जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन: NEET विवाद से राजनीतिक बहस तक, आंदोलन पर उठे कई सवाल

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नई दिल्ली, 19 जुलाई 2026। जंतर-मंतर पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा कथित NEET-UG परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के विरोध में शुरू किया गया आमरण अनशन राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और जवाबदेही की मांग उठाई है।
प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, कथित पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई तथा परीक्षा संबंधी तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने जैसी मांगें रखी हैं। हाल के घटनाक्रम के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी जोड़ी है।

NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक की शिकायतों के बाद सरकार और संबंधित एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले की जांच कराई तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए। इसके बाद परीक्षा दोबारा आयोजित की गई, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर मिला। परीक्षा संपन्न होने के बाद अनेक छात्रों ने संतोष व्यक्त किया और एक-दूसरे को बधाई देकर अपनी खुशी साझा की।
लंबे समय तक यह आरोप लगते रहे कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के बावजूद कई मामलों में परीक्षाएं रद्द नहीं होती थीं या कार्रवाई में देरी होती थी। वर्तमान मामले में सरकार ने जांच एजेंसियों को सक्रिय किया, संदिग्धों के विरुद्ध कार्रवाई की और दोबारा परीक्षा आयोजित कराकर निष्पक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास किया।
सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं तथा नकल और पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है। दूसरी ओर, कुछ छात्र संगठन अभी भी परीक्षा प्रणाली में और अधिक सुधार तथा जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, इस प्रकरण ने यह संदेश दिया है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समयबद्ध कार्रवाई, पारदर्शिता और कठोर कानून का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।


दूसरी ओर, इस आंदोलन को लेकर कई सवाल और आलोचनाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और सामाजिक टिप्पणीकारों का कहना है कि यदि सरकार ने जांच, सुधारात्मक कदम और परीक्षा संबंधी आवश्यक निर्णय लिए हैं, तो आंदोलन का मूल उद्देश्य किस सीमा तक पूरा हुआ और अब इसका स्वरूप कितना राजनीतिक हो गया है, इस पर चर्चा होनी चाहिए।
आलोचकों का यह भी कहना है कि आंदोलन की मांगें अब केवल शिक्षा सुधार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि राजनीतिक इस्तीफों की मांग तक पहुंच गई हैं। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि केवल जांच या पुनर्परीक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थागत सुधार और जवाबदेही आवश्यक है।
सोनम वांगचुक के लंबे अनशन और स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रदर्शनकारी के जीवन की सुरक्षा उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, जबकि आंदोलनकारी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण विरोध का हिस्सा बता रहे हैं।

जंतर-मंतर पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके पर स्याही फेंकी, युवती हिरासत में
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके पर एक युवती ने अचानक नीली स्याही फेंक दी, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई। घटना उस समय हुई जब दिपके कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल ले जाने के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा कर रहे थे। स्याही फेंकने के बाद मौजूद लोगों ने युवती को पकड़ लिया और दिल्ली पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। हमले के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। घटना के बाद अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, “नीला मेरा रंग है… जय भीम!”। जंतर-मंतर पर पिछले कई सप्ताह से नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन जारी है। इस घटना के बाद प्रदर्शन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था और तनाव को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।


इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, परीक्षा सुरक्षा, जवाबदेही और लोकतांत्रिक विरोध के तरीकों पर एक व्यापक राष्ट्रीय बहस को जन्म दिया है। मामले की जांच और विभिन्न मांगों पर सरकार तथा संबंधित एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।


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