक नहीं हिलता था।”
लेकिन वक्त बदल रहा है, और इस बार हाईकमान ने नया दांव खेला है। हिमांशु गाबा की नियुक्ति को राजनीतिक हलकों में ‘बहेड़ साम्राज्य’ को सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
बहेड़ का दबदबा और ‘राजमहल’ की चुप्पी?तिलक राज बहेड़ की सियासत उत्तराखंड कांग्रेस की नींव में गहरी जमी है। चाहे वह बतौर स्वास्थ्य मंत्री का कार्यकाल हो या विधानसभा में उनका दबदबा — बहेड़ को हमेशा एक ‘किंग मेकर’ के रूप में देखा गया। वे कांग्रेस के उन गिने-चुने नेताओं में हैं जिनकी आवाज सत्ता की गलियों में गूंजती रही।
लेकिन हिमांशु गाबा की ताजपोशी के बाद अब पहली बार ऐसा लग रहा है कि बहेड़ खेमे की दीवारों में दरारें पड़ने लगी हैं। रुद्रपुर नगर निगम के कई पार्षदों ने इस्तीफे की घोषणा कर दी है — यह सीधा संदेश है कि बहेड़ खेमे का असंतोष अब संगठन को अस्थिर कर सकता है।
पार्षदों के इस्तीफे केवल पदों से नहीं, बल्कि एक तरह से ‘राजनीतिक असहमति के दस्तावेज’ बन चुके हैं। यह संगठन की जड़ों को कमजोर करेगा, क्योंकि नगर निगम स्तर पर कांग्रेस की जमीनी पकड़ इन्हीं जनप्रतिनिधियों पर निर्भर थी।
हिमांशु बाबा का उदय — संगठन का नया चेहरा?हिमांशु गाबा का नाम कोई नया नहीं है। वे संगठन के भीतर एक युवा, ऊर्जावान और रणनीतिक नेता के रूप में देखे जाते रहे हैं। लंबे समय से कांग्रेस संगठन में सक्रिय गाबा को अब ‘सत्ता के शिखर का आशीर्वाद’ प्राप्त बताया जा रहा है।
कांग्रेस हाईकमान ने साफ संकेत दिया है कि अब संगठन को युवा नेतृत्व और नई सोच के साथ पुनर्गठित किया जाएगा। हिमांशु गाबा की नियुक्ति इसी दिशा में पहला कदम है।
उनके साथ रुद्रपुर महानगर अध्यक्ष के रूप में ममता रानी का चयन — जो कि पहली बार महिला नगर अध्यक्ष बनी हैं — कांग्रेस में ‘महिला सशक्तिकरण’ की झलक भी दिखाता है। परंतु राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि ममता रानी, हिमांशु गाबा के नजदीकी खेमे से हैं, जिससे स्पष्ट है कि पूरी नगर टीम गाबा की विचारधारा के इर्द-गिर्द गठित की गई है।
संगठन बनाम जनप्रतिनिधि — कांग्रेस की दोहरी चुनौती?उधम सिंह नगर में इस समय कांग्रेस दो हिस्सों में बंटी दिखाई दे रही है —
एक ओर संगठन का नया चेहरा (हिमांशु गाबा-ममता रानी टीम) है,
तो दूसरी ओर जनप्रतिनिधि वर्ग (तिलक राज बहेड़ खेमे के पार्षद ,पूर्व पार्षद, ब्लॉक अध्यक्ष, और पुराने कार्यकर्ता) हैं।
यह विभाजन केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि विचारों का भी है। पुराने कांग्रेसजन मानते हैं कि बहेड़ की अगुवाई में संगठन में अनुशासन और जनसंपर्क मजबूत रहा, जबकि नया नेतृत्व इस परिपाटी को ‘परंपरागत राजनीति की जकड़न’ बताकर उससे मुक्त होना चाहता है।
यदि यह खींचतान आगे बढ़ी, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान 2027 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को झेलना पड़ सकता है। क्योंकि जिला संगठन और जनप्रतिनिधि — दोनों की तालमेल से ही जमीनी मजबूती संभव है।
क्या पार्षदों के इस्तीफे से संगठन हिल जाएगा?राजनीतिक रूप से, नगर निगम के पार्षदों की भूमिका?राजनीतिक रूप से, नगर निगम के पार्षदों के इस्तीफे तत्कालिक दबाव तो बना सकते हैं, लेकिन हाईकमान के स्तर पर अब किसी बदलाव की संभावना नहीं दिखती। हिमांशु गाबा और ममता रानी को जब एक साथ नियुक्त किया गया, तब यह निर्णय आलाकमान के गहरे मंथन के बाद लिया गया था।
पार्षदों के इस्तीफे से न केवल स्थानीय संगठन में अस्थिरता आएगी बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि कांग्रेस अपने ही निर्णयों को स्थिर नहीं रख पाती — ऐसा प्रभाव चुनावी रूप से हानिकारक हो सकता है।
संगठन सूत्रों के अनुसार, पार्टी फिलहाल “किसी भी प्रकार के फेरबदल” के मूड में नहीं है। इसलिए, यह तय माना जा रहा है कि हिमांशु गाबा के नेतृत्व में ही नया जिला संगठन अपनी भूमिका निभाएगा, और बहेड़ खेमे को अब या तो अनुकूलन करना होगा या खुली बगावत की राह चुननी होगी।
ममता रानी’ की नियुक्ति — महिलाओं की नई पहचान या रणनीतिक कदम?ममता रानी की नियुक्ति कांग्रेस के लिए एक बड़ा प्रयोग है। वह न केवल पहली महिला महानगर अध्यक्ष हैं, बल्कि हिमांशु गाबा के साथ तालमेल में काम करने वाली युवा चेहरा भी हैं। यह कांग्रेस की उस नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें पार्टी ‘महिला और युवा नेतृत्व’ को साथ लेकर चलना चाहती है।
हालांकि विरोधी खेमे का तर्क है कि यह नियुक्ति संगठन की मजबूती नहीं बल्कि एक व्यक्ति विशेष की टीम बनाने का प्रयास है, जिससे पुराने कार्यकर्ताओं को किनारे किया जा रहा है।
राजनीतिक भविष्य की बिसात: बहेड़ बनाम गाबा, कौन भारी?अगर राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो तिलक राज बहेड़ अभी भी कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली और अनुभवी चेहरों में से एक हैं। उनका जनाधार मजबूत है, और रुद्रपुर-किच्छा की जनता में उनका नाम आज भी विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गौतम सिंह को प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र पार्टी ने यह निर्णय प्रचार रणनीति को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया है।
लेकिन हिमांशु गाबा का उदय कांग्रेस में ‘पीढ़ी परिवर्तन’ का संकेत है। हाईकमान अब नई सोच, सोशल मीडिया-प्रभावी नेतृत्व और कार्यकर्ता आधारित संगठन की तरफ झुकाव रखता है।
दोनों नेताओं की यह टक्कर केवल पद की नहीं, बल्कि कांग्रेस की भविष्य दिशा तय करेगी — क्या पार्टी पुराने नेतृत्व की परंपरा में आगे बढ़ेगी या नई ऊर्जा के साथ खुद को पुनर्परिभाषित करेगी।
कांग्रेस की अगली परीक्षा?उधम सिंह नगर की कांग्रेस फिलहाल अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी है।
जहां एक ओर तिलक राज बहेड़ की सियासी विरासत और नेटवर्क आज भी मजबूत है, वहीं दूसरी ओर हिमांशु गाबा ने अपनी नियुक्ति के साथ यह जता दिया है कि अब संगठन युवा नेतृत्व के हाथों में है।
पार्टी ने पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री कर्ण माहरा के योगदान को सराहते हुए उन्हें कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) में विशेष आमंत्रित सदस्य (विशेष आमंत्रित सदस्य) के रूप में शामिल किया है।
पार्टी ने अपने पद के लिए दिए गए योगदान के लिए भी अपना पद छोड़ा।
इस बीच ममता रानी की उपस्थिति कांग्रेस में महिला प्रतिनिधित्व की नई पहचान बनी है।
परंतु यह तभी कारगर होगी जब दोनों खेमे व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर कांग्रेस को एकजुट रखने का प्रयास करें।
यदि यह सियासी खींचतान लंबी चली, तो कांग्रेस को नुकसान केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि जनाधार के स्तर पर भी झेलना पड़ेगा।
और तब यह सवाल फिर उठेगा —
क्या कांग्रेस अपनी ही अंदरूनी लड़ाइयों में खुद को कमजोर कर रही है?
कांग्रेस अध्यक्ष की मंजूरी के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) ने मंगलवार को गणेश गोदियाल को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया था।
एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी प्रेस मॉनिटर के अनुसार, पार्टी ने प्रदेश स्तर पर दो महत्वपूर्ण उपाध्यक्षों की भी घोषणा की थी।
डॉ. हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्हें संगठन और चुनाव से जुड़ी रणनीति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रुद्रपुर कांग्रेस के 8 पार्षदों ने प्रेस वार्ता कर किया कांग्रेस से इस्तीफे का ऐलान इंद्रजीत सिंह, गौरव खुराना ,सुशील मंडल ,सौरभ बेहड़, सौरभ शर्मा शुभम दास, परवेज कुरैशी आदि पार्षदों उपस्थित l
(लेखक: अवतार सिंह बिष्ट, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक, रुद्रपुर, उत्तराखंड)
